महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: शिवसेना का कांग्रेस पर हमला — '1 सीट पर जश्न नहीं, आत्ममंथन करे'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद शिवसेना के नेताओं ने 29 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि चार राज्यों में हुए विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस केवल 1 सीट जीत सकी, जबकि 28 सीटों पर मुकाबला हुआ — और इसके बावजूद पार्टी जश्न में डूबी है। निरुपम के अनुसार, एक बड़ी राष्ट्रीय पार्टी का यह रवैया 'नकारात्मक राजनीति' का उदाहरण है।
मुख्य घटनाक्रम
संजय निरुपम ने स्पष्ट किया कि शिवसेना उन आरोपों का खंडन करती है जो भाजपा के एक सहयोगी दल ने चुनाव परिणामों के बाद पार्टी पर लगाए हैं। उन्होंने माना कि महायुति गठबंधन — जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP), शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) शामिल हैं — के तीनों दलों के बीच समन्वय की कमी रही। उनके अनुसार गठबंधन में समन्वय की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सबसे बड़े दल अर्थात् BJP की थी।
शिवसेना प्रवक्ता आनंद परांजपे ने भी कहा कि यदि तीनों सहयोगी दलों में सही तालमेल होता, तो नतीजे 5-0 होते। लेकिन गठबंधन केवल 2 सीटें जीत सका, जबकि महा विकास अघाड़ी (MVA) ने 3 सीटें हासिल कीं।
कांग्रेस पर सीधा प्रहार
निरुपम ने कांग्रेस की ओर से यह तर्क दिए जाने पर भी सवाल उठाया कि पार्टी ने सभी 28 नहीं, बल्कि केवल 10 से 11 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। उनका कहना था कि यदि कांग्रेस खुद को राष्ट्रीय दल मानती है और सत्ता हासिल करने की आकांक्षा रखती है, तो इतनी सीमित संख्या में चुनाव लड़ने के कारणों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा, '11 में से 1 सीट मिलना यह दर्शाता है कि शिक्षित और शहरी मतदाताओं ने कांग्रेस को नकार दिया है।'
शाइना एनसी ने भी इसी सुर में कहा कि चार राज्यों की 28 सीटों में से कांग्रेस मात्र 1 सीट पर सफल रही। उन्होंने बैलेट पेपर संबंधी कांग्रेस की माँगों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मुद्दों को उठाने के बावजूद पार्टी का चुनावी प्रदर्शन कमज़ोर रहा।
फॉर्म-6 विवाद और सुप्रीम कोर्ट
शिवसेना नेता आनंद दुबे ने चुनाव आयोग (ECI) और सर्वोच्च न्यायालय के बीच फॉर्म-6 को लेकर उठे सवाल पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग से पूछा है कि लोगों से फॉर्म-6 क्यों भरवाया जा रहा है, और चुनाव आयोग इसका जवाब देगा।
दुबे ने कहा कि शिवसेना सरकार का हिस्सा भी है और राजनीतिक दल भी, इसलिए न्यायालय और चुनाव आयोग के बीच चल रही बातचीत पर टिप्पणी करना उचित नहीं। उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि यदि कोई आपत्ति है तो वे अदालत या चुनाव आयोग के समक्ष जाएं।
महायुति की आंतरिक चुनौती
निरुपम ने यह भी चेताया कि जब तक तीनों सहयोगी दल एकजुट रहेंगे, तब तक उनकी राजनीतिक ताकत बनी रहेगी। लेकिन यदि आपसी मतभेद सामने आए, तो महा विकास अघाड़ी, शरद पवार और कांग्रेस जैसे विपक्षी दल इसका फायदा उठा सकते हैं। गठबंधन के भीतर यह स्वीकारोक्ति — कि BJP को समन्वय में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी थी — महायुति के आंतरिक तनाव को रेखांकित करती है।
अमरावती सीट पर जीत का जश्न
शिवसेना की विधान परिषद सदस्य मनीषा कायंदे ने अमरावती संभाग के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से किरण सरनाइक के दोबारा निर्वाचित होने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि सरनाइक ने एक बार फिर शिवसेना की सीट से जीत हासिल की और इसके लिए शिक्षकों के समर्थन को महत्वपूर्ण बताया।
यह ऐसे समय में आया है जब महायुति और महा विकास अघाड़ी दोनों अगले विधानसभा चुनावों से पहले अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं — और विधान परिषद के ये नतीजे दोनों खेमों में हलचल मचा गए हैं।