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पश्चिम बंगाल में BJP के समिक भट्टाचार्य का बड़ा संकेत: लैंड पॉलिसी बदलेगी, निवेश का रास्ता खुलेगा

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पश्चिम बंगाल में BJP के समिक भट्टाचार्य का बड़ा संकेत: लैंड पॉलिसी बदलेगी, निवेश का रास्ता खुलेगा

सारांश

पश्चिम बंगाल BJP प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बंगाल चेंबर ऑफ कॉमर्स में व्यापारियों को आश्वस्त किया कि नई सरकार लैंड पॉलिसी बदलेगी और निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाएगी — TMC के 15 साल के शासन में रुके निवेश को पटरी पर लाने का वादा।

मुख्य बातें

समिक भट्टाचार्य ने 12 मई को बंगाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में लैंड पॉलिसी बदलाव के संकेत दिए।
TMC के 15 वर्षों के शासन में राज्य में कोई बड़ा नया निवेश नहीं आया — भट्टाचार्य का दावा।
2011 से ममता बनर्जी सरकार ने औद्योगिक उद्देश्यों के लिए राज्य द्वारा भूमि अधिग्रहण की किसी भी भूमिका से इनकार किया था।
उद्योग विशेषज्ञों और आर्थिक विश्लेषकों ने इस नीति की आलोचना करते हुए कहा था कि इससे विनिर्माण क्षेत्र में निवेश हतोत्साहित होगा।
भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि वे नई राज्य सरकार के पदाधिकारी नहीं हैं और ये बातें व्यक्तिगत आश्वासन के रूप में कही हैं।

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य समिक भट्टाचार्य ने संकेत दिया है कि राज्य में नई सरकार बनने के बाद लैंड पॉलिसी में आमूल बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि बड़े औद्योगिक निवेश को आकर्षित किया जा सके। 12 मई को कोलकाता में बंगाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की एक व्यापारिक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।

मुख्य घटनाक्रम

समिक भट्टाचार्य ने व्यापारियों की सभा में कहा, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 वर्षों के शासनकाल में राज्य में एक भी नया बड़ा निवेश नहीं आया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के उद्योगपतियों और व्यापारियों ने भी अपना निवेश अन्य राज्यों में स्थानांतरित कर लिया। उनके अनुसार, पिछली राज्य सरकार ने बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए उद्योगपतियों को कोई सहयोग नहीं दिया।

भट्टाचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक बड़ा अंतर्विरोध भी है — उन्होंने खुद स्वीकार किया कि वे नई सरकार के पदाधिकारी नहीं हैं, फिर भी नीतिगत बदलावों का आश्वासन दे रहे हैं। पश्चिम बंगाल में भूमि अधिग्रहण का मुद्दा ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील रहा है — सिंगूर और नंदीग्राम जैसी घटनाएँ इसी विवाद की उपज थीं, जिनसे TMC का उदय हुआ था। ऐसे में लैंड पॉलिसी बदलाव की बात करना जितना आर्थिक रूप से ज़रूरी है, उतना ही राजनीतिक रूप से जोखिम भरा भी है। असली परीक्षा तब होगी जब कोई नई सरकार इसे लागू करने की कोशिश करेगी।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समिक भट्टाचार्य ने लैंड पॉलिसी बदलाव के बारे में क्या कहा?
समिक भट्टाचार्य ने 12 मई को बंगाल चेंबर ऑफ कॉमर्स में कहा कि निवेश को सुगम बनाने के लिए राज्य की लैंड पॉलिसी में तत्काल बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नई राज्य सरकार निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
TMC सरकार की लैंड पॉलिसी क्या थी और इसकी आलोचना क्यों हुई?
2011 में सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC सरकार ने बड़े उद्योगों के लिए भूमि अधिग्रहण में राज्य की किसी भी भूमिका से इनकार कर दिया था। उद्योग विशेषज्ञों और आर्थिक विश्लेषकों ने इस नीति की आलोचना करते हुए कहा था कि इससे विनिर्माण क्षेत्र में निवेश हतोत्साहित होगा।
पश्चिम बंगाल में निवेश की स्थिति कैसी रही है?
भट्टाचार्य के अनुसार, TMC के 15 वर्षों के शासनकाल में राज्य में एक भी नया बड़ा निवेश नहीं आया और स्थानीय उद्योगपतियों ने भी अन्य राज्यों में निवेश को प्राथमिकता दी। बिगड़ती कानून व्यवस्था को भी निवेश न आने का एक प्रमुख कारण बताया गया।
क्या भट्टाचार्य नई राज्य सरकार की ओर से बोल रहे थे?
नहीं। भट्टाचार्य ने स्वयं स्पष्ट किया कि वे नई राज्य सरकार में कोई पदाधिकारी नहीं हैं और उनके बयान सरकार की आधिकारिक नीति नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत आश्वासन के रूप में यह बातें कह रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में भूमि अधिग्रहण का मुद्दा इतना संवेदनशील क्यों है?
पश्चिम बंगाल में भूमि अधिग्रहण का मुद्दा ऐतिहासिक रूप से विवादास्पद रहा है। सिंगूर और नंदीग्राम जैसी घटनाओं ने इसे राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बना दिया, जिसके कारण TMC ने औद्योगिक भूमि अधिग्रहण में राज्य की भूमिका को पूरी तरह नकार दिया था।
राष्ट्र प्रेस
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