वीरेन रस्किन्हा का हॉकी इंडिया पर निशाना: 'नीली जर्सी बदलकर ऑरेंज करना शर्मनाक'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा ने हॉकी इंडिया के उस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 के लिए टीम की जर्सी का रंग पारंपरिक नीले से बदलकर ऑरेंज कर दिया गया है। उन्होंने इस कदम को भारतीय हॉकी की विरासत के साथ विश्वासघात बताते हुए इसे 'शर्मनाक' करार दिया। 30 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए रस्किन्हा ने यह सवाल भी उठाया कि ऑरेंज रंग चुनने के पीछे क्या तर्क है।
क्या है पूरा विवाद
हॉकी इंडिया ने सोमवार को बेल्जियम और नीदरलैंड्स की संयुक्त मेजबानी में आयोजित होने वाले एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 के लिए भारतीय टीम की नई जर्सी लॉन्च की। नई जर्सी में न केवल रंग बल्कि डिज़ाइन में भी व्यापक बदलाव किए गए हैं — नीले की जगह ऑरेंज रंग को अपनाया गया है, जो दशकों पुरानी परंपरा से पूरी तरह अलग है।
यह विश्व कप 15 अगस्त से शुरू होगा और 30 अगस्त को फाइनल के साथ समाप्त होगा। गौरतलब है कि भारत का पहला मैच 15 अगस्त को ही स्वतंत्रता दिवस के दिन वेल्स के खिलाफ होगा — एक ऐसा संयोग जो जर्सी विवाद को और भावनात्मक बना देता है।
रस्किन्हा का एक्स पर आक्रोश
रस्किन्हा ने एक्स पर लिखा, 'मुझे कहना होगा कि हॉकी इंडिया ने भारतीय हॉकी के लिए बहुत अच्छे काम किए हैं, लेकिन यह शर्मनाक है। भारतीय टीम की विरासत और पहचान हमेशा से ब्लू (नीला) रही है। मैंने कई वर्षों तक शान से ब्लू जर्सी पहनी है। फैंस हमारी इंडियन टीम को ब्लू रंग में देखना चाहते हैं। ऑरेंज रंग का क्या लॉजिक है?' यह टिप्पणी उन पूर्व खिलाड़ियों की भावनाओं की प्रतिनिधि मानी जा रही है जिन्होंने नीली जर्सी में देश का प्रतिनिधित्व किया।
भारत का विश्व कप अभियान
भारतीय टीम को ग्रुप डी में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स के साथ रखा गया है। 15 अगस्त को वेल्स से शुरुआत के बाद टीम 17 अगस्त को इंग्लैंड और 19 अगस्त को पाकिस्तान से भिड़ेगी। भारत-पाकिस्तान मुकाबला हमेशा से दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है, और हाल के वर्षों में भारत का पाकिस्तान पर पूर्ण दबदबा देखा गया है।
टूर्नामेंट में कुल 16 टीमें चार-चार के पूल में विभाजित हैं। प्रत्येक पूल से शीर्ष दो टीमें अगले चरण में प्रवेश करेंगी। इसके बाद 8 टीमों को दो ग्रुप में पुनर्विभाजित किया जाएगा, और दोनों ग्रुप के शीर्ष दो दल सेमीफाइनल में जगह बनाएंगे।
विशेषज्ञ और प्रशंसकों की प्रतिक्रिया
रस्किन्हा की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर हॉकी प्रेमियों ने बड़े पैमाने पर इस बदलाव का विरोध किया। 'इंडियन हॉकी ब्लू' की पहचान दशकों से भारतीय हॉकी के स्वर्णिम युग से जुड़ी रही है — वह दौर जब भारत ने ओलिंपिक में एकछत्र राज किया था। आलोचकों का कहना है कि जर्सी बदलना महज एक सौंदर्यगत निर्णय नहीं, बल्कि उस भावनात्मक धरोहर को कमज़ोर करना है जो खिलाड़ियों और प्रशंसकों को एकसूत्र में बाँधती है। हॉकी इंडिया की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।