हरतालिका तीज 2026: प्रयागराज-वाराणसी में उमड़ा उत्साह, गणेश चतुर्थी के संयोग से दोगुना उल्लास
सारांश
मुख्य बातें
हरतालिका तीज 2026 के पावन अवसर पर प्रयागराज और वाराणसी में 13 सितंबर को व्रतधारी महिलाओं का उत्साह चरम पर रहा। इस वर्ष हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का शुभ संयोग एक साथ पड़ने से त्योहार की रौनक असाधारण रूप से बढ़ गई है — मंदिरों में पूजा-अर्चना से लेकर बाज़ारों में खरीदारी तक, उत्सव का माहौल हर ओर छाया रहा।
व्रत का धार्मिक महत्व
मान्यता के अनुसार हरतालिका तीज का यह निर्जला व्रत माता पार्वती और भगवान शंकर के दिव्य प्रेम का प्रतीक है। महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ पूरे 24 घंटे बिना जल ग्रहण किए यह व्रत करती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए स्वयं मिट्टी से उनकी मूर्ति बनाकर पूरे दिन निर्जला उपवास किया था — तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
वाराणसी की स्थानीय महिला ने बताया, 'पार्वती जी सुबह से मिट्टी लाकर शंकरजी की मूर्ति बनाती हैं। इसे बनाने में उन्हें पूरा दिन लग गया था और बिना कुछ खाए-पीए यह व्रत उन्होंने रखा था। तब से ही औरतें निर्जला तीज का व्रत करती हैं। इसमें वो सोलह श्रृंगार करती हैं।'
गणेश चतुर्थी का शुभ संयोग
इस वर्ष हरतालिका तीज के साथ गणेश चतुर्थी का एक साथ आना विशेष महत्व रखता है। सशी सिंह ने कहा, 'बप्पा भी विराजमान हो रहे हैं। यह बहुत ही शुभ दिन है। महादेव अपने पूरे परिवार के साथ धरती पर आ रहे हैं।' एक स्थानीय महिला ने स्पष्ट किया कि यह संयोग हर साल नहीं होता — कभी केवल तीज पड़ती है, तो कभी-कभी तीज के साथ चतुर्थी भी जुड़ जाती है, जिससे उत्सव और पवित्र हो जाता है।
बाज़ारों में रौनक, खरीदारी की धूम
त्योहार के मद्देनज़र प्रयागराज और वाराणसी के बाज़ारों में भारी भीड़ देखी गई। महिलाएँ सोलह श्रृंगार, साड़ियाँ, चूड़ियाँ, पायल, बिछिया और मेहंदी की खरीदारी में जुटी रहीं। दुकानदार आशीष कुमार गर्ग ने बताया कि इस वर्ष व्यापार बेहद अच्छा रहा। उन्होंने कहा, 'मार्केटिंग बहुत अच्छी चल रही है। महिलाएं खूब खरीदारी कर रही हैं। हमारे यहां 18 साल से मेहंदी लगाई जाती रही है और उसी प्रकार से इस साल भी आगे बढ़ाया जा रहा है।'
महिलाओं की आवाज़ें
प्रयागराज की शालिनी राठौड़ ने बताया कि यह व्रत साल में एक बार पति की दीर्घायु के लिए किया जाता है और इसे लेकर सभी गृहिणियों में भारी उत्साह रहता है। उन्होंने कहा, 'इसमें नए कपड़े, पायल, बिछियाँ, सुहाग का सामान — सब कुछ लिया जाता है। यह निर्जला व्रत होता है। 24 घंटे तक व्रत रहना पड़ता है, सभी स्त्रियों के लिए यह बहुत कठिन व्रत है।' राठौड़ ने जोड़ा, 'पहली बार यह व्रत शिव जी के लिए माता पार्वती ने किया था। उन्हीं से प्रेरित होकर हम सब भी व्रत करते हैं।'
आगे भी जारी रहेगा उत्सव
गणेश चतुर्थी के साथ इस वर्ष का यह दुर्लभ संयोग आने वाले दिनों तक उत्सव की लय को बनाए रखेगा, क्योंकि गणपति विसर्जन तक पूजा-पाठ और सामूहिक समारोह जारी रहेंगे। सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से यह दिन उत्तर भारत के हिंदू परिवारों के लिए वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में से एक बन गया है।