राजस्थान ACB का बड़ा एक्शन: मुंडावर में ₹65,000 की रिश्वत लेते दो सरकारी कर्मचारी गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 29 अक्टूबर 2026 को खैरथल-तिजारा जिले की पंचायत समिति मुंडावर में तैनात दो सरकारी कर्मचारियों को कथित तौर पर ₹65,000 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास अधिकारी संजय कुमार यादव और जूनियर असिस्टेंट ऋतिक कुमार सिंह के रूप में हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के अनुसार, यह कार्रवाई एक शिकायतकर्ता की शिकायत पर आधारित थी। शिकायतकर्ता की फर्म को पंचायत समिति मुंडावर द्वारा ग्राम पंचायत मटौर और ग्राम पंचायत नांगली ओजा में सफाई कार्य का ठेका दिया गया था।
आरोप है कि विकास अधिकारी संजय कुमार यादव शिकायतकर्ता की फर्म द्वारा किए गए सफाई कार्य और पाइपलाइन निर्माण से संबंधित मेजरमेंट बुक की प्रविष्टियाँ पूरी करने के एवज में ₹65,000 की रिश्वत की माँग कर रहे थे।
एसीबी की जाँच प्रक्रिया
एसीबी की भिवाड़ी चौकी ने 23 अक्टूबर को शिकायत का सत्यापन किया। जाँच के दौरान रिश्वत माँगने की पुष्टि होने का दावा किया गया और आरोप है कि यादव ने मेजरमेंट बुक में प्रविष्टियाँ करने के बदले रिश्वत लेने पर सहमति जताई थी।
इसके बाद एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर 29 अक्टूबर को भिवाड़ी चौकी की टीम ने पंचायत समिति मुंडावर कार्यालय में ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया और दोनों आरोपियों को रिश्वत लेते हुए धर दबोचा।
अधिकारियों की निगरानी में कार्रवाई
यह पूरी ट्रैप कार्रवाई एसीबी जयपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी-I) पीयूष दीक्षित के निर्देशन में तथा भिवाड़ी चौकी प्रभारी पुलिस निरीक्षक सुरजीत सिंह के नेतृत्व में की गई। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों से अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और पुलिस महानिरीक्षक एस. परिमला की निगरानी में पूछताछ की जा रही है।
कानूनी कार्रवाई
एसीबी ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि आरोपी निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने मामले की स्थिति जानने और अपना पक्ष रखने के लिए संबंधित कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
आम जनता पर असर
यह मामला उजागर करता है कि ग्राम पंचायत स्तर के विकास कार्यों में भी भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। गौरतलब है कि सरकारी ठेकेदारों को अक्सर मेजरमेंट बुक प्रविष्टियों जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए भी अनधिकृत भुगतान करने पर मजबूर होना पड़ता है। एसीबी की यह कार्रवाई ऐसे मामलों में सतर्कता का संकेत देती है और आगे भी इस तरह के ट्रैप ऑपरेशन जारी रहने की संभावना है।