शरद पवार बोले — प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे सक्षम, पर NCP नेतृत्व की राय अलग हो सकती है

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शरद पवार बोले — प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे सक्षम, पर NCP नेतृत्व की राय अलग हो सकती है

सारांश

शरद पवार ने पटेल और तटकरे को सक्षम बताते हुए NCP नेतृत्व पर परोक्ष निशाना साधा — ठीक उस वक्त जब सुनेत्रा पवार ने दोनों के नाम कार्यकारिणी से हटाए। साथ ही फडणवीस की भाषा पर आपत्ति और प्रधानमंत्री की मौजूदगी में सर्वदलीय बैठक की माँग ने पवार के बयान को बहुआयामी बना दिया।

मुख्य बातें

शरद पवार ने 14 मई को मुंबई में कहा कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे सक्षम नेता हैं, लेकिन NCP नेतृत्व का उनके बारे में आकलन अलग हो सकता है।
सुनेत्रा पवार ने ECI को लिखे पत्र में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से पटेल और तटकरे के नाम हटाए।
पूर्व लोकसभा सांसद और प्रवक्ता आनंद परांजपे ने NCP छोड़ी; कथित तौर पर श्रीकांत शिंदे के संपर्क में।
पवार ने प्रधानमंत्री की उपस्थिति में सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा राहुल गांधी के लिए इस्तेमाल की गई भाषा को पवार ने अनुचित बताया।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने 14 मई को मुंबई में कहा कि उनके पूर्व सहयोगी प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे निस्संदेह सक्षम नेता हैं, लेकिन सत्ताधारी एनसीपी के मौजूदा नेतृत्व का उनके बारे में आकलन अलग हो सकता है। पवार की यह टिप्पणी उस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में आई है जिसमें उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख सुनेत्रा पवार ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को लिखे पत्र में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से पटेल और तटकरे के नाम हटा दिए।

पवार का बयान और उसकी पृष्ठभूमि

शरद पवार ने स्पष्ट किया, 'मुझे दूसरी पार्टी में चल रही घटनाओं पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है। लेकिन पटेल और तटकरे, दोनों ने मेरे साथ कई सालों तक काम किया है और कई जिम्मेदारियाँ संभाली हैं। इसलिए मैं उनकी क्षमताओं को बहुत अच्छी तरह जानता हूँ। हो सकता है कि उनकी पार्टी के नेतृत्व का उनके बारे में आकलन अलग हो।' इन दोनों वरिष्ठ नेताओं के नाम हटाए जाने को शरद पवार और उनके पुत्र पार्थ पवार द्वारा उन्हें हाशिये पर धकेलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

तटकरे की मुलाकात और परांजपे का इस्तीफा

इस विवाद के बाद सुनील तटकरे ने शरद पवार से मुलाकात की, जिसे उन्होंने गैर-राजनीतिक बताया और कहा कि यह केवल पवार के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए थी। इसी बीच एनसीपी के वरिष्ठ नेता, पूर्व लोकसभा सांसद और पार्टी प्रवक्ता आनंद परांजपे ने पार्टी छोड़ दी। कहा जा रहा है कि परांजपे सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के बाद खाली हुई राज्यसभा सीट में रुचि रखते थे, लेकिन उन्हें पार्टी के भीतर किनारे लगा दिया गया। सूत्रों के अनुसार, परांजपे अब शिवसेना सांसद और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पुत्र श्रीकांत शिंदे के संपर्क में हैं।

राष्ट्रीय संकट पर पवार की चेतावनी

शरद पवार ने देश की मौजूदा स्थिति को गंभीर बताते हुए माँग की कि प्रधानमंत्री की उपस्थिति में सभी राष्ट्रीय नेताओं की बैठक बुलाई जाए। उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों में कई सर्वदलीय बैठकें हुई हैं, लेकिन प्रधानमंत्री उनमें से किसी में भी शामिल नहीं हुए। पवार ने कहा, 'अगर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री यह दावा कर रहे हैं कि स्थिति गंभीर है, तो सभी को इसे उतनी ही गंभीरता से लेना चाहिए।'

मंत्रियों के काफिले पर तीखी टिप्पणी

पवार ने नेताओं के आचरण पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'आज सुबह से मैं टीवी पर देख रहा हूँ — कोई मोटरसाइकिल से चल रहा है, तो कोई पैदल। एक व्यक्ति ने यह भी ऐलान किया कि चूँकि वह मंत्री है, इसलिए उसने अपनी कारों का काफिला 17 से घटाकर 8 कर दिया है। मुझे हैरानी हुई कि उसके पास शुरू में 17 कारें थीं, और घटाने के बाद भी 8 कारें हैं।'

फडणवीस की भाषा और रुपये की गिरावट पर चिंता

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए इस्तेमाल की गई भाषा पर पवार ने कहा कि वे शब्द अनुचित थे। उन्होंने याद दिलाया कि राहुल गांधी संसद में विपक्ष के नेता हैं — एक संवैधानिक पद — और उस पद पर बैठे व्यक्ति के लिए ऐसी भाषा का प्रयोग गलत है। गौरतलब है कि फडणवीस ने कहा था कि 'राहुल गांधी एक नकारे हुए नेता हैं।' रुपये की गिरावट पर पवार ने कहा कि ईरान के साथ मौजूदा वैश्विक तनाव का असर है, लेकिन सवाल उठाया कि क्या यही एकमात्र कारण है। एनसीपी में जारी इस उठापटक का असर महाराष्ट्र की राजनीति पर आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी परतों में सुनेत्रा पवार के नेतृत्व पर सीधी चुनौती है — बिना नाम लिए। NCP के दो टुकड़ों में बँटने के बाद से पवार की रणनीति यही रही है: औपचारिक टकराव से बचो, लेकिन प्रतिद्वंद्वी खेमे की वैधता पर सवाल उठाते रहो। परांजपे का जाना और तटकरे की मुलाकात बताती है कि सत्ताधारी NCP के भीतर असंतोष केवल बाहर से नहीं, भीतर से भी पक रहा है। फडणवीस पर भाषा को लेकर पवार की आपत्ति और सर्वदलीय बैठक की माँग — दोनों मिलकर यह संकेत देते हैं कि पवार खुद को महाराष्ट्र की राजनीति में 'नैतिक केंद्र' के रूप में स्थापित करना चाहते हैं, जो विपक्ष की एकजुटता के लिए ज़रूरी है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शरद पवार ने प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के बारे में क्या कहा?
शरद पवार ने कहा कि पटेल और तटकरे दोनों सक्षम नेता हैं और उन्होंने उनके साथ कई वर्षों तक काम किया है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि NCP के मौजूदा नेतृत्व का उनके बारे में आकलन अलग हो सकता है।
NCP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से पटेल और तटकरे के नाम क्यों हटाए गए?
उपमुख्यमंत्री और NCP प्रमुख सुनेत्रा पवार ने ECI को लिखे पत्र में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के नाम हटा दिए। इसे शरद पवार और पार्थ पवार द्वारा इन नेताओं को हाशिये पर धकेलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
आनंद परांजपे ने NCP क्यों छोड़ी?
वरिष्ठ नेता और पूर्व लोकसभा सांसद आनंद परांजपे ने NCP छोड़ दी। कहा जा रहा है कि वे सुनेत्रा पवार के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा सीट में रुचि रखते थे, लेकिन पार्टी के भीतर ही उन्हें किनारे लगा दिया गया।
शरद पवार ने देवेंद्र फडणवीस की भाषा पर क्या आपत्ति जताई?
पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी के लिए जिन शब्दों का इस्तेमाल किया, वे अनुचित थे। उन्होंने याद दिलाया कि विपक्ष का नेता एक संवैधानिक पद है और उस पद पर बैठे व्यक्ति के लिए ऐसी भाषा का प्रयोग गलत है।
शरद पवार ने सर्वदलीय बैठक की माँग क्यों की?
पवार ने देश की मौजूदा स्थिति को गंभीर बताते हुए प्रधानमंत्री की उपस्थिति में सभी राष्ट्रीय नेताओं की बैठक बुलाने की माँग की। उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों में हुई सर्वदलीय बैठकों में प्रधानमंत्री शामिल नहीं हुए।
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