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शरद पवार का बड़ा बयान: राष्ट्रीय राजनीति में दो ध्रुव, 'इंडिया' ब्लॉक को साझा रणनीति ज़रूरी

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शरद पवार का बड़ा बयान: राष्ट्रीय राजनीति में दो ध्रुव, 'इंडिया' ब्लॉक को साझा रणनीति ज़रूरी

सारांश

दिल्ली में 'इंडिया' ब्लॉक की बैठक के बीच शरद पवार का स्पष्ट संदेश — राष्ट्रीय राजनीति दो ध्रुवों में बँट चुकी है। अगले 8 से 15 दिनों में वरिष्ठ विपक्षी नेताओं की बैठक बुलाई जाएगी और DMK की अनुपस्थिति के बावजूद एकता की कोशिशें जारी हैं।

मुख्य बातें

शरद पवार ने 8 जून को नई दिल्ली में 'इंडिया' ब्लॉक बैठक के दौरान कहा कि राष्ट्रीय राजनीति में दो स्पष्ट ध्रुव बन चुके हैं।
एक ओर PM नरेंद्र मोदी का सत्तारूढ़ गठबंधन, दूसरी ओर असहमत विपक्षी दल एकजुट होने की कोशिश में।
DMK इस बैठक में शामिल नहीं हुई; एनसीपी (शरद पवार गुट) की ओर से सांसद सुप्रिया सुले उपस्थित रहीं।
अगले 8 से 15 दिनों में वरिष्ठ विपक्षी नेताओं की एक और बैठक आयोजित होगी।
पवार ने कहा — अगले 2 से 3 वर्षों में कोई बड़ा राष्ट्रीय चुनाव नहीं, इसलिए संगठन मज़बूत करने का समय उपलब्ध।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने 8 जून को नई दिल्ली में 'इंडिया' ब्लॉक की बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि देश की राष्ट्रीय राजनीति इस समय दो सुस्पष्ट ध्रुवों में विभाजित हो चुकी है — एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला सत्तारूढ़ गठबंधन है, और दूसरी ओर उनकी विचारधारा से असहमत दल एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं। पवार ने कहा कि इन परिस्थितियों में विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।

बैठक की पृष्ठभूमि और मौजूदा स्थिति

दिल्ली में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में एनसीपी (शरद पवार गुट) की ओर से सांसद सुप्रिया सुले उपस्थित रहीं। पवार ने बताया कि तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) इस बैठक में शामिल नहीं हो रही, हालाँकि विपक्षी एकता को मज़बूत करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि बैठक के निष्कर्ष और आगे की दिशा उसी शाम तक स्पष्ट हो जाएगी।

राज्यों में अलग-अलग रणनीति, समन्वय की ज़रूरत

पवार ने स्वीकार किया कि हाल के विधानसभा चुनावों में विपक्षी दलों ने एकसमान रणनीति नहीं अपनाई। कुछ राज्यों में दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा, जबकि कुछ स्थानों पर वे अलग-अलग मैदान में उतरे। चुनाव परिणामों के बाद कई राज्यों में राजनीतिक समीकरण भी बदले। उन्होंने कहा कि इन अनुभवों से सीख लेते हुए साझा रणनीति तैयार करना ज़रूरी है।

अगले 8 से 15 दिनों में वरिष्ठ नेताओं की बैठक

पवार ने जानकारी दी कि अगले 8 से 15 दिनों के भीतर वरिष्ठ विपक्षी नेताओं की एक और बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें व्यापक स्तर पर चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी दल को अतिवादी या अत्यधिक कठोर रुख अपनाने से बचना चाहिए, क्योंकि विपक्षी एकता का उद्देश्य व्यापक लोकतांत्रिक सहमति बनाना है।

आगे की राह: समय अनुकूल, अवसर बड़ा

पवार ने रेखांकित किया कि अगले दो से तीन वर्षों में कोई बड़ा राष्ट्रीय चुनाव नहीं है, जिससे विपक्षी दलों के पास अपने संगठनात्मक ढाँचे को मज़बूत करने और साझा राजनीतिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए पर्याप्त समय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा मतभेदों का समाधान निकलेगा और सभी दल एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब 'इंडिया' गठबंधन की आंतरिक एकजुटता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन साझा नेतृत्व, साझा एजेंडा और सीट-बँटवारे का कोई ठोस ढाँचा सामने नहीं आया है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष के पास दो से तीन साल का समय है — अगर इस अवधि में भी केवल 'समन्वय की ज़रूरत' पर बयान आते रहे और संरचनात्मक एकता नहीं बनी, तो यह अवसर भी गँवाया जा सकता है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शरद पवार ने 'दो ध्रुव' से क्या मतलब निकाला?
पवार ने कहा कि एक ओर PM नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला सत्तारूढ़ गठबंधन है और दूसरी ओर उनकी विचारधारा से असहमत विपक्षी दल एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार यह विभाजन अब राष्ट्रीय राजनीति में स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।
'इंडिया' ब्लॉक की इस बैठक में कौन शामिल हुआ और कौन नहीं?
8 जून को दिल्ली में हुई इस बैठक में एनसीपी (शरद पवार गुट) की ओर से सांसद सुप्रिया सुले शामिल हुईं। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी DMK इस बैठक में उपस्थित नहीं थी।
अगली विपक्षी बैठक कब होगी?
शरद पवार के अनुसार अगले 8 से 15 दिनों के भीतर वरिष्ठ विपक्षी नेताओं की एक और बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें व्यापक चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
पवार ने विपक्षी एकता को लेकर क्या सलाह दी?
पवार ने कहा कि किसी भी दल को अतिवादी या अत्यधिक कठोर रुख नहीं अपनाना चाहिए। उनके मुताबिक विपक्षी एकता का उद्देश्य व्यापक लोकतांत्रिक सहमति बनाना है, न कि किसी एक दल की शर्तों पर गठबंधन थोपना।
क्या अगले कुछ वर्षों में कोई बड़ा राष्ट्रीय चुनाव है?
पवार ने कहा कि अगले दो से तीन वर्षों में कोई बड़ा राष्ट्रीय चुनाव नहीं है, जिससे विपक्षी दलों के पास संगठनात्मक ढाँचा मज़बूत करने और साझा रणनीति बनाने का पर्याप्त समय उपलब्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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