क्या अजित पवार को बड़ा झटका मिला है? भाजपा ने पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम चुनावों में दबदबा बनाया

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क्या अजित पवार को बड़ा झटका मिला है? भाजपा ने पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम चुनावों में दबदबा बनाया

सारांश

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम चुनावों में मिली हार ने उनकी राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर दिया है। यह स्थिति उनके लिए चिंताजनक है, क्योंकि अब उनके पास कोई ठोस विकल्प नहीं बचा है। जानिए इस हार के पीछे की वजहें और अजित पवार का अगला कदम क्या होगा।

Key Takeaways

  • अजित पवार को राजनीतिक दृष्टि से बड़ा झटका लगा है।
  • भाजपा ने चुनावों में स्पष्ट जीत दर्ज की है।
  • महायुति गठबंधन की स्थिति कमजोर हुई है।
  • अजित पवार को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करना होगा।
  • भविष्य में राजनीतिक विकल्प सीमित हो सकते हैं।

पुणे, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को राजनीतिक दृष्टि से एक बड़ा झटका लगा है। पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम चुनावों में एनसीपी के उनके गुट को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

इस हार ने न केवल भाजपा को उनके गृह क्षेत्र में चुनौती देने की उनकी रणनीति को ध्वस्त कर दिया है, बल्कि महायुति गठबंधन में दबी हुई भूमिका निभाने के अलावा उनके पास कोई विकल्प भी नहीं बचा है।

अजित पवार ने एनसीपी के भीतर अपने विद्रोह के बाद से भाजपा के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे थे, खासकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा के बीच लगातार होने वाले टकरावों की तुलना में। हालांकि, जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की कि भाजपा पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगी तो पवार ने अपनी रणनीति बदल दी।

एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए उन्होंने शरद पवार के एनसीपी गुट के साथ स्थानीय गठबंधन किया। राज्य स्तर पर भाजपा का सहयोगी होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर उनके प्रतिद्वंद्वियों के साथ गठबंधन करने की यह "दोहरी रणनीति" पूरी तरह से विफल रही।

व्यापक प्रचार अभियान और मुफ्त बस और मेट्रो यात्रा जैसे बड़े-बड़े वादों के बावजूद दोनों शहरों के मतदाताओं ने अजित पवार के नेतृत्व को निर्णायक रूप से नकार दिया। पुणे में एनसीपी को करारी हार का सामना करना पड़ा। वहीं पिंपरी-चिंचवाड़ में भाजपा ने एनसीपी के प्रभाव को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया।

चुनाव प्रचार की आक्रामक शैली ने गठबंधन के साझेदारों के बीच संबंधों को खराब कर दिया है। रैलियों के दौरान, अजित पवार ने भाजपा के नेतृत्व वाली मौजूदा नगर पालिका प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। इससे तीखी प्रतिक्रिया हुई। राज्य भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने हाल ही में गठबंधन पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी को अजित पवार को गठबंधन में शामिल करने का पछतावा है।

राज्यभर में मौजूद 29 नगर निगमों में से एक में भी एनसीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने में विफल रही है, ऐसे में महापौर पद हासिल करने की उसकी संभावनाएं न के बराबर हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब पवार की राजनीतिक स्थिति को और कमजोर करने पर ध्यान केंद्रित कर सकती है।

राजनीतिक गलियारों में अजित पवार के अगले कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। फिलहाल उनके सामने दो विकल्प हैं। पहला, वे भाजपा से संबंध तोड़ने पर विचार कर सकते हैं, लेकिन राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर भाजपा की मजबूत स्थिति को देखते हुए यह एक जोखिम भरा कदम होगा।

दूसरा विकल्प यह है कि वे चुपचाप महायुति सरकार में बने रहें, लेकिन अपनी भूमिका कम कर लें और भाजपा के साये में रहकर राजनीतिक रूप से अपना अस्तित्व बनाए रखें।

मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए, पर्यवेक्षकों का मानना है कि उपमुख्यमंत्री बाद वाला विकल्प ही चुनेंगे, क्योंकि मौजूदा परिदृश्य में भाजपा को और चुनौती देना राजनीतिक रूप से घातक साबित हो सकता है।

Point of View

अजित पवार की हार ने उनके राजनीतिक भविष्य को गंभीर संकट में डाल दिया है। भाजपा की मजबूत स्थिति और उनके द्वारा उठाए गए कदमों के परिणामस्वरूप, पवार को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। यह स्थिति न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है।
NationPress
16/01/2026

Frequently Asked Questions

पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ चुनावों में एनसीपी के लिए क्या गलत हुआ?
एनसीपी के नेतृत्व में चुनावी रणनीति और भाजपा के साथ मुकाबला करने में विफलता प्रमुख कारण रहे।
अजित पवार का अगला कदम क्या हो सकता है?
वे भाजपा से संबंध तोड़ने या महायुति में बने रहने का निर्णय ले सकते हैं।
भाजपा की सफलता का कारण क्या है?
भाजपा ने चुनावों में स्वतंत्र रूप से लड़ने का निर्णय लिया, जिससे उन्हें स्पष्ट लाभ मिला।
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