26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मुंबई में रिटायर्ड कर्मचारी के साथ 42 दिन तक डिजिटल ठगी की गई, 39.60 लाख की चपत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मुंबई में रिटायर्ड कर्मचारी के साथ 42 दिन तक डिजिटल ठगी की गई, 39.60 लाख की चपत

सारांश

मुंबई के भांडुप में एक रिटायर्ड बुजुर्ग को 42 दिनों तक ठगों ने डिजिटल अरेस्ट में रखा और उनसे 39.60 लाख रुपए की ठगी की। ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के केस में फंसाने की धमकी दी। जानिए पूरी कहानी।

मुख्य बातें

साइबर ठगी डिजिटल अरेस्ट ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर बुजुर्ग को धोखा दिया।
शिकायत के बाद मुंबई साइबर सेल ने जांच शुरू कर दी है।
सतर्कता आवश्यक है, किसी भी अनजान कॉल पर ध्यान न दें।

मुंबई, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई के भांडुप क्षेत्र में साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड बुजुर्ग कर्मचारी को 42 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर उनसे 39.60 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी कर दी। ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी, जिससे पीड़ित लगातार उनके संपर्क में बने रहे और अलग-अलग बैंकों में पैसे ट्रांसफर करते रहे। इस मामले में बुजुर्ग की शिकायत पर मुंबई साइबर सेल ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, दीपक नारायण मॉडकर (65) भांडुप पश्चिम के उत्कर्षनगर स्थित गौरीशंकर चॉल में अपने परिवार के साथ रहते हैं और 2019 में बेस्ट से सेवानिवृत्त हुए थे। उनका परिवार पेंशन और बेटे की नौकरी की आय पर निर्भर है। 29 जनवरी को दोपहर करीब 3:30 बजे उनके मोबाइल पर एक अज्ञात महिला का फोन आया। उसने अपना नाम बिनी शर्मा बताया और कहा कि उनके नाम पर जारी एक सिम कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में किया गया है।

महिला ने उन्हें मामले के लिए कोलाबा पुलिस स्टेशन से संपर्क करने की बात कहकर कॉल एक अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर कर दिया। फिर एक व्यक्ति ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी मनोज शिंदे बताते हुए व्हाट्सऐप कॉल पर उनसे पूछताछ शुरू की।

आरोपी ने बुजुर्ग से उनके परिवार, बैंक खातों और घर में मौजूद गहनों तक की जानकारी ली और कहा कि उनके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज है। आरोपी ने यह भी धमकी दी कि उन्हें किसी भी समय गिरफ्तार किया जा सकता है और उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। आरोपियों ने पीड़ित को लगातार फोन और व्हाट्सऐप कॉल के जरिए संपर्क में रखा और उन्हें घर से बाहर न निकलने तथा किसी को भी इस बारे में जानकारी न देने के लिए कहा। बुजुर्ग को 42 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रखा गया। इस दौरान आरोपियों ने व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए उन्हें कथित तौर पर कोर्ट में पेश भी किया और कहा कि मामले की जांच रिजर्व बैंक कर रहा है। जांच प्रक्रिया का हवाला देते हुए उनसे कहा गया कि उनके बैंक खातों में मौजूद रकम जांच के लिए बताए गए खातों में ट्रांसफर करनी होगी जो बाद में वापस कर दी जाएगी।

डर के कारण पीड़ित ने 3 फरवरी और 18 फरवरी को अपने बैंक खाते से अलग-अलग खातों में 25 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद 9 फरवरी को एक अन्य व्यक्ति ने खुद को समाधान पवार बताते हुए फोन किया और कहा कि अधिकारी मनोज शिंदे छुट्टी पर हैं और अब वही केस देख रहा है। उसने भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी की धमकी देते हुए बुजुर्ग को घर के सोने के गहने गिरवी रखकर पैसे भेजने के लिए कहा। पीड़ित ने नजदीकी गोल्ड लोन कंपनी में गहने गिरवी रखकर मिले पैसे भी आरोपी के बताए बैंक खाते में 14.60 लाख रुपए जमा कर दिए।

इसके बाद जब पीड़ित ने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की तो उनके फोन बंद मिले, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने 13 मार्च को साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने मनोज शिंदे, समाधान पवार, बिनी शर्मा और संबंधित बैंक खाताधारकों के खिलाफ पुलिस अधिकारी बनकर साजिश रचने और ऑनलाइन ठगी करने की शिकायत की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अपने परिवार के लिए जिम्मेदार है, उसके साथ इस तरह की ठगी होना बहुत चिंताजनक है। समाज में इस तरह की घटनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस ठगी में कितने पैसे खोए गए?
बुजुर्ग कर्मचारी ने कुल मिलाकर 39.60 लाख रुपए की ठगी का शिकार हुआ।
ठगों ने किस तरह से बुजुर्ग को ठगा?
ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर बुजुर्ग को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी।
क्या पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई की है?
जी हां, बुजुर्ग की शिकायत पर मुंबई साइबर सेल ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।
इस तरह की ठगी से कैसे बचा जा सकता है?
किसी भी अनजान व्यक्ति से फोन पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और ठगी के मामलों में सतर्क रहें।
क्या ठगों का पता चल पाया है?
अभी तक पुलिस ठगों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले