13 सितंबर 2026
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पुतिन का 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ऐलान: एक-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था अब इतिहास

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पुतिन का 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ऐलान: एक-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था अब इतिहास

सारांश

पुतिन ने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से दुनिया को संदेश दिया — एक-ध्रुवीय व्यवस्था का युग खत्म हो रहा है। ग्लोबल साउथ के उभार, UNSC विस्तार की माँग और ब्रिक्स की बढ़ती ताकत के साथ, यह भाषण पश्चिम के वैश्विक वर्चस्व को सीधी चुनौती है।

मुख्य बातें

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एक-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था को 'अतीत की बात' करार दिया।
पुतिन ने कहा कि शक्ति का संतुलन अब ग्लोबल साउथ और पूर्व के नए विकास केंद्रों के पक्ष में बदल रहा है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने का आह्वान किया।
ब्रिक्स को 'बड़ा संगठन' बताते हुए पुतिन ने इसकी 'विस्तृत बौद्धिक और तकनीकी क्षमता' को सबसे बड़ी उपलब्धि कहा।
संबोधन के अंत में पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत का सम्मेलन आयोजन के लिए आभार जताया।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों की एक-ध्रुवीय व्यवस्था अब अतीत की बात बनती जा रही है। क्रेमलिन द्वारा प्रकाशित उनके बयान में बहु-ध्रुवीय विश्व की अनिवार्यता, ब्रिक्स की बढ़ती ताकत और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार पर ज़ोर दिया गया।

एक-ध्रुवीय व्यवस्था पर सीधा प्रहार

पुतिन ने अपने संबोधन में कहा, 'अंतरराष्ट्रीय संबंधों की एक-ध्रुवीय व्यवस्था, जो देशों के एक छोटे समूह के हितों को साधती थी, अब अतीत की बात होती जा रही है।' उनके अनुसार शक्ति का संतुलन अब ग्लोबल साउथ और पूर्व के नए विकास केंद्रों के पक्ष में बदल रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और उसके सहयोगी देश वैश्विक मंचों पर अपनी प्रभुता बनाए रखने की कोशिश में लगे हैं।

बहु-ध्रुवीय दुनिया की राह में चुनौतियाँ

पुतिन ने माना कि बहु-ध्रुवीय विश्व का उदय चुनौतियों से मुक्त नहीं है। उन्होंने कहा कि इसका विरोध उन लोगों की ओर से होता है जिनकी सोच की जड़ें 'औपनिवेशिक मानसिकता' में हैं — 'जो दुनिया को एक लहलहाते बाग और जंगल में बाँटकर देखते हैं, और दूसरों की मेहनत पर जीने के आदी हैं।' हालाँकि पुतिन ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन यह टिप्पणी पश्चिमी देशों की ओर इशारा करती प्रतीत होती है।

ब्रिक्स की बढ़ती साख और क्षमता

शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स की भूमिका को रेखांकित करते हुए पुतिन ने कहा कि यह संगठन अब एक बड़े वैश्विक मंच के रूप में स्थापित हो चुका है। उन्होंने कहा, 'हमारे पास विस्तृत, प्रचुर बौद्धिक और तकनीकी क्षमता है — यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।' गौरतलब है कि ब्रिक्स अब केवल पाँच मूल सदस्यों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका विस्तार हुआ है और इसकी वैश्विक विश्वसनीयता लगातार बढ़ रही है।

यूएन सुरक्षा परिषद में सुधार की माँग

पुतिन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के विस्तार का आह्वान करते हुए कहा, 'एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देकर सुरक्षा परिषद का विस्तार करने से निश्चित रूप से इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।' यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब भारत सहित कई देश UNSC में स्थायी सीट की माँग लंबे समय से कर रहे हैं।

पीएम मोदी और भारत को धन्यवाद

अपने संबोधन के अंत में पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय सहयोगियों का आभार जताते हुए कहा, 'नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने हमारे संगठन की उस बड़ी क्षमता को दिखाया है जिसके ज़रिए हम पारस्परिक लाभ वाले सहयोग को और बढ़ा सकते हैं।' आगे, ब्रिक्स देश राजनीति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक सहयोग सहित सभी अहम क्षेत्रों में अपने आपसी संबंध और गहरे करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह घोषणा महत्वाकांक्षी बयानबाजी से आगे नहीं जाती।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुतिन ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एक-ध्रुवीय व्यवस्था पर क्या कहा?
पुतिन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों की एक-ध्रुवीय व्यवस्था, जो देशों के एक छोटे समूह के हितों को साधती थी, अब अतीत की बात होती जा रही है। उनके अनुसार शक्ति का संतुलन अब ग्लोबल साउथ और पूर्व के नए विकास केंद्रों के पक्ष में बदल रहा है।
18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कहाँ और कब हुआ?
18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली, भारत में आयोजित हुआ। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी मेज़बानी की, जिसके लिए पुतिन ने विशेष आभार जताया।
पुतिन ने यूएन सुरक्षा परिषद के बारे में क्या माँग रखी?
पुतिन ने कहा कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देकर सुरक्षा परिषद का विस्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने ब्रिक्स देशों से मिलकर संयुक्त राष्ट्र को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
पुतिन ने बहु-ध्रुवीय दुनिया बनाने में किन चुनौतियों का ज़िक्र किया?
पुतिन ने कहा कि बहु-ध्रुवीय दुनिया के निर्माण का विरोध 'औपनिवेशिक मानसिकता' वाले लोगों की ओर से होता है, जो बदलते वैश्विक सच को स्वीकार नहीं करना चाहते। उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन यह संदर्भ पश्चिमी देशों की नीतियों की ओर इशारा करता प्रतीत होता है।
ब्रिक्स के बारे में पुतिन की क्या राय है?
पुतिन ने ब्रिक्स को एक 'बड़े संगठन' के रूप में सराहा और कहा कि इसकी विस्तृत बौद्धिक और तकनीकी क्षमता इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। उनके अनुसार ब्रिक्स की साझेदारी बराबरी, अच्छे पड़ोसी जैसे संबंध और एक-दूसरे के हितों के सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित है।
राष्ट्र प्रेस
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