क्या हरतालिका तीज पर पूजा का सही समय जानना महत्वपूर्ण है?

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क्या हरतालिका तीज पर पूजा का सही समय जानना महत्वपूर्ण है?

सारांश

हरतालिका तीज का त्योहार भारतीय परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो न केवल पूजा के लिए है बल्कि रिश्तों और भावनाओं को भी जोड़ता है। जानें इस व्रत का महत्व, पूजा का सही समय और इसके पीछे की कथा।

मुख्य बातें

हरतालिका तीज का व्रत महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
यह पूजा भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए होती है।
अविवाहित लड़कियों के लिए यह एक शुभ अवसर है।
पूजा का शुभ समय सुबह 5:56 से 8:31 तक है।

नई दिल्ली, 24 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भारत एक ऐसा देश है जहाँ हर त्योहार केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें हमारी भावनाएं, रिश्ते, परंपराएं और कहानियां भी समाहित होती हैं। इन त्योहारों में से एक प्रमुख त्योहार है हरतालिका तीज। इसे सामान्यतः सुहागिन महिलाओं का व्रत माना जाता है, जिसमें वे निर्जला रहकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। इसके साथ ही, अविवाहित लड़कियां भी यह व्रत करती हैं ताकि उन्हें एक अच्छा और मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त हो।

इस वर्ष हरतालिका तीज का व्रत 26 अगस्त को होगा।

पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि 25 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी और 26 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार, उदया तिथि यानी सूर्योदय के अनुसार, व्रत 26 तारीख को रखा जाएगा। पूजा का शुभ समय सुबह 5 बजकर 56 मिनट से 8 बजकर 31 मिनट तक है।

महिलाएं इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं, साफ कपड़े पहनती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं। मिट्टी या रेत से भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियां बनाई जाती हैं और उन्हें लकड़ी की चौकी पर सजाकर स्थापित किया जाता है। फिर देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। फूल, बेलपत्र, चंदन, धूप-दीप, मिठाई, फल और सोलह श्रृंगार की चीजों से भगवान को भोग लगाया जाता है। महिलाएं पारंपरिक मंत्रों का जाप करती हैं, हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनती हैं और आरती करती हैं।

यह पूजा अक्सर प्रदोष काल में यानी शाम के समय की जाती है। कई स्थानों पर महिलाएं रातभर जागकर भजन-कीर्तन भी करती हैं।

हरतालिका तीज की कथा के अनुसार, जब माता पार्वती विवाह योग्य हुईं, तो उनके पिता हिमालय ने उनका विवाह भगवान विष्णु से तय कर दिया। लेकिन माता पार्वती का मन भगवान शिव में था। उन्होंने अपनी सखियों के साथ वन में जाकर तपस्या की और रेत से शिवलिंग बनाकर शिवजी की आराधना की। इस कठिन तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। यही वह दिन था, जिसे हर साल तीज के रूप में मनाया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि रिश्तों की गहराई और परिवार के साथ जुड़ाव को भी प्रदर्शित करता है। यह त्योहार हमारे समाज में महिलाओं के स्थान और उनकी श्रद्धा को भी उजागर करता है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरतालिका तीज का व्रत कब रखा जाता है?
हरतालिका तीज का व्रत इस वर्ष 26 अगस्त को रखा जाएगा।
हरतालिका तीज पर पूजा का शुभ समय क्या है?
पूजा का शुभ समय सुबह 5 बजकर 56 मिनट से 8 बजकर 31 मिनट तक है।
क्या अविवाहित लड़कियां भी हरतालिका तीज का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, अविवाहित लड़कियां भी इस व्रत को अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए करती हैं।
हरतालिका तीज की पूजा किस प्रकार की जाती है?
इस दिन महिलाएं व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।
हरतालिका तीज की कथा क्या है?
इस त्योहार की कथा माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी हुई है, जिसमें उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया।
राष्ट्र प्रेस
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