पुतिन का बड़ा बयान: संघर्ष और प्रतिस्पर्धा के बीच बन रही है नई विश्व व्यवस्था
सारांश
मुख्य बातें
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार, 27 जुलाई 2026 को स्पष्ट रूप से कहा कि वैश्विक स्तर पर एक नई विश्व व्यवस्था (वर्ल्ड ऑर्डर) की रूपरेखा संघर्ष और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच आकार ले रही है। मॉस्को के ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस के सेंट जॉर्ज हॉल में रूसी संसद स्टेट ड्यूमा के आठवें कार्यकाल के सांसदों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह टिप्पणी की।
पुतिन के मुख्य वक्तव्य
रूसी राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, पुतिन ने सांसदों से कहा, 'पिछले पाँच साल, जो आपके कार्यकाल का भी समय था, हमारे देश के लिए कठिन और बेहद चुनौतीपूर्ण रहे। यह हमारे देश के इतिहास के सबसे अहम दौर में से एक है। आज हमारे लोगों की किस्मत और देश का भविष्य दांव पर लगा है। यह कोई बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात नहीं है। इसी दौरान संघर्ष और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच दुनिया की नई व्यवस्था की रूपरेखा तैयार हो रही है।'
उन्होंने विशेष सैन्य अभियान (स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन) में तैनात रूसी सैनिकों की प्रशंसा करते हुए कहा, 'आज भी हम अपने देश की सुरक्षा, आजादी, सच्चाई और न्याय की रक्षा कर रहे हैं। हमारे सैनिक रूस और अपनी मातृभूमि के लिए बहादुरी से लड़ रहे हैं। पूरा देश और समाज उनके साथ खड़ा है। हम अपने लक्ष्य जरूर हासिल करेंगे।'
2030 के बाद की वैश्विक संरचना पर रूस की भूमिका
यह ऐसे समय में आया है जब पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के हाई-लेवल पॉलिटिकल फोरम ऑन सस्टेनेबल डेवलपमेंट (HLPF) में रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के बाद, सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों से संबंधों के विशेष राष्ट्रपति प्रतिनिधि बोरिस तितोव ने कहा था कि 2030 के बाद की वैश्विक व्यवस्था को लेकर होने वाली चर्चा में रूस अहम भूमिका निभा रहा है।
तितोव ने पत्रकारों से कहा, 'आज की हमारी यह यात्रा सिर्फ शुरुआत है। रूस इस बात पर चर्चा शुरू कर रहा है कि 2030 के बाद दुनिया की व्यवस्था और देशों के बीच रिश्तों की नई रूपरेखा कैसी होनी चाहिए। यह वैश्विक संबंधों की एक नई संरचना होगी।'
रूस की 'असली दुनिया' की ताकत का दावा
तितोव ने रूस की तुलनात्मक शक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा, 'डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में भी रूस मजबूत है, लेकिन जमीनी कामों में हमारी ताकत सबसे ज्यादा है। अनाज ऑनलाइन नहीं उगाया जा सकता, हर घर तक पानी इंटरनेट के जरिए नहीं पहुंचाया जा सकता और आर्कटिक को क्लाउड पर नहीं ले जाया जा सकता।' उनके अनुसार रूस उन बुनियादी जरूरतों में सबसे सक्षम है जो लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हैं।
संसदीय समर्थन और राजनीतिक संदेश
गौरतलब है कि पिछले महीने फेडरेशन काउंसिल के उपाध्यक्ष कॉन्स्टेंटिन कोसाचेव ने भी कहा था कि विश्व व्यवस्था में बदलाव केवल वाद-विवाद तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वह व्यावहारिक धरातल पर दिखाई भी देना चाहिए। पुतिन का यह संबोधन उसी दिशा में एक राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
आगे क्या
विश्लेषकों के अनुसार, पुतिन का यह भाषण रूस की उस व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह पश्चिमी-नेतृत्व वाली विश्व व्यवस्था को चुनौती देते हुए एक वैकल्पिक बहुध्रुवीय ढाँचे की वकालत कर रहा है। 2030 के बाद के वैश्विक एजेंडे में रूस की सक्रिय भागीदारी इस रणनीति की अगली कड़ी होगी।