मुंबई: 'डिजिटल अरेस्ट' में 54 दिन बंधक, रिटायर्ड बैंक मैनेजर से ₹40.90 लाख की साइबर ठगी

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मुंबई: 'डिजिटल अरेस्ट' में 54 दिन बंधक, रिटायर्ड बैंक मैनेजर से ₹40.90 लाख की साइबर ठगी

सारांश

मुंबई के भांडुप में एक सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर को 54 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर ₹40.90 लाख की ठगी की गई। ठगों ने दिल्ली बम धमाके और मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाया, पत्नी से लोन तक दिलवाया — और पैसे मिलते ही गायब हो गए।

मुख्य बातें

मुंबई के भांडुप में सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर राजेंद्र से साइबर ठगों ने ₹40.90 लाख की ठगी की।
ठगों ने सिग्नल ऐप पर दिल्ली एटीएस अधिकारी बनकर 10 मार्च से 54 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा।
पीड़ित के आधार से कर्नाटक में खुले खाते में ₹2.65 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का झूठा दावा किया गया।
'बेल सिक्योरिटी' के नाम पर ₹10 लाख अलग से वसूले गए, जो पीड़ित की पत्नी ने लोन लेकर दिए।
पीड़ित ने 3 मई को हेल्पलाइन 1930 और 4 मई को मुंबई साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई।
साइबर सेल संबंधित बैंक खातों की जाँच कर रही है; आरोपियों की पहचान जारी है।

मुंबई के भांडुप इलाके में साइबर अपराध का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने दिल्ली बम धमाके और मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर एक सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर को 54 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और उनसे ₹40.90 लाख की ठगी की। मुंबई साइबर सेल ने 4 मई 2025 को औपचारिक शिकायत मिलने के बाद जाँच शुरू कर दी है।

कैसे हुई ठगी की शुरुआत

पीड़ित राजेंद्र (नाम आंशिक), जो महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक में मैनेजर पद से सेवानिवृत्त हैं, को 10 मार्च को सिग्नल ऐप पर 'एटीएस डिपार्टमेंट' नामक अकाउंट से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली एटीएस का अधिकारी 'पीएसआई सिंह' बताया।

ठग ने दावा किया कि जनवरी में हुए दिल्ली बम धमाके और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पीड़ित का नाम सामने आया है। आरोपियों ने यह भी कहा कि पीड़ित के आधार और मोबाइल नंबर का उपयोग करके कर्नाटक में एक बैंक खाता खोला गया है, जिसमें ₹2.65 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के कथित आदेश का हवाला देते हुए गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती की धमकी भी दी गई।

54 दिनों का मानसिक दबाव

ठगों ने पीड़ित को घर के एक अलग कमरे में रहने, परिवार के किसी सदस्य से बात न करने और लगातार वीडियो कॉल पर बने रहने के लिए मजबूर किया। यह तथाकथित 'डिजिटल अरेस्ट' 54 दिनों तक जारी रही।

मानसिक दबाव में आकर पीड़ित ने पहले ₹2.90 लाख ट्रांसफर किए। इसके बाद ठगों ने उन्हें शेयर बाज़ार में लगे ₹29 लाख के निवेश को नकद करने के लिए मजबूर किया, जिसमें से ₹28 लाख अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए गए।

बेल सिक्योरिटी के नाम पर अतिरिक्त वसूली

ठगों ने 'बेल सिक्योरिटी' के नाम पर ₹10 लाख और वसूल लिए, जो पीड़ित की पत्नी ने लोन लेकर जुटाए। आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि पूरी रकम दो दिनों में वापस कर दी जाएगी और मामला समाप्त हो जाएगा — लेकिन पैसे मिलते ही उन्होंने संपर्क तोड़ लिया।

शिकायत और जाँच की स्थिति

कई दिनों तक प्रतीक्षा के बाद जब कोई जवाब नहीं मिला, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने 3 मई को साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और 4 मई को साइबर सेल में औपचारिक शिकायत दी।

मुंबई पुलिस के अनुसार, साइबर सेल संबंधित बैंक खातों की जाँच कर रही है और आरोपियों की पहचान करने के प्रयास जारी हैं। पुलिस ने बताया कि यह मामला 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे खतरनाक साइबर अपराध के बढ़ते चलन को दर्शाता है, जिसमें ठग सरकारी एजेंसियों का भय दिखाकर लोगों को मानसिक रूप से दबाव में डालते हैं।

आम नागरिकों पर असर और सावधानी

गौरतलब है कि 'डिजिटल अरेस्ट' की इस तरह की घटनाएँ देशभर में तेज़ी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी वैध सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करती और न ही ऑनलाइन 'जमानत राशि' माँगती है। नागरिकों को ऐसी किसी भी कॉल पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित मनोवैज्ञानिक हमला है — जो एक शिक्षित, अनुभवी व्यक्ति को 54 दिनों तक अपने ही घर में कैदी बना देता है। चिंताजनक यह है कि 'डिजिटल अरेस्ट' के ऐसे मामले पूरे देश में बढ़ रहे हैं, फिर भी जागरूकता अभियान उस गति से नहीं चल रहे जिस गति से ठग नए हथकंडे अपना रहे हैं। सरकारी एजेंसियों की नकल करने वाले इन गिरोहों की अंतर्राज्यीय और संभवतः अंतर्राष्ट्रीय जड़ें हैं, जिनकी जाँच के लिए राज्य साइबर सेल अकेले पर्याप्त नहीं हैं — केंद्रीय समन्वय की ज़रूरत है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'डिजिटल अरेस्ट' साइबर ठगी क्या होती है?
'डिजिटल अरेस्ट' एक साइबर अपराध का तरीका है जिसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या ATS जैसी सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर पीड़ित को डराते हैं और उन्हें घर में अलग-थलग रहकर लगातार कॉल पर बने रहने के लिए मजबूर करते हैं। इस दौरान मानसिक दबाव में पीड़ित बड़ी रकम ट्रांसफर कर देते हैं।
मुंबई भांडुप साइबर ठगी में कितनी रकम की ठगी हुई?
मुंबई के भांडुप निवासी सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर राजेंद्र से ठगों ने कुल ₹40.90 लाख की ठगी की। इसमें ₹2.90 लाख नकद, ₹28 लाख शेयर निवेश बेचकर और ₹10 लाख पत्नी द्वारा लोन लेकर शामिल हैं।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचने के लिए क्या करें?
किसी भी अनजान वीडियो कॉल पर सरकारी अधिकारी बनने वाले व्यक्ति पर भरोसा न करें, क्योंकि कोई भी वैध सरकारी एजेंसी ऑनलाइन जमानत राशि नहीं माँगती। ऐसी किसी भी कॉल की तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
मुंबई साइबर सेल इस मामले में क्या कर रही है?
मुंबई साइबर सेल 4 मई 2025 को दर्ज औपचारिक शिकायत के आधार पर संबंधित बैंक खातों की जाँच कर रही है और आरोपियों की पहचान के प्रयास जारी हैं। अभी तक किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है।
इस ठगी में सिग्नल ऐप का इस्तेमाल क्यों किया गया?
ठगों ने सिग्नल ऐप का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि यह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड है, जिससे उनकी पहचान और संचार को ट्रैक करना कठिन हो जाता है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, अपराधी अक्सर ऐसे प्लेटफॉर्म चुनते हैं जो जाँच एजेंसियों के लिए निगरानी करना मुश्किल बनाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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