4 मई को पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने का विश्वास: समिक भट्टाचार्य
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे।
- समिक भट्टाचार्य ने 4 मई को भाजपा की जीत की उम्मीद जताई।
- सीपीआई (एम) ने मतदाता सूची की मांग की।
- तृणमूल कांग्रेस पर हिंसा और विभाजनकारी राजनीति के आरोप।
- लोगों में सरकार परिवर्तन की इच्छा।
कोलकाता, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में विपक्षी दलों ने रविवार को राज्य में सरकार परिवर्तन की मांग की है और कहा है कि विधानसभा चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से होने चाहिए।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को दो चरणों में कराने के चुनाव आयोग के निर्णय का स्वागत किया है।
भट्टाचार्य ने मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए कहा, "हम पश्चिम बंगाल में दो चरणों में होने वाले चुनावों का स्वागत करते हैं। अन्य राज्यों में चुनाव होते हैं, लेकिन वहां से किसी की मौत या हिंसा की कोई खबर नहीं आती। केवल पश्चिम बंगाल में ही तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता विपक्ष को वोट देने वाले लोगों को निशाना बना रहे हैं। यहां हिंसा भड़क रही है और लोकतंत्र कुचला जा रहा है। हम चाहते हैं कि बंगाल की जनता इस स्थिति को बदले। सरकार का परिवर्तन समय की मांग है।"
उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि 4 मई को मतगणना के दिन पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनाएगी।
भट्टाचार्य ने कहा कि सत्ताधारी दल के बयानों पर ध्यान देने की कोई आवश्यकता नहीं है। लोग टीएमसी की विभाजनकारी और नफरत भरी राजनीति से तंग आ चुके हैं। हम इसका अंत करेंगे। तृणमूल कांग्रेस को इन विधानसभा चुनावों में अपने कुकर्मों का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
उधर, सीपीआई (एम) ने कहा कि चुनाव अधिसूचना जारी होने से पहले पूरी मतदाता सूची प्रकाशित की जानी चाहिए थी।
सीपीआई(एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा, "इतनी बड़ी संख्या में लोगों को 'डी-वोटर' घोषित करना कानूनी रूप से मान्य नहीं है। कोई व्यक्ति या तो मतदाता होता है या नहीं। शुरुआत में, एक मानचित्रण प्रक्रिया चलाई गई। बाद में, जिन लोगों ने उस मानचित्रण के दौरान अपनी पहचान सफलतापूर्वक स्थापित की, उनके नाम भी विभिन्न बहाने बनाकर हटा दिए गए या उन्हें अधर में लटकाए रखने की कोशिश की गई। इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारें दोनों ही विफल रही हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि बीडीओ, एसडीओ और डीएम के कार्यालय मात्र राजनीतिक चमचों में तब्दील हो गए हैं। बीएलओ और सीओ भी अनिर्णय की स्थिति से जूझ रहे हैं।