पश्चिम बंगाल में निवेश का संकट: समिक भट्टाचार्य का टीएमसी पर गंभीर आरोप
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल में निवेश की कमी
- कई कंपनियों का पलायन
- टीएमसी पर भ्रष्टाचार के आरोप
- न्याय व्यवस्था में गिरावट
- 2026 विधानसभा चुनाव की तैयारी
कोलकाता, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य समिक भट्टाचार्य ने कोलकाता में पश्चिम बंगाल की आर्थिक स्थिति और निवेश माहौल पर गंभीर चिंताएँ व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल अब निवेश के लिए अनुकूल राज्य नहीं रह गया है, जिससे अनेक कंपनियाँ यहाँ से निकल रही हैं।
भट्टाचार्य ने कहा, "पिछले 15 वर्षों में कई कंपनियाँ बंद हो गई हैं और हजारों कंपनियाँ लिक्विडेशन की प्रक्रिया में हैं। 6,300 से अधिक कंपनियाँ अपना मुख्यालय कोलकाता से अन्य राज्यों में स्थानांतरित कर चुकी हैं। राज्य में पूंजी, निवेश, छात्रों और श्रमिकों का लगातार पलायन हो रहा है, जो एक चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है।"
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर हो रही है और न्याय व्यवस्था पर भरोसा कम हो रहा है, जिससे निवेशक यहाँ आने में संकोच कर रहे हैं। किसी भी निवेशक के लिए एक स्थिर और सुरक्षित वातावरण आवश्यक होता है, जो वर्तमान में राज्य में दिखाई नहीं देता।
भट्टाचार्य ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराष्ट्र जैसे राज्यों में विदेशी निवेश का स्तर लगभग 31.6 प्रतिशत है, जबकि पश्चिम बंगाल में यह केवल 0.6 प्रतिशत के आसपास है। राज्य में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों, बंदरगाहों और योग्य मानव संसाधनों के बावजूद निवेश नहीं आना सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है।
उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर भी कड़ा हमला किया। भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि टीएमसी और भ्रष्टाचार एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं और राज्य में संविधान के नियमों का पालन सही तरीके से नहीं हो रहा है। केंद्रीय एजेंसियों पर लग रहे आरोप निराधार हैं और जनता अब सत्य को समझ चुकी है।
भट्टाचार्य ने 2026 के विधानसभा चुनाव को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह कोई सामान्य चुनाव नहीं होगा। देश और विदेश में बसे बंगाली समुदाय और राज्य के नागरिक अब विकास, उद्योग और रोजगार की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बार जनता बदलाव के लिए मतदान करेगी।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की वर्तमान सरकार में आर्थिक संकट, निवेश की कमी और प्रशासनिक विफलताएँ स्पष्ट हैं, जिससे जनता को नुकसान उठाना पड़ रहा है। जनता की समस्याएँ सुनने वाला कोई नहीं है, इसलिए उन्होंने भाजपा को सत्ता में लाने का निश्चय किया है। 4 मई को टीएमसी के लोग सत्ता से बाहर हो जाएंगे।