एमएलसी चुनाव नतीजे: उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने माना — आत्ममंथन जरूरी, महायुति में आरोप प्रत्यारोप
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की अध्यक्ष और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने 29 अक्टूबर 2026 को पुणे में पत्रकारों से बातचीत में स्वीकार किया कि महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजे पार्टी के लिए आत्ममंथन का विषय हैं। यह बयान छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में NCP उम्मीदवार सतीश चव्हाण की हार के बाद आया, जहाँ NCP (शरद पवार गुट) के उम्मीदवार प्रतापसिंह पाटिल ने जीत दर्ज की।
चुनाव नतीजों का समग्र चित्र
महायुति गठबंधन ने पुणे शिक्षक और अमरावती शिक्षक सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, महा विकास अघाड़ी (MVA) ने पुणे स्नातक, नागपुर स्नातक और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक — तीन सीटें जीतकर सत्तारूढ़ गठबंधन को करारा झटका दिया। यह परिणाम महायुति के लिए उस समय आया है जब महाराष्ट्र की सियासत में गठबंधन धर्म की परीक्षा लगातार होती रही है।
सुनेत्रा पवार की प्रतिक्रिया
सुनेत्रा पवार ने कहा, "हर चुनाव में जीत और हार होती है। परिणाम आने के बाद आत्ममंथन करना जरूरी होता है और हम ऐसा करेंगे। हम सुधार की कोशिश करेंगे। मुझे लगता है कि यह परिणाम निश्चित रूप से हमारे लिए आत्ममंथन का विषय है।" उनकी यह प्रतिक्रिया NCP के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद आई, जिसमें पटेल ने MLC नतीजों को पार्टी के लिए "एक स्पष्ट चेतावनी" बताया था।
पटेल ने लिखा था कि अब समय आ गया है कि पार्टी जनता का विश्वास दोबारा हासिल करे, अपनी प्राथमिकताएँ ठीक करे और संगठनात्मक ढाँचे को मजबूत बनाए। महाराष्ट्र NCP अध्यक्ष सुनील तटकरे ने भी कहा कि पार्टी चुनाव परिणामों का गहन विश्लेषण करेगी और उम्मीदवारों के चयन तथा परिणामों की जिम्मेदारी सामूहिक रूप से पार्टी नेतृत्व की होती है।
महायुति में आरोप प्रत्यारोप
नतीजों के बाद महायुति के सहयोगी दलों — भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना — के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। BJP प्रवक्ता नवनाथ बान ने आरोप लगाया कि पुणे में अंतिम समय में सचिन सनप को समर्थन देकर शिवसेना ने महायुति की एकजुटता को कमज़ोर किया और उसके वोट BJP उम्मीदवार के पक्ष में नहीं गए।
बान ने यह भी दावा किया कि छत्रपति संभाजीनगर में मंत्री अब्दुल सत्तार ने सीधे NCP उम्मीदवार के विरुद्ध प्रचार किया, जिससे गठबंधन को नुकसान हुआ। उनके अनुसार, यदि शिवसेना ने 'महायुति धर्म' का पालन करते हुए BJP और NCP उम्मीदवारों का समर्थन किया होता, तो गठबंधन पाँचों सीटें जीत सकता था।
शिवसेना का पलटवार
शिवसेना प्रवक्ता आनंद परांजपे ने BJP के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पुणे स्नातक सीट पर BJP ने ऐसा उम्मीदवार उतारा जो पार्टी का सदस्य तक नहीं था। परांजपे के अनुसार, यदि BJP ने किसी पुराने और समर्पित कार्यकर्ता को टिकट दिया होता, तो कार्यकर्ताओं और मतदाताओं में उत्साह होता।
उन्होंने कहा कि BJP के अपने कार्यकर्ताओं और मतदाताओं ने ही बाहरी उम्मीदवार को स्वीकार नहीं किया, इसलिए हार का ठीकरा शिवसेना पर फोड़ना उचित नहीं है। परांजपे ने यह भी कहा कि "सभी सीटों पर हम ही लड़ेंगे और हम ही जीतेंगे" जैसी सोच महायुति के लिए हानिकारक है और BJP को अपने सहयोगी दलों का सम्मान करना चाहिए। गौरतलब है कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली BJP को, शिवसेना नेता के अनुसार, सहयोगियों पर दोषारोपण के बजाय अपनी चुनावी रणनीति और संगठन के भीतर की नाराजगी पर ध्यान देना चाहिए।
आगे क्या
यह MLC नतीजा महायुति गठबंधन की आंतरिक एकता के लिए एक कड़ी परीक्षा बनकर सामने आया है। NCP, BJP और शिवसेना तीनों दलों के नेताओं ने अपने अपने स्तर पर आत्मसमीक्षा की बात तो कही है, लेकिन सार्वजनिक दोषारोपण यह संकेत देता है कि गठबंधन के भीतर समन्वय की गहरी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में पार्टी बैठकों और नेतृत्व स्तरीय विचार विमर्श से ही स्पष्ट होगा कि महायुति इस असफलता से कितना सबक लेता है।