प्रियंका गांधी का हॉकी जर्सी विवाद पर पलटवार: 'जर्सी का रंग बदलने से देश की आत्मा नहीं बदलती'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने 30 जुलाई को नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए भारतीय हॉकी टीम की जर्सी के रंग में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि न तो यूनिफॉर्म का रंग बदलकर और न ही पाठ्यक्रम में फेरबदल कर इतिहास को नए सिरे से लिखा जा सकता है।
मुख्य घटनाक्रम
हॉकी इंडिया ने हाल ही में भारतीय हॉकी टीम की मुख्य जर्सी का पारंपरिक नीला रंग बदलकर केसरिया कर दिया है। महासंघ ने इस कदम को तिरंगे के प्रति सम्मान और मैदान पर बेहतर दृश्यता की आवश्यकता बताया है। हालाँकि, भारत के पूर्व हॉकी कप्तान वीरेन रासकिंहा सहित कई पूर्व खिलाड़ियों और प्रशंसकों ने इस बदलाव पर सवाल उठाए हैं।
यह विवाद मानसून सत्र के बीच राजनीतिक रंग ले चुका है, और विपक्षी दलों ने इसे सांस्कृतिक प्रतीकों पर कब्जे की कोशिश के रूप में देखा है।
प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया
प्रियंका गांधी ने कहा, 'सरकार चाहे हॉकी टीम की जर्सी बदल दे या पाठ्यक्रम के ज़रिए इतिहास को नए सिरे से लिखने का प्रयास करे, देश के युवा सब देख रहे हैं।' उन्होंने जंतर-मंतर पर एकत्र युवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ उठी आवाज़ें देश की असली भावना को दर्शाती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की स्वतंत्रता संग्राम सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर लड़ी गई थी और उसमें RSS की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि यह तथ्य पूरा देश जानता है और जो पहले नहीं जानते थे, वे भी अब इसे समझ रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया था और देश की आत्मा अहिंसा, सत्य, भाईचारे और एकता में बसती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे कितनी भी नफरत फैलाने या समाज को बाँटने की कोशिश हो, देश की मूल भावना को कोई नहीं बदल सकता।
पेलेट्स विवाद पर सरकार से जवाब की माँग
प्रियंका गांधी ने इस अवसर पर एक अन्य मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जिस युवक को मीडिया के सामने लाए थे, उसके शरीर पर मिले पेलेट्स के बारे में सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि वे पेलेट्स आखिर कहाँ से आए।
विपक्ष की व्यापक प्रतिक्रिया
जर्सी बदलाव पर विपक्ष में एकजुट आवाज़ें उठ रही हैं। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के लोग 'दिमागी तौर पर दिवालिया' हो चुके हैं। व्यंग्यात्मक लहजे में उन्होंने कहा कि यदि यही सोच जारी रही तो भविष्य में हरे रंग के पेड़ों को भी केसरिया रंग से रंगने की कोशिश की जाएगी।
गौरतलब है कि पूर्व कप्तान वीरेन रासकिंहा ने इस बदलाव पर चिंता जताते हुए नीले रंग की परंपरा को बनाए रखने की वकालत की थी, जिसके बाद यह विवाद और तेज़ हो गया।
आगे क्या
हॉकी इंडिया ने अभी तक जर्सी बदलाव के फैसले को वापस लेने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। राजनीतिक बहस मानसून सत्र में जारी रहने की संभावना है। यह देखना होगा कि क्या सरकार पूर्व खिलाड़ियों और विपक्ष की माँगों पर कोई स्पष्टीकरण देती है।