एनसीपी (अजीत गुट) में नेतृत्व संकट गहराया: प्रशांत किशोर की एंट्री से तटकरे-पटेल खेमे में बेचैनी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अजीत पवार गुट में आंतरिक सत्ता संघर्ष 10 अगस्त 2026 को और तीखा हो गया, जब राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री एवं पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार तथा सांसद पार्थ पवार से मुलाकात की खबरें सामने आईं। इस मुलाकात को पार्टी की भावी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे वरिष्ठ नेताओं में असंतोष की लहर दौड़ गई है।
तटकरे की बेबसी और वरिष्ठ नेताओं की नाराज़गी
एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुनील तटकरे ने स्वीकार किया कि उन्हें प्रशांत किशोर की पार्टी सलाहकार के रूप में किसी आधिकारिक नियुक्ति की कोई जानकारी नहीं है। तटकरे ने कहा कि पार्टी को मज़बूत करने के लिए जनता से सीधा संवाद ज़रूरी है — जिसे राजनीतिक पर्यवेक्षक मौजूदा नेतृत्व की रणनीति पर अप्रत्यक्ष कटाक्ष मान रहे हैं।
राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल और तटकरे एक तरफ, तथा सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार दूसरी तरफ — यह विभाजन रेखा अब खुलकर सामने आ गई है। सुनेत्रा पवार की हालिया दिल्ली यात्रा के दौरान पटेल और तटकरे दोनों उनके कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए — जिसे पार्टी के अंदरूनी सूत्र दोनों खेमों के बीच बढ़ती दूरी का प्रतीक बता रहे हैं।
चुनाव आयोग का नोटिस और प्रशासनिक उलझन
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पार्टी प्रशासन से जुड़ी एक शिकायत के बाद एनसीपी को हालिया संगठनात्मक बदलावों पर आधिकारिक प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए नोटिस जारी किया है। यह नोटिस ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर प्रशासनिक अनिश्चितता चरम पर है।
चुनाव आयोग को सौंपी गई राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची में प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे के परिचालन पदनामों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था। कागज़ों पर पटेल को राज्यसभा में पार्टी नेता और तटकरे को लोकसभा में पार्टी नेता के रूप में ही दर्ज किया गया। सुनेत्रा पवार ने इसे 'प्रशासनिक त्रुटि' बताया और सुधार का आश्वासन दिया, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के अनुसार अभी तक कोई औपचारिक सुधार नहीं हुआ है।
गौरतलब है कि अजीत पवार के निधन से लेकर सुनेत्रा पवार के पार्टी अध्यक्ष चुने जाने तक की अवधि से संबंधित चुनाव आयोग को भेजे गए पार्टी पत्राचार को रद्द करने का अनुरोध पार्टी प्रतिनिधियों द्वारा औपचारिक रूप से किया गया था — जो इस संक्रमण काल की विवादास्पद प्रकृति को उजागर करता है।
पार्थ पवार की बढ़ती भूमिका और भुजबल का असंतोष
पर्यवेक्षकों के अनुसार पार्थ पवार ने अपने पिता के निधन के बाद पार्टी कामकाज में सक्रिय भूमिका निभाते हुए पटेल और तटकरे जैसे वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव को सीमित करने की कोशिश की। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि यही आंतरिक कलह की मुख्य जड़ है।
वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की निविदा प्रक्रिया में पार्थ पवार की कथित संलिप्तता पर सार्वजनिक रूप से असंतोष व्यक्त किया, जिससे विवाद और गहरा हो गया। पार्थ पवार पहले के चुनाव अभियानों में एक राजनीतिक परामर्श फर्म के मीडिया संचालन में भी भूमिका निभा चुके हैं।
नेतृत्व संक्रमण की पृष्ठभूमि
शुरुआती संकेत प्रफुल पटेल के नेतृत्व संभालने की ओर इशारा कर रहे थे, लेकिन पार्थ पवार ने धीरे-धीरे पार्टी प्रशासन पर अपनी पकड़ मज़बूत कर ली। यह ऐसे समय में हुआ जब पार्टी पहले से ही शरद पवार खेमे से अलग होने के बाद अपनी राजनीतिक पहचान स्थापित करने में जुटी है।
आगे क्या होगा
एनसीपी को अब ECI के नोटिस का जवाब देना है और पार्टी के आंतरिक ढाँचे को औपचारिक रूप देना है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि शीघ्र सुलह नहीं हुई, तो यह आंतरिक खींचतान महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में एनसीपी की स्थिति को कमज़ोर कर सकती है। प्रशांत किशोर की भूमिका और उनकी आधिकारिक नियुक्ति पर स्पष्टता आने वाले दिनों में इस संकट की दिशा तय करेगी।