सेवानिवृत्त अधिकारी से 1.05 करोड़ की ठगी: 10 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया
सारांश
Key Takeaways
- डिजिटल अरेस्ट का खतरनाक तरीका
- सरकारी अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग
- साइबर ठगी के मामले में सतर्कता आवश्यक
- बैंक डिटेल साझा न करें
- साइबर हेल्पलाइन का उपयोग करें
मुंबई, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई के दादर क्षेत्र में एक वरिष्ठ नागरिक को 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट करके उनसे 1.05 करोड़ रुपए की ठगी का मामला प्रकाश में आया है। सेवानिवृत्त अधिकारी श्रेयष परलकर (71) से अपराधियों ने खुद को सरकारी संस्थाओं का अधिकारी बताकर सुनियोजित तरीके से मानसिक दबाव और भय का माहौल बनाकर यह ठगी की।
पीड़ित के अनुसार, 4 मार्च को उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई के दिल्ली मुख्यालय का अधिकारी बताया। उसने यह दावा किया कि पीड़ित के आधार कार्ड का उपयोग कर एक नया मोबाइल नंबर जारी किया गया है, जिसका इस्तेमाल अवैध संदेश और उत्पीड़न के लिए किया जा रहा है।
इसके बाद कॉल को फर्जी सीबीआई अधिकारियों के पास ट्रांसफर कर दिया गया। अलग-अलग लोगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। ठगों ने भरोसा जीतने के लिए फर्जी कोर्ट ऑर्डर, अरेस्ट वारंट और सरकारी लेटरहेड तक व्हाट्सऐप पर भेजे।
ठगों ने पीड़ित को यह कहकर डिजिटल अरेस्ट में रखा कि वह जांच के दायरे में हैं और बाहर संपर्क नहीं कर सकते। उन्हें एक मैसेजिंग ऐप डाउनलोड कराकर हर दो घंटे में 'मैं सुरक्षित हूं' जैसी रिपोर्ट भेजने के लिए कहा जाता था। इस दौरान उन्हें लगातार डराया गया और सहयोग न करने पर गिरफ्तारी की धमकी दी गई।
ठगों ने पीड़ित से उनकी बैंक डिटेल, निवेश और बचत की पूरी जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद फंड वेरिफिकेशन के नाम पर विभिन्न बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। 6 मार्च से 12 मार्च के बीच पीड़ित ने चार अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 1.05 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए। 15 मार्च को पीड़ित के बेटे ने उनका मोबाइल चेक किया, तब पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसके बाद तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई गई। फिलहाल पुलिस ने अज्ञात आरोपियों और संबंधित बैंक खाताधारकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।