हुसैन दलवई का भाजपा पर हमला: 'हिंदू राष्ट्र की राजनीति, रोजगार-शिक्षा पर ध्यान नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने 30 अक्टूबर 2026 को मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति हिंदुत्व के नाम पर हिंदू राष्ट्र बनाने तक सीमित रह गई है, जबकि विकास, रोजगार और शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दे उपेक्षित हैं। यह बयान महाराष्ट्र एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद आया, जिसमें शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने दो सीटें जीतीं, जबकि भाजपा और उसके सहयोगी दल एक भी सीट नहीं जीत पाए।
एमएलसी नतीजे और राजनीतिक समीकरण
दलवई ने कहा कि महाराष्ट्र एमएलसी चुनाव के नतीजे भाजपा और उसके सहयोगियों के लिए चेतावनी हैं। शरद पवार की पार्टी की दो सीटों की जीत और भाजपा गठबंधन का खाली हाथ रहना राजनीतिक संतुलन पर सवाल खड़े करता है। दलवई के अनुसार, इन परिणामों के बाद भाजपा और उसके सहयोगियों को आत्मचिंतन की जरूरत है।
उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पुनः एकजुट होने और भाजपा से दूरी बनाने की संभावना बढ़ गई है। यह दावा उन्होंने बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के किया, इसलिए इसे उनका राजनीतिक अनुमान माना जाना चाहिए।
पार्टियाँ तोड़ने पर आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा ने शिवसेना और NCP को विभाजित कर महाराष्ट्र की राजनीति को नुकसान पहुँचाया। दलवई ने कहा, 'एकनाथ शिंदे की राजनीति इसी तरह चलती रही है।' उन्होंने शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी को तोड़ने के फैसले को 'गलत कदम' बताया।
दलवई ने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को परेशान करने की कोशिश की गई। भाजपा की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई।
रोजगार, शिक्षा और आर्थिक असमानता पर चिंता
दलवई ने कहा कि मौजूदा दौर में नौकरियाँ जा रही हैं, नई नौकरियाँ नहीं मिल रही हैं और स्कूल बंद हो रहे हैं। उन्होंने महंगाई और आम लोगों की खाद्य समस्याओं का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, 'अर्थव्यवस्था का लाभ कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित हो रहा है' और आर्थिक केंद्रीकरण से आम जनता को कोई ठोस फायदा नहीं मिल रहा।
अस्पतालों की कमी और स्कूलों के बंद होने जैसे मुद्दों को उठाते हुए दलवई ने सरकार से जवाब माँगा। हालाँकि इन दावों के समर्थन में उन्होंने कोई आँकड़े या आधिकारिक रिपोर्ट का हवाला नहीं दिया।
बाजार बंद और दोहरे मापदंड का आरोप
व्यापारियों की चिंता और बाजार बंद होने से होने वाले नुकसान के सवाल पर दलवई ने कहा कि एक दिन बाजार बंद रहने पर इतनी चिंता उचित नहीं। उन्होंने मेट्रो और बस सेवाओं के बंद होने का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि उस समय व्यापारियों के नुकसान पर इसी तरह के सवाल क्यों नहीं उठाए गए थे। दलवई के अनुसार, यह 'दोहरा रवैया' स्वीकार्य नहीं है।
आरएसएस और चुनावी आरोप
दलवई ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आरएसएस से जुड़े लोग सरकार और संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर काबिज हैं। उन्होंने चुनाव में 'वोट चोरी' के आरोपों का भी उल्लेख किया और कहा कि 'चुनाव जीतने के लिए ऐसे रास्ते अपनाए जाते हैं।' दलवई ने वर्ष 2002 के दंगों और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लगे आरोपों का भी जिक्र किया, और कहा कि इन मुद्दों पर भाजपा की ओर से जवाब नहीं दिया जाता। ये सभी राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
आने वाले चुनावों में भाजपा को इन मुद्दों का राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है — यह दलवई की अपनी राय है, जिसे आगामी चुनावी नतीजे ही सिद्ध या खारिज करेंगे।