महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: महायुति ने 17 में से 16 सीटें जीतीं, नासिक में शिंदे गुट को झटका
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने 17 में से 16 सीटें जीतकर निर्णायक बढ़त हासिल की है। 22 जून 2026 को मतगणना के साथ संपन्न हुए इन द्विवार्षिक चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने गठबंधन की अगुवाई करते हुए सर्वाधिक सीटें अपने नाम कीं, जबकि विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) लगभग हर क्षेत्र में पराजित हुई। एकमात्र अपवाद नासिक रहा, जहाँ एक निर्दलीय उम्मीदवार ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के आधिकारिक प्रत्याशी को चौंकाने वाली हार दी।
चुनाव परिणाम: सीटवार विवरण
महायुति के 16 सीटों के कुल योग में BJP को 11, शिवसेना (शिंदे गुट) को 3, NCP (अजित पवार गुट) को 2 और एक निर्दलीय सीट शामिल है। गौरतलब है कि 18 जून को 11 सीटों पर मतदान से पूर्व ही महायुति ने 6 सीटें निर्विरोध जीत ली थीं — यह तब संभव हुआ जब MVA के कई उम्मीदवारों ने नामांकन वापसी के अंतिम दिन अपने नाम वापस ले लिए।
भंडारा-गोंदिया में BJP के अविनाश ब्रम्हणकर ने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार नरेश ईश्वरकर को 148 मतों के अंतर से पराजित किया — ब्रम्हणकर को 304 और ईश्वरकर को 152 वोट मिले। छत्रपति संभाजीनगर-जालना में BJP के सुहास शिरसाट ने शिवसेना (UBT) के गणेश लोखंडे को हराया; शिरसाट को 454 और लोखंडे को 134 मत मिले।
नांदेड़ में महायुति के अमरनाथ राजुरकर ने 339 वोट पाकर जीत दर्ज की, जबकि MVA उम्मीदवार कृष्णा पाटिल अष्टिकर को केवल 84 वोट मिले। धराशिव-लातूर-बीड़ में BJP के बसवराज पाटिल ने 845 मतों से जीत हासिल की। सांगली-सतारा में BJP के धैर्यशील कदम को 591 प्रथम वरीयता वोट मिले और उन्होंने NCP के अभय सिंह जगताप (295 वोट) को पराजित किया। जलगांव में BJP के नंदकिशोर महाजन ने 577 मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की।
नासिक का उलटफेर: महायुति की एकमात्र पराजय
चुनाव का सबसे चर्चित उलटफेर नासिक स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र में सामने आया। BJP के वरिष्ठ नेताओं गिरीश महाजन और उदय सामंत के भारी राजनीतिक दबाव के बावजूद निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल गीते — जिन्हें BJP का बागी माना जाता है — ने चुनाव से हटने से साफ इनकार कर दिया।
गीते ने बिना किसी बड़ी सार्वजनिक रैली के एक अपरंपरागत जन-संपर्क अभियान चलाया और महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार, शिवसेना (शिंदे) के मौजूदा MLC नरेंद्र दराडे को नाटकीय रूप से पराजित किया। जीत के बाद गीते ने पत्रकारों से कहा कि यह परिणाम दबाव की रणनीति पर "सत्य की विजय" है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और आरोप
जलगांव में पराजित MVA उम्मीदवार शरद तायडे (शिवसेना UBT) ने चुनाव प्रक्रिया की सार्वजनिक आलोचना करते हुए धन बल के इस्तेमाल का आरोप लगाया और इसे "जादुई कलम" का खेल बताते हुए मतदान प्रक्रिया पर संदेह जताया। यह ऐसे समय में आया है जब MVA पहले से ही अपनी आंतरिक समन्वय की कमी और उम्मीदवारों की नामांकन वापसी को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही है।
महायुति के भीतर आंतरिक तनाव
नासिक के नतीजे ने महायुति के भीतर मौजूद आंतरिक कलह को उजागर कर दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब गठबंधन बाहरी रूप से एकजुट दिखने की कोशिश कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि शिंदे गुट की यह पराजय गठबंधन के स्थानीय-स्तरीय प्रबंधन में खामियों की ओर इशारा करती है।
आगे क्या
इस जीत के साथ महायुति ने महाराष्ट्र विधान परिषद में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। हालाँकि नासिक का उलटफेर गठबंधन के लिए एक चेतावनी है कि बागी उम्मीदवारों को नियंत्रित करना भविष्य की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा होगा। MVA के लिए यह परिणाम स्थानीय निकाय नेटवर्क को विधायी सीटों में बदलने की क्षमता पर गहरे सवाल खड़े करता है।