बाबा महाकाल का दिव्य स्नान और भस्म आरती: भक्तों को मिला आशीर्वाद
सारांश
Key Takeaways
- बाबा महाकाल का दिव्य स्नान
- भस्म आरती का आयोजन
- भक्तों की श्रद्धा और आस्था
- महाकालेश्वर मंदिर के नियम
- भारतीय संस्कृति में धार्मिक महत्व
उज्जैन, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उज्जैन के प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि (बुधवार) को सुबह बाबा का दिव्य शृंगार देखने का अवसर मिला। इस अद्भुत रूप को देखने के लिए भक्तगण रात से ही कतार में खड़े थे।
सुबह तड़के 4 बजे आयोजित भस्म आरती के दौरान मंदिर का प्रांगण श्रद्धालुओं से भरा हुआ था। इस मौके पर पूरा वातावरण 'जय महाकाल' के नारों से गूंज उठा और भक्तों के चेहरों पर बाबा के दर्शन की अद्वितीय खुशी स्पष्ट दिखाई दे रही थी।
सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में बाबा का जल से स्नान किया गया। इसके बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म अर्पित की गई और आरती उतारी गई। यह आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा की जाती है, जहाँ वे मंत्रोच्चारण के साथ बाबा महाकाल को भस्म अर्पित करते हैं। इस दौरान शिवलिंग पर भस्म बिखेरना निराकार रूप का प्रतीक है।
आरती के समय बाबा अपने भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। भस्म आरती के बाद, बाबा का जलाभिषेक किया गया, पंचामृत से पूजा हुई, और पवित्र भस्म से उनका विशेष स्नान भी कराया गया।
इसके पश्चात बाबा का विशेष शृंगार किया गया, जिसमें महाकाल को बहुत सुंदरता से सजाया गया। बाबा के माथे पर त्रिपुंड और चंद्रमा की सजावट की गई, और उन्हें नवीन मुकुट पहनाया गया। साथ ही, उन्हें फूलों की माला पहनाई गई और ताजा बिल्वपत्र (बेलपत्र) चढ़ाए गए, जिससे उनका शृंगार और भी आकर्षक बना।
श्रृंगार के बाद, कपूर से महा-आरती की जाती है, जिसे अनुभव करना अत्यंत अलौकिक होता है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे विशेष महत्व दिया जाता है। यह विश्व का एकमात्र दक्षिणमुखी स्वयंभू शिवलिंग है। मंदिर में प्रवेश के लिए कुछ सख्त नियम हैं; पुरुषों के लिए धोती और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। आरती के दौरान कैमरा और मोबाइल ले जाना वर्जित है।