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पुतिन का बड़ा बयान: संघर्ष और प्रतिस्पर्धा के बीच बन रही है नई विश्व व्यवस्था

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पुतिन का बड़ा बयान: संघर्ष और प्रतिस्पर्धा के बीच बन रही है नई विश्व व्यवस्था

सारांश

पुतिन का स्टेट ड्यूमा संबोधन महज एक संसदीय औपचारिकता नहीं था — यह एक स्पष्ट भू-राजनीतिक घोषणापत्र था। संघर्ष के बीच नई विश्व व्यवस्था बनने का दावा और 2030 के बाद की वैश्विक संरचना में रूस की केंद्रीय भूमिका का संकेत — यह पश्चिमी वर्चस्व को सीधी चुनौती है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 27 जुलाई 2026 को मॉस्को के ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस में स्टेट ड्यूमा के सांसदों को संबोधित किया।
पुतिन ने कहा कि संघर्ष और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच नई विश्व व्यवस्था की रूपरेखा तैयार हो रही है।
उन्होंने विशेष सैन्य अभियान में लड़ रहे सैनिकों के साथ पूरे देश और समाज के खड़े होने का आह्वान किया।
विशेष राष्ट्रपति प्रतिनिधि बोरिस तितोव ने न्यूयॉर्क में HLPF के बाद कहा कि रूस 2030 के बाद की वैश्विक संरचना की चर्चा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
फेडरेशन काउंसिल के उपाध्यक्ष कॉन्स्टेंटिन कोसाचेव ने कहा था कि विश्व व्यवस्था में बदलाव व्यावहारिक धरातल पर दिखना चाहिए।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार, 27 जुलाई 2026 को स्पष्ट रूप से कहा कि वैश्विक स्तर पर एक नई विश्व व्यवस्था (वर्ल्ड ऑर्डर) की रूपरेखा संघर्ष और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच आकार ले रही है। मॉस्को के ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस के सेंट जॉर्ज हॉल में रूसी संसद स्टेट ड्यूमा के आठवें कार्यकाल के सांसदों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह टिप्पणी की।

पुतिन के मुख्य वक्तव्य

रूसी राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, पुतिन ने सांसदों से कहा, 'पिछले पाँच साल, जो आपके कार्यकाल का भी समय था, हमारे देश के लिए कठिन और बेहद चुनौतीपूर्ण रहे। यह हमारे देश के इतिहास के सबसे अहम दौर में से एक है। आज हमारे लोगों की किस्मत और देश का भविष्य दांव पर लगा है। यह कोई बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात नहीं है। इसी दौरान संघर्ष और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच दुनिया की नई व्यवस्था की रूपरेखा तैयार हो रही है।'

उन्होंने विशेष सैन्य अभियान (स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन) में तैनात रूसी सैनिकों की प्रशंसा करते हुए कहा, 'आज भी हम अपने देश की सुरक्षा, आजादी, सच्चाई और न्याय की रक्षा कर रहे हैं। हमारे सैनिक रूस और अपनी मातृभूमि के लिए बहादुरी से लड़ रहे हैं। पूरा देश और समाज उनके साथ खड़ा है। हम अपने लक्ष्य जरूर हासिल करेंगे।'

2030 के बाद की वैश्विक संरचना पर रूस की भूमिका

यह ऐसे समय में आया है जब पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के हाई-लेवल पॉलिटिकल फोरम ऑन सस्टेनेबल डेवलपमेंट (HLPF) में रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के बाद, सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों से संबंधों के विशेष राष्ट्रपति प्रतिनिधि बोरिस तितोव ने कहा था कि 2030 के बाद की वैश्विक व्यवस्था को लेकर होने वाली चर्चा में रूस अहम भूमिका निभा रहा है।

तितोव ने पत्रकारों से कहा, 'आज की हमारी यह यात्रा सिर्फ शुरुआत है। रूस इस बात पर चर्चा शुरू कर रहा है कि 2030 के बाद दुनिया की व्यवस्था और देशों के बीच रिश्तों की नई रूपरेखा कैसी होनी चाहिए। यह वैश्विक संबंधों की एक नई संरचना होगी।'

रूस की 'असली दुनिया' की ताकत का दावा

तितोव ने रूस की तुलनात्मक शक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा, 'डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में भी रूस मजबूत है, लेकिन जमीनी कामों में हमारी ताकत सबसे ज्यादा है। अनाज ऑनलाइन नहीं उगाया जा सकता, हर घर तक पानी इंटरनेट के जरिए नहीं पहुंचाया जा सकता और आर्कटिक को क्लाउड पर नहीं ले जाया जा सकता।' उनके अनुसार रूस उन बुनियादी जरूरतों में सबसे सक्षम है जो लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हैं।

संसदीय समर्थन और राजनीतिक संदेश

गौरतलब है कि पिछले महीने फेडरेशन काउंसिल के उपाध्यक्ष कॉन्स्टेंटिन कोसाचेव ने भी कहा था कि विश्व व्यवस्था में बदलाव केवल वाद-विवाद तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वह व्यावहारिक धरातल पर दिखाई भी देना चाहिए। पुतिन का यह संबोधन उसी दिशा में एक राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।

आगे क्या

विश्लेषकों के अनुसार, पुतिन का यह भाषण रूस की उस व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह पश्चिमी-नेतृत्व वाली विश्व व्यवस्था को चुनौती देते हुए एक वैकल्पिक बहुध्रुवीय ढाँचे की वकालत कर रहा है। 2030 के बाद के वैश्विक एजेंडे में रूस की सक्रिय भागीदारी इस रणनीति की अगली कड़ी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वैश्विक व्यवस्था के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करती है। HLPF जैसे बहुपक्षीय मंचों पर रूस की उपस्थिति और 2030 के बाद के एजेंडे पर दावेदारी यह दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद रूस वैश्विक विमर्श से खुद को अलग नहीं मानता। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि ग्लोबल साउथ के कई देश इस 'बहुध्रुवीय' भाषा को सहानुभूति से सुन रहे हैं — और यही पश्चिम के लिए असली चुनौती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुतिन ने नई विश्व व्यवस्था के बारे में क्या कहा?
पुतिन ने 27 जुलाई 2026 को मॉस्को में स्टेट ड्यूमा के सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि संघर्ष और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच दुनिया की नई व्यवस्था की रूपरेखा तैयार हो रही है। उन्होंने इसे देश के इतिहास के सबसे अहम दौर में से एक बताया।
पुतिन ने विशेष सैन्य अभियान पर क्या कहा?
पुतिन ने कहा कि विशेष सैन्य अभियान में शामिल रूसी सैनिक देश की सुरक्षा, आजादी, सच्चाई और न्याय के लिए बहादुरी से लड़ रहे हैं और पूरा देश व समाज उनके साथ खड़ा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि रूस अपने लक्ष्य जरूर हासिल करेगा।
2030 के बाद की वैश्विक व्यवस्था में रूस की क्या भूमिका होगी?
विशेष राष्ट्रपति प्रतिनिधि बोरिस तितोव के अनुसार, रूस 2030 के बाद की वैश्विक संरचना और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की नई रूपरेखा पर चर्चा शुरू कर रहा है। न्यूयॉर्क में HLPF में रूसी प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी इसी रणनीति का हिस्सा बताई गई।
रूस के फेडरेशन काउंसिल के उपाध्यक्ष ने विश्व व्यवस्था पर क्या कहा था?
फेडरेशन काउंसिल के उपाध्यक्ष कॉन्स्टेंटिन कोसाचेव ने पिछले महीने कहा था कि विश्व व्यवस्था में बदलाव केवल वाद-विवाद तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वह व्यावहारिक धरातल पर भी दिखाई देना चाहिए।
पुतिन ने रूस की किन क्षेत्रों में ताकत का जिक्र किया?
बोरिस तितोव ने रूस की ताकत का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक के साथ-साथ जमीनी और बुनियादी कार्यों — जैसे कृषि, जलापूर्ति और आर्कटिक संसाधन — में रूस सबसे मजबूत है। उनके अनुसार ये वे क्षेत्र हैं जो लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से सीधे जुड़े हैं।
राष्ट्र प्रेस
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