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अखिलेश यादव बने लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष, शिवपाल यादव को यूपी चुनाव से पहले हटाया

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अखिलेश यादव बने लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष, शिवपाल यादव को यूपी चुनाव से पहले हटाया

सारांश

यूपी चुनाव 2027 से पहले सपा में बड़ा फेरबदल — अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल को लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष पद से हटाकर खुद कमान संभाल ली। करीब नौ साल बाद हुए इस बदलाव ने सपा के भीतर सत्ता-केंद्रीकरण और पारिवारिक तनाव की नई बहस छेड़ दी है।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल यादव को हटाकर लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी खुद संभाली।
शिवपाल यादव 2017 से लोहिया ट्रस्ट की कमान संभाल रहे थे; अब लगभग 9 वर्षों बाद यह बदलाव हुआ।
ट्रस्ट की बैठक में आठों सदस्यों ने सर्वसम्मति से अखिलेश को अध्यक्ष बनाने पर सहमति जताई।
अखिलेश यादव अब लोहिया ट्रस्ट और जनेश्वर ट्रस्ट — दोनों के अध्यक्ष हैं।
यह फेरबदल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा में सत्ता-केंद्रीकरण के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव को लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष पद से हटाकर स्वयं यह जिम्मेदारी संभाल ली है। यह बदलाव उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ऐसे समय में हुआ है, जब सपा के भीतर सत्ता-केंद्रीकरण की प्रक्रिया तेज़ होती दिख रही है। पिछले लगभग नौ वर्षों से लोहिया ट्रस्ट की बागडोर शिवपाल यादव के हाथ में थी।

क्या है लोहिया ट्रस्ट और इसका महत्व

लोहिया ट्रस्ट का गठन समाजवादी पार्टी की स्थापना से भी पहले हो चुका था, इसलिए सपा की वैचारिक विरासत में इस ट्रस्ट का विशेष स्थान है। इस ट्रस्ट का मुख्य काम समाजवादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करना और पार्टी के लिए निधि जुटाना है। सपा से जुड़े नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के बीच यह ट्रस्ट हमेशा से एक महत्वपूर्ण संस्था मानी जाती रही है।

मुख्य घटनाक्रम

जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले हुई ट्रस्ट की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी अखिलेश यादव को सौंपी जाए। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में शिवपाल यादव सहित सभी आठ सदस्यों ने इस फैसले पर सहमति जताई। ट्रस्ट के सदस्यों में अखिलेश यादव, शिवपाल यादव, दीपक मिश्रा, आदित्य यादव, राम नरेश यादव (इटावा), राम सेवक यादव, वीरपाल यादव (बरेली) और राजेश यादव शामिल हैं।

इस बदलाव के साथ ही सपा मुखिया अब लोहिया ट्रस्ट और जनेश्वर ट्रस्ट — दोनों के अध्यक्ष बन गए हैं, जो पार्टी और उससे जुड़ी संस्थाओं पर उनके नियंत्रण को और मज़बूत करता है।

2017 की पारिवारिक कलह की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 2017 में सपा के भीतर बड़ा पारिवारिक विवाद हुआ था, जब मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच मतभेद सार्वजनिक हो गए थे। उसी दौर में अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच खुली बहस भी देखी गई थी। उसी समय मुलायम सिंह यादव ने ट्रस्ट की जिम्मेदारी प्रोफेसर रामगोपाल यादव से हटाकर शिवपाल यादव को सौंपी थी। अब नौ वर्ष बाद इस ट्रस्ट पर एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन हुआ है, लेकिन इस बार सत्ता शिवपाल से अखिलेश की ओर खिसकी है।

सियासी असर और विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा उस दौर से काफी आगे निकल चुकी है जब पार्टी और परिवार से जुड़ी संस्थाओं में शक्ति के अलग-अलग केंद्र दिखाई देते थे। इस कदम को पार्टी-ढाँचे के केंद्रीकरण की दिशा में एक सुनियोजित कदम के रूप में देखा जा रहा है।

हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले यह फेरबदल अखिलेश-शिवपाल के बीच उभरते मतभेदों का संकेत भी हो सकता है। सपा के लिए यह एक संवेदनशील मोड़ है क्योंकि पार्टी को चुनावी एकता की सबसे अधिक ज़रूरत इसी समय है।

आगे क्या

लोहिया ट्रस्ट की नई अध्यक्षता के साथ अखिलेश यादव अब पार्टी और उससे जुड़ी वैचारिक संस्थाओं दोनों पर मज़बूत पकड़ रखते हैं। राजनीतिक गलियारों में यह देखा जा रहा है कि शिवपाल यादव इस परिवर्तन को किस रूप में स्वीकार करते हैं और क्या चुनाव तक सपा परिवार एकजुट रह पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसी समय यह बदलाव हुआ है। केंद्रीकरण संगठनात्मक दक्षता तो दे सकता है, लेकिन शिवपाल के समर्थक वर्ग को नाराज़ करने का जोखिम भी उठाता है — जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कुछ सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। मुख्यधारा की कवरेज इसे 'पारिवारिक सामंजस्य' के रूप में पेश कर सकती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या शिवपाल का चुनावी सहयोग इस फैसले के बाद उतना ही उत्साही रहेगा।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोहिया ट्रस्ट क्या है और सपा में इसका क्या महत्व है?
लोहिया ट्रस्ट समाजवादी पार्टी की स्थापना से भी पहले बनी एक वैचारिक संस्था है, जिसका काम समाजवादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार और पार्टी के लिए निधि जुटाना है। सपा की विरासत में इस ट्रस्ट का विशेष स्थान माना जाता है।
अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव को लोहिया ट्रस्ट से क्यों हटाया?
आधिकारिक रूप से ट्रस्ट की बैठक में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया। हालाँकि, राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह कदम सपा के भीतर सत्ता-केंद्रीकरण और अखिलेश-शिवपाल के बीच उभरते मतभेदों से भी जुड़ा हो सकता है, खासकर यूपी चुनाव 2027 की पृष्ठभूमि में।
शिवपाल यादव कब से लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष थे?
2017 में पारिवारिक विवाद के दौरान मुलायम सिंह यादव ने ट्रस्ट की जिम्मेदारी प्रोफेसर रामगोपाल यादव से हटाकर शिवपाल यादव को सौंपी थी। तब से लगभग नौ वर्षों तक शिवपाल यादव इस ट्रस्ट की अध्यक्षता करते रहे।
अखिलेश यादव अब किन-किन ट्रस्टों के अध्यक्ष हैं?
लोहिया ट्रस्ट की कमान संभालने के बाद अखिलेश यादव अब लोहिया ट्रस्ट और जनेश्वर ट्रस्ट — दोनों के अध्यक्ष बन गए हैं। इससे पार्टी और उससे जुड़ी संस्थाओं पर उनका नियंत्रण और मज़बूत हो गया है।
यूपी चुनाव 2027 से पहले इस फेरबदल का क्या सियासी असर होगा?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम सपा में केंद्रीकृत नेतृत्व की दिशा में है, लेकिन चुनाव से पहले शिवपाल समर्थक वर्ग में असंतोष की आशंका भी जताई जा रही है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी की एकता बनी रहती है या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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