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अभिजीत भट्टाचार्य का जन्मदिन: CA बनने मुंबई आए, आरडी बर्मन ने बदली किस्मत

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अभिजीत भट्टाचार्य का जन्मदिन: CA बनने मुंबई आए, आरडी बर्मन ने बदली किस्मत

सारांश

CA बनने का सपना, मुंबई की आर्थिक तंगी, रिकॉर्डिंग स्टूडियो के बाहर घंटों इंतज़ार — अभिजीत भट्टाचार्य की कहानी है 9 साल के अटूट संघर्ष की, जिसे आरडी बर्मन की नज़र और 'बागी' के गानों ने अंजाम तक पहुँचाया।

मुख्य बातें

अभिजीत भट्टाचार्य का जन्म 30 अक्टूबर 1958 को कानपुर के एक बंगाली परिवार में हुआ।
वह 1981 में चार्टर्ड अकाउंटेंसी कोर्स के लिए मुंबई आए, लेकिन CA की पढ़ाई बीच में छोड़कर प्लेबैक सिंगिंग अपनाई।
बर्मन ने उन्हें 'आनंद और आनंद' (1984) में पहला बड़ा ब्रेक दिया, हालाँकि फिल्म फ्लॉप रही।
रविंद्र जैन ने संघर्ष के दिनों में उन्हें रहने की जगह दी और राजेश रोशन व जगजीत सिंह के गानों में कोरस सिंगर का काम मिला।
साल 1990 में सलमान खान की फिल्म 'बागी' के गानों ने उन्हें रातोंरात स्टार बनाया और 9 साल के संघर्ष का अंत हुआ।

बॉलीवुड के मशहूर प्लेबैक सिंगर अभिजीत भट्टाचार्य — जिनकी आवाज़ ने 'बड़ी मुश्किल है', 'तुम दिल की धड़कन में' और 'मैं कोई ऐसा गीत गाऊं' जैसे गीतों को अमर किया — का संगीत से कोई शुरुआती रिश्ता नहीं था। 30 अक्टूबर 1958 को कानपुर के एक बंगाली परिवार में जन्मे अभिजीत मूलतः चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना चाहते थे, और इसी सपने को लेकर 1981 में मुंबई पहुँचे थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था।

CA से प्लेबैक तक का सफर

कानपुर के क्राइस्ट चर्च कॉलेज से बी.कॉम पूरी करने के बाद अभिजीत चार्टर्ड अकाउंटेंसी का कोर्स करने मुंबई आए। पढ़ाई में रुचि रखने वाले इस युवक के दिल में संगीत का बीज भी पहले से बोया हुआ था। मुंबई की आबोहवा में कदम रखते ही वह संगीत की ओर खिंचते चले गए। जल्द ही उन्होंने CA की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और अपना पूरा जीवन प्लेबैक सिंगिंग को समर्पित करने का निर्णय लिया।

यह फैसला आसान नहीं था। मुंबई में शुरुआती दिन आर्थिक तंगी से भरे रहे — छोटे गेस्ट हाउस, तंग कमरे और गुज़ारे के लिए क्लर्क सहित कई छोटी नौकरियाँ। कई बार निराश होकर वह कानपुर लौट जाते, लेकिन संगीत का आकर्षण उन्हें बार-बार मायानगरी खींच लाता।

रिकॉर्डिंग स्टूडियो के बाहर घंटों इंतज़ार

अपनी पहचान बनाने के लिए अभिजीत ने आरडी बर्मन, बप्पी लहरी और राजेश रोशन जैसे दिग्गज संगीतकारों के घरों के बजाय सीधे रिकॉर्डिंग स्टूडियो के बाहर घंटों इंतज़ार करना शुरू किया। इस कठिन दौर में प्रसिद्ध संगीतकार रविंद्र जैन ने उन्हें रहने की जगह दी, जिससे उद्योग में उनकी नज़दीकी थोड़ी बढ़ी।

धीरे-धीरे उन्हें राजेश रोशन और जगजीत सिंह के गानों में कोरस सिंगर के तौर पर काम मिलने लगा — यानी वह मुख्य गायक के साथ समूह में सहायक स्वर देते थे। यह भूमिका छोटी थी, लेकिन उद्योग में पाँव जमाने का पहला मज़बूत कदम साबित हुई।

आरडी बर्मन ने पहचानी प्रतिभा, पहला बड़ा ब्रेक

दो साल के अथक संघर्ष के बाद महान संगीत निर्देशक आर.डी. बर्मन ने अभिजीत की प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने अभिजीत को देव आनंद के बेटे सुनील आनंद की डेब्यू फिल्म 'आनंद और आनंद' (1984) में पहला बड़ा मौका दिया। इस फिल्म में उन्हें अपने आदर्श किशोर कुमार, लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसे दिग्गजों के साथ गाने का सौभाग्य मिला।

हालाँकि, 'आनंद और आनंद' बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह नाकाम रही। फिल्म की असफलता ने आ रहे काम को अचानक बंद कर दिया और अभिजीत का करियर एक बार फिर अधर में लटक गया।

टी-सीरीज़ और किशोर ट्रिब्यूट एल्बम से मिली पहचान

हार न मानते हुए अभिजीत ने 6 से 7 साल के लंबे संघर्ष के दौरान गुलशन कुमार और टी-सीरीज़ के लिए किशोर कुमार के गानों के कवर वर्जन और श्रद्धांजलि एल्बम रिकॉर्ड किए। दूरदर्शन के शोज़ में किशोर कुमार के गीत गाकर उन्होंने भारतीय घरों में अपनी एक अलग पहचान बनाई।

'बागी' से रातोंरात बदली तस्वीर

साल 1990 में संगीतकार जोड़ी आनंद-मिलिंद ने अभिजीत को सलमान खान स्टारर फिल्म 'बागी' में गाने का अवसर दिया। फिल्म के गाने 'एक चंचल शोख हसीना' और 'चांदनी रात है' ब्लॉकबस्टर साबित हुए। इन गीतों की अभूतपूर्व सफलता ने अभिजीत को रातोंरात सुपरस्टार बना दिया और उनके 9 साल के लंबे संघर्ष का परदा उठ गया। यह वह मोड़ था जिसने एक थके हुए संघर्षरत गायक को बॉलीवुड की पहली पंक्ति में ला खड़ा किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

न किसी रियलिटी शो से — बल्कि रिकॉर्डिंग स्टूडियो के बाहर घंटों की प्रतीक्षा और गुलशन कुमार जैसे उद्यमियों के माध्यम से घर-घर तक पहुँचने से हुआ। यह उस दौर की याद दिलाता है जब टी-सीरीज़ के कैसेट कल्चर ने कई गैर-फ़िल्मी पृष्ठभूमि के कलाकारों को मुख्यधारा में जगह दिलाई — एक रास्ता जो आज के डिजिटल युग में स्ट्रीमिंग के ज़रिए फिर से खुला हुआ है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिजीत भट्टाचार्य मुंबई क्यों आए थे?
अभिजीत भट्टाचार्य मूल रूप से चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने के लिए 1981 में मुंबई आए थे। कानपुर के क्राइस्ट चर्च कॉलेज से बी.कॉम करने के बाद उन्होंने CA कोर्स में दाखिला लिया, लेकिन बाद में संगीत की ओर रुझान के चलते पढ़ाई छोड़ दी।
अभिजीत भट्टाचार्य को पहला बड़ा ब्रेक किसने दिया?
महान संगीत निर्देशक आर.डी. बर्मन ने अभिजीत को 1984 की फिल्म 'आनंद और आनंद' में पहला बड़ा ब्रेक दिया। हालाँकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, लेकिन इसी से उनके करियर की नींव पड़ी।
अभिजीत भट्टाचार्य को असली पहचान कब और किस फिल्म से मिली?
साल 1990 में सलमान खान की फिल्म 'बागी' से अभिजीत को असली पहचान मिली। संगीतकार जोड़ी आनंद-मिलिंद के संगीत में 'एक चंचल शोख हसीना' और 'चांदनी रात है' जैसे गाने ब्लॉकबस्टर साबित हुए और उनके 9 साल के संघर्ष का अंत हुआ।
अभिजीत भट्टाचार्य का जन्म कब और कहाँ हुआ?
अभिजीत भट्टाचार्य का जन्म 30 अक्टूबर 1958 को उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में एक बंगाली परिवार में हुआ था। वह शुरू से पढ़ाई में रुचि रखते थे और CA बनने का सपना देखते थे।
संघर्ष के दिनों में अभिजीत को किसने सहारा दिया?
संघर्ष के दौरान प्रसिद्ध संगीतकार रविंद्र जैन ने अभिजीत को रहने की जगह दी। इसके अलावा उन्होंने गुलशन कुमार और टी-सीरीज़ के लिए किशोर कुमार के गानों के कवर वर्जन रिकॉर्ड किए और दूरदर्शन के शोज़ में गाकर भारतीय दर्शकों में पहचान बनाई।
राष्ट्र प्रेस
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