सिंगूर में ₹1,500 करोड़ का केमिकल पार्क: भाजपा सांसद समिक भट्टाचार्य का CM अधिकारी को प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने राज्य में ₹1,500 करोड़ से अधिक की लागत वाले एक विशेष केमिकल पार्क की स्थापना का प्रस्ताव तैयार किया है। यह प्रस्ताव उन्होंने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को सौंपा है, जिसमें हुगली जिले के सिंगूर को इस परियोजना के लिए सबसे उपयुक्त स्थलों में से एक बताया गया है। सिंगूर का नाम एक बार फिर औद्योगिक विमर्श के केंद्र में आ गया है — इस बार विरोध की नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण की संभावना के साथ।
भव्य रसायन योजना: केंद्र की पहल और राज्य का अवसर
भट्टाचार्य के प्रस्ताव की नींव केंद्रीय कैबिनेट की उस मंजूरी पर टिकी है, जो 24 जुलाई 2026 को दी गई। केंद्र सरकार की 'भव्य रसायन योजना' कुल ₹3,030 करोड़ की है, जिसके तहत देशभर में तीन विशेष केमिकल पार्क स्थापित किए जाएंगे। इस योजना में भाग लेने के लिए राज्य को कम से कम 2,000 एकड़ की अखंडित और विवाद-मुक्त भूमि उपलब्ध करानी होगी। साथ ही, राज्य सरकार को ₹500 करोड़ का अंशदान देना होगा, जिसके बदले केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के लिए ₹1,000 करोड़ तक की ग्रांट प्रदान करेगी।
सिंगूर सहित चार संभावित स्थल
भट्टाचार्य ने प्रस्ताव में चार स्थानों को संभावित विकल्प के रूप में रेखांकित किया है। इनमें हुगली जिले का सिंगूर, पूर्वी मिदनापुर जिले का हल्दिया, बांकुरा जिले का रघुनाथपुर और पश्चिम बर्दवान जिले का दुर्गापुर शामिल हैं। हल्दिया पहले से ही पेट्रोकेमिकल उद्योग का केंद्र है, जबकि दुर्गापुर और रघुनाथपुर में बड़े औद्योगिक भूखंड उपलब्ध हैं। सिंगूर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इसे राजनीतिक दृष्टि से सबसे संवेदनशील विकल्प बनाती है।
सिंगूर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि सिंगूर ने 2007 में अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा था, जब तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के कार्यकाल में टाटा मोटर्स के 'नैनो' प्रोजेक्ट के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण के विरुद्ध बड़ा जन-आंदोलन भड़का था। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अगुवाई में हुए इस आंदोलन ने अक्सर हिंसक रूप लिया। अंततः टाटा ग्रुप के तत्कालीन चेयरमैन रतन टाटा ने नैनो प्लांट को सिंगूर से हटाने की घोषणा की — और राज्य के सबसे विवादित औद्योगिक अध्याय का पटाक्षेप हो गया। यह पश्चिम बंगाल की औद्योगिक नीति के लिए एक बड़ा झटका माना जाता है, जिसकी छाया आज भी निवेशकों की धारणा पर पड़ती है।
रोजगार और आर्थिक संभावनाएँ
भट्टाचार्य के अनुसार, प्रस्तावित केमिकल पार्क से निर्माण, प्लांट संचालन, लॉजिस्टिक्स और सहायक MSME क्षेत्र में प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त, कृषि, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में भी मल्टीप्लायर प्रभाव की उम्मीद जताई गई है। प्रस्ताव में CETP, TSDF, यूटिलिटीज और पाइपलाइन जैसी 'प्लग-एंड-प्ले' औद्योगिक अवसंरचना विकसित करने की भी बात कही गई है, जो एंकर निवेशकों को आकर्षित करने में सहायक होगी।
प्रस्ताव में सुझाई गई कार्ययोजना
भट्टाचार्य ने मुख्यमंत्री को राज्य के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग और पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (WBIDC) की अगुवाई में एक अंतर-विभागीय टास्क फोर्स गठित करने का सुझाव दिया है। यह टास्क फोर्स राज्य का 'चैलेंज रूट' सबमिशन तैयार करेगी। साथ ही, WBIDC को भूमि के स्वामित्व, कानूनी विवाद-मुक्त स्थिति और बुनियादी ढाँचे की तत्परता से जुड़े दस्तावेज अद्यतन करने का निर्देश देने की अनुशंसा भी की गई है। भट्टाचार्य ने यह भी सुझाया कि मुख्यमंत्री आधिकारिक दिशानिर्देश जारी होने से पहले ही केंद्रीय रसायन एवं पेट्रोकेमिकल मंत्रालय के साथ सक्रिय संवाद स्थापित करें। उन्होंने कहा, 'यह इस बात का संकेत है कि पश्चिम बंगाल बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश के लिए तैयार है, और यह ऐसे समय में हो रहा है जब दूसरे राज्य भी तेजी से अपनी दावेदारी पेश करने की कोशिश करेंगे।' अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस प्रस्ताव पर कितनी तेजी से और किस रूप में प्रतिक्रिया देती है।