महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव 2026: 17 सीटों पर 18 जून को मतदान, मनीषा कायंदे का विपक्ष पर तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में महाराष्ट्र विधान परिषद की 17 सीटों पर 18 जून को होने वाले चुनाव से पहले राजनीतिक पारा चढ़ गया है। शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने दावा किया है कि विपक्ष के पास न तो कोई ठोस मुद्दा बचा है और न ही उपयुक्त उम्मीदवार, और इसी कारण विपक्षी खेमे में बेचैनी है। उन्होंने कहा कि महायुति सभी 17 सीटों पर भारी बहुमत से जीत दर्ज करेगी।
मनीषा कायंदे का दावा
राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने कहा, “विपक्ष के पास तो कोई ठीक-ठाक उम्मीदवार भी नहीं हैं, उन्हें किसी एक को चुनने में ही कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन 17 सीटों पर हमें जीत का पूरा भरोसा है। हमारे मतदाता बहुत मजबूत हैं। नगर परिषदों और नगर निगमों में, ज्यादातर मतदाता 'महायुति' से जुड़े हैं। इसलिए, हमें पूरा यकीन है कि हम जरूर जीतेंगे।”
महायुति का समन्वय और रणनीति
कायंदे के अनुसार, महायुति के सभी घटक दलों — भाजपा, शिवसेना और एनसीपी — के बीच उचित समन्वय है और गठबंधन पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में है। महायुति ने बुधवार को विधान परिषद चुनाव के लिए 17 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी, जिसमें तीनों घटक दलों के प्रत्याशी शामिल हैं। उम्मीदवारी वापस लेने की अंतिम तारीख 4 जून है।
रोहित पवार पर निशाना
एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार को लेकर कायंदे ने तंज कसते हुए कहा, “वे चुनाव आयोग जाकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं, क्योंकि आजकल वे अपना ज्यादातर समय पुलिस थानों में ही बिताते हैं। अगर उनके पास सबूत हैं, तो उन्हें पुलिस थाने जाकर उन्हें साबित करना चाहिए।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया और महायुति की रणनीति पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
संजय राउत और उद्धव गुट पर तीखा वार
शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत पर कटाक्ष करते हुए कायंदे ने कहा, “आजकल संजय राउत के आरोपों को कोई भी गंभीरता से नहीं लेता। पहले लोग उनकी बातें सुनते थे, लेकिन अब तो वे उन्हें सुनना भी पसंद नहीं करते और आगे बढ़ जाते हैं। ये बयान ज्यादातर मीडिया तक ही सीमित रहते हैं।” उन्होंने उद्धव ठाकरे की पार्टी पर भी हमला बोलते हुए कहा कि उनकी हालत ऐसी है कि वे खुद इस बात की गारंटी नहीं दे सकते कि उनके अपने लोग उनके साथ बने रहेंगे।
आगे क्या
नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 4 जून के बाद चुनावी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी, जबकि मतदान 18 जून को होगा। विधान परिषद की इन 17 सीटों का परिणाम न केवल राज्य की ऊपरी सदन में संख्या-संतुलन तय करेगा, बल्कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले महायुति और विपक्षी महा विकास अघाड़ी के बीच राजनीतिक दबदबे का भी संकेत देगा।