टीएमसी की आंतरिक हिंसा पर समिक भट्टाचार्य का पलटवार, भाजपा पर आरोपों को बताया बेबुनियाद

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टीएमसी की आंतरिक हिंसा पर समिक भट्टाचार्य का पलटवार, भाजपा पर आरोपों को बताया बेबुनियाद

सारांश

भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने चुनाव बाद हिंसा के आरोपों को पलटते हुए कहा — असली संघर्ष टीएमसी के भीतर है। बारासात और दिलीप घोष वाले उदाहरण देकर उन्होंने साबित करने की कोशिश की कि हमलावर और पीड़ित दोनों तृणमूल से हैं।

मुख्य बातें

समिक भट्टाचार्य ने 6 मई 2026 को कहा कि चुनाव बाद हिंसा में टीएमसी के लोग ही एक-दूसरे पर हमला कर रहे हैं।
बारासात के एक उम्मीदवार और पूर्व सांसद दिलीप घोष को फोन करने वाले टीएमसी उम्मीदवार के उदाहरण दिए गए।
मुर्शिदाबाद और आसनसोल सहित कई स्थानों पर मंदिर पुनः खोले गए; धार्मिक पाबंदियों पर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर भट्टाचार्य ने कहा — सभी निर्णय संविधान के दायरे में होने चाहिए।
राज्य की डेमोग्राफी में बड़े बदलाव को सुरक्षा चुनौतियों से जोड़ते हुए भाजपा की जीत को महत्वपूर्ण बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने 6 मई 2026 को कोलकाता में स्पष्ट किया कि चुनाव के बाद हो रही हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं के पीछे तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अपने ही लोग हैं, न कि भाजपा। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के उस दावे को सिरे से खारिज किया जिसमें चुनाव बाद हिंसा का ठीकरा भाजपा पर फोड़ा गया था।

टीएमसी का आंतरिक संघर्ष

भट्टाचार्य ने ठोस उदाहरण देते हुए बताया कि बारासात के एक उम्मीदवार ने उनसे खुद संपर्क किया और अपने ऊपर हो रहे हमले की जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व सांसद दिलीप घोष को तृणमूल कांग्रेस के एक उम्मीदवार ने फोन कर बताया कि उसके कार्यालय पर हमला हो रहा है — और हमलावर भी टीएमसी से ही जुड़ा है। भट्टाचार्य के अनुसार, यह स्थिति साफ तौर पर तृणमूल कांग्रेस के भीतर आपसी सत्ता-संघर्ष को दर्शाती है।

धार्मिक स्वतंत्रता पर भाजपा का रुख

राज्य में हिंदू समुदाय के बीच बढ़ते उत्साह और मंदिरों के पुनः खुलने के मुद्दे पर भट्टाचार्य ने कहा कि मुर्शिदाबाद और आसनसोल सहित कई स्थानों पर मंदिर फिर से खोले गए हैं, जिससे लोगों में खुशी का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ऐसी स्थिति बनाई गई थी जिसमें दीया जलाने की अनुमति तो थी, लेकिन शंख बजाने पर रोक थी और अंतिम संस्कार के दौरान धार्मिक नारों पर प्रतिबंध था। उन्होंने सवाल उठाया कि एक स्वतंत्र देश के किसी राज्य में इस प्रकार की पाबंदियाँ कहाँ तक उचित हैं।

ममता बनर्जी के बयान पर प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखने और मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की बात कही थी — भट्टाचार्य ने संयमित लेकिन स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए देश का संविधान है और सभी निर्णय उसी के दायरे में होने चाहिए।

ट्रंप की बधाई और जनादेश का महत्व

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा की निर्णायक चुनावी जीत पर बधाई देने के सवाल पर भट्टाचार्य ने कहा कि इससे राज्य की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कैलिफोर्निया, लॉस एंजिल्स, सिलिकॉन वैली और डलास से बड़ी संख्या में लोग मतदान के लिए बंगाल आए, जो यह दर्शाता है कि पूरे देश और दुनिया की नज़र इस चुनाव पर थी।

डेमोग्राफी और सुरक्षा का सवाल

भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि राज्य की जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) में बड़ा बदलाव हुआ है, जिसके चलते सुरक्षा से समझौता होता रहा है। उनके अनुसार भाजपा की जीत को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा की राजनीति विभाजनकारी नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार दिलाने की पक्षधर है — और पार्टी किसी भी स्थिति में हिंसा को बर्दाश्त नहीं करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इन्हें सत्यापित साक्ष्यों के साथ पेश करना ज़रूरी है। डेमोग्राफी का मुद्दा उठाना राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और इसे बिना तथ्यात्मक आधार के ध्रुवीकरण का औज़ार नहीं बनना चाहिए।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समिक भट्टाचार्य ने टीएमसी पर क्या आरोप लगाए?
भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव के बाद हो रही हिंसा में टीएमसी के लोग ही एक-दूसरे पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने बारासात के एक उम्मीदवार और पूर्व सांसद दिलीप घोष को फोन करने वाले टीएमसी उम्मीदवार के उदाहरण दिए।
पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा की स्थिति क्या है?
भाजपा के अनुसार कई स्थानों पर तोड़फोड़ और हमले हो रहे हैं, जिनमें कथित तौर पर टीएमसी के गुट आपस में भिड़ रहे हैं। हालाँकि तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया है।
ममता बनर्जी के बयान पर भाजपा की क्या प्रतिक्रिया है?
भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री पद पर बने रहने या राजनीतिक लड़ाई जारी रखने के सभी निर्णय देश के संविधान के दायरे में होने चाहिए। उन्होंने इस पर विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया।
मुर्शिदाबाद और आसनसोल में मंदिर खुलने का क्या मतलब है?
भट्टाचार्य के अनुसार इन क्षेत्रों में मंदिर पुनः खोले गए हैं, जो पहले अप्रत्यक्ष पाबंदियों के कारण बंद थे। उन्होंने इसे भाजपा की जीत के बाद धार्मिक स्वतंत्रता की बहाली बताया।
डोनाल्ड ट्रंप की बधाई का पश्चिम बंगाल चुनाव से क्या संबंध है?
भट्टाचार्य ने कहा कि ट्रंप की बधाई से राज्य की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन यह इस बात का संकेत है कि दुनिया की नज़र इस चुनाव पर थी।
राष्ट्र प्रेस
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