30 जुलाई 2026
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हॉकी जर्सी का नीला रंग खेल विरासत की भावना है, केसरिया बदलाव पर नवीन पटनायक ने जताया कड़ा विरोध

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हॉकी जर्सी का नीला रंग खेल विरासत की भावना है, केसरिया बदलाव पर नवीन पटनायक ने जताया कड़ा विरोध

सारांश

वर्ल्ड कप से पहले भारतीय हॉकी जर्सी का रंग नीले से केसरिया बदलने पर नवीन पटनायक का तीखा विरोध — उन्होंने इसे ओछी राजनीति करार दिया। ओडिशा ने 2018 से 2036 तक हॉकी को प्रायोजित किया और 41 साल बाद ओलंपिक मेडल दिलाया। अब रंग बदलाव ने राष्ट्रीय खेल विरासत पर राजनीति का सवाल खड़ा कर दिया है।

मुख्य बातें

नवीन पटनायक ने 30 जुलाई 2026 को भारतीय हॉकी जर्सी का रंग नीले से केसरिया किए जाने पर कड़ा विरोध जताया।
पटनायक ने एक्स पर लिखा कि नीला रंग राष्ट्रीय ध्वज के नीले चक्र से आया है और खेल विरासत की भावना है।
ओडिशा सरकार ने 2018 से भारतीय हॉकी टीमों को प्रायोजित किया है, जिसे 2036 तक बढ़ाया गया है।
41 वर्षों के बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने ओडिशा के समर्थन के दौर में ओलंपिक मेडल जीता।
पटनायक ने ओडिशा भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि यह बदलाव उसी के दबाव में हुआ; इसे 'ओछी राजनीति' कहा।
भारतीय हॉकी महासंघ और केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 30 जुलाई 2026 को भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से केसरिया किए जाने पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि यह नीला रंग महज एक रंग नहीं, बल्कि देश की खेल विरासत से जुड़ी एक गहरी भावना है। वर्ल्ड कप से ठीक पहले लिया गया यह निर्णय देशभर के हॉकी प्रेमियों में असंतोष का कारण बना है।

नवीन पटनायक का एक्स पर बयान

बीजू जनता दल (बीजेडी) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'मुझे यह जानकर बहुत दुख हुआ कि भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का मशहूर रंग बदलकर केसरिया कर दिया गया है।' उन्होंने कहा कि दशकों से इस नीले रंग ने पूरे देश को उम्मीद, जीत, हार और बेहतरीन प्रदर्शन की कोशिश में एक साथ जोड़े रखा है।

पटनायक ने आगे लिखा, 'ब्लू जर्सी पहनकर हमारी टीमों ने ओलंपिक मेडल जीते हैं और दुनिया के मंच पर राष्ट्रगान बजा है। नीला रंग हमारे राष्ट्रीय ध्वज के नीले चक्र से आया है — यह हमारे राष्ट्रीय गौरव और पहचान का प्रतीक है।'

ओडिशा का हॉकी से ऐतिहासिक जुड़ाव

गौरतलब है कि ओडिशा सरकार ने 2018 से भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों — सीनियर और जूनियर दोनों — को प्रायोजित किया है, और यह प्रायोजन 2036 तक बढ़ाया जा चुका है। पटनायक ने याद दिलाया कि जब राष्ट्रीय हॉकी टीमें प्रायोजकों के लिए संघर्ष कर रही थीं, तब ओडिशा ने पहला और एकमात्र राज्य बनकर इतिहास रचा था। उन्होंने कहा, '41 वर्षों के बाद हमारी पुरुष टीम ने ओलंपिक मेडल जीता।'

राजनीतिक आरोप और भाजपा पर निशाना

पटनायक ने सीधे तौर पर ओडिशा में भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि यह कदम उसी के दबाव में उठाया गया। उन्होंने कहा, 'पिछले दो वर्षों से ओडिशा में इमारतों, बसों और यहाँ तक कि पुलों के रंग बदलने के प्रति इस सरकार का जुनून देखा जा रहा है। सिर्फ इसलिए कि ओडिशा में सरकार बदल गई, हमारी राष्ट्रीय टीम के रंग नहीं बदले जाने चाहिए। यह सबसे घटिया तरह की ओछी राजनीति है।'

उन्होंने हॉकी जर्सी की तुलना वैश्विक प्रतीकों से करते हुए कहा, 'हमारी ब्लू जर्सी हमारे लिए वैसी ही है जैसी अर्जेंटीना के लिए मशहूर धारियाँ और ब्राजील के लिए पीली जर्सी। यह हमारी सामूहिक यादों में बसी हुई है।'

विशेषज्ञ और खेल प्रेमियों की प्रतिक्रिया

पटनायक के बयान के बाद खेल जगत और सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली। आलोचकों का कहना है कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजन से पहले जर्सी का रंग बदलना खिलाड़ियों की एकाग्रता और टीम की सामूहिक पहचान पर असर डाल सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय हॉकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पुनर्वापसी को मज़बूत कर रही है।

आगे क्या

भारतीय हॉकी महासंघ और केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पटनायक ने माँग की है कि राष्ट्रीय हॉकी टीम की जर्सी का पारंपरिक नीला रंग बहाल किया जाए, क्योंकि 'राष्ट्रीय प्रतीक हमें जोड़ने के लिए होते हैं, न कि बाँटने के लिए।'

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जहाँ राज्य सत्ता-परिवर्तन के बाद प्रतीकों की पुनर्व्याख्या होती है। ओडिशा ने जब हॉकी को प्रायोजित किया था, तब टीम की पहचान नीली जर्सी से बनी — अब उसी जर्सी को बदलना पटनायक की राजनीतिक विरासत को भी धुँधला करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को नज़रअंदाज़ कर रही है कि हॉकी इंडिया और केंद्र सरकार की चुप्पी खुद एक बयान है। असली सवाल यह है कि क्या राष्ट्रीय खेल टीमों की पहचान राज्य-स्तरीय राजनीतिक समीकरणों के अधीन होनी चाहिए।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय हॉकी जर्सी का रंग क्यों बदला गया?
वर्ल्ड कप से पहले भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से केसरिया किया गया है। नवीन पटनायक ने आरोप लगाया है कि यह बदलाव ओडिशा में भाजपा सरकार के दबाव में हुआ, हालाँकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है।
नवीन पटनायक ने जर्सी बदलाव पर क्या कहा?
पटनायक ने एक्स पर लिखा कि नीला रंग देश की खेल विरासत से जुड़ी भावना है और राष्ट्रीय ध्वज के नीले चक्र का प्रतीक है। उन्होंने इसे 'सबसे घटिया तरह की ओछी राजनीति' करार दिया और जर्सी का पारंपरिक रंग बहाल करने की माँग की।
ओडिशा ने भारतीय हॉकी को कब से प्रायोजित किया है?
ओडिशा सरकार ने 2018 से भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों — सीनियर और जूनियर दोनों — को प्रायोजित किया है। यह प्रायोजन 2036 तक बढ़ाया जा चुका है।
इस विवाद का भारतीय हॉकी पर क्या असर पड़ सकता है?
आलोचकों का कहना है कि वर्ल्ड कप से पहले जर्सी बदलना टीम की सामूहिक पहचान और खिलाड़ियों की एकाग्रता पर असर डाल सकता है। साथ ही, यह विवाद हॉकी के राजनीतिकरण की बहस को भी हवा दे रहा है।
क्या हॉकी इंडिया या केंद्र सरकार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक भारतीय हॉकी महासंघ और केंद्र सरकार की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पटनायक की माँग पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया लंबित है।
राष्ट्र प्रेस
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