एमएलसी चुनाव 2026: कांग्रेस को सिर्फ नागपुर में जीत, 28 में से 27 सीटें गँवाईं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) को उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद (एमएलसी) की 28 सीटों पर हुए द्विवार्षिक चुनाव में केवल एक सीट पर जीत मिली — जीत का प्रतिशत महज 3.57% रहा। महाराष्ट्र के नागपुर ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र में अभिजीत वांजारी की जीत ने पार्टी को पूरी तरह खाली हाथ रहने से बचाया, अन्यथा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता सोशल मीडिया पर जिस 'शून्य प्रदर्शन' को लेकर तंज कस रहे थे, वह सच साबित हो जाता।
मुख्य घटनाक्रम
नागपुर ग्रेजुएट्स सीट पर अभिजीत वांजारी ने सीट बरकरार रखी, जो कांग्रेस के लिए एकमात्र राहत की खबर रही। यह सीट राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जाती है क्योंकि नागपुर BJP और RSS का पारंपरिक गढ़ भी है। पार्टी नेताओं के अनुसार, इस जीत से यह संकेत मिलता है कि शिक्षित और स्नातक मतदाताओं के एक वर्ग में कांग्रेस का प्रभाव अब भी कायम है।
चुनाव परिणाम 29 अक्टूबर 2026 को सामने आए। कुल मिलाकर इन चुनावों में BJP और उसके सहयोगी दलों का प्रदर्शन कहीं अधिक मजबूत रहा, जबकि कांग्रेस के कई क्षेत्रीय सहयोगी दल भी उससे बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहे।
कर्नाटक में निराशाजनक प्रदर्शन
कर्नाटक में सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस को निराशा हाथ लगी। बेंगलुरु टीचर्स सीट पर जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवार ए.पी. रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी पुट्टन्ना को करीब 900 वोटों से हरा दिया। राजधानी क्षेत्र की यह सीट पार्टी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती थी। यह हार इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि राज्य में कांग्रेस की सरकार है और उसे घरेलू मैदान पर नुकसान उठाना पड़ा।
बिहार में गठबंधन की दरारें उजागर
बिहार के दरभंगा टीचर्स सीट पर भी कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। दो बार इस सीट से जीत चुके और मौजूदा एमएलसी मदन मोहन झा को प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार सुरेश प्रसाद राय ने कड़े मुकाबले में पराजित किया। रिपोर्टों के अनुसार, इंडिया गठबंधन के वोटों में बंटवारा भी इस हार का कारण बना, क्योंकि लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भी अपना अलग उम्मीदवार उतारा था, जिससे कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक को नुकसान पहुँचा।
विपक्षी खेमे में कांग्रेस की सीमित भूमिका
इन चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर विपक्षी खेमे में कांग्रेस की घटती भूमिका को रेखांकित किया है। बिहार में RJD, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (SP), और महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) (शरद पवार गुट) तथा शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) जैसे दल कहीं अधिक प्रभावी नजर आए। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, लोकसभा और विधानसभा चुनावों में लगातार कमजोर प्रदर्शन के बाद इस तरह के उपचुनाव परिणाम कांग्रेस की संगठनात्मक कमज़ोरी को और उजागर करते हैं।
आगे क्या
पार्टी नेताओं का कहना है कि नागपुर जैसी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीट पर जीत से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और पार्टी यह दावा कर सकती है कि कुछ क्षेत्रों में उसका प्रभाव अब भी बना हुआ है। हालाँकि, व्यापक तस्वीर यही है कि 28 में से 27 सीटें गँवाने के बाद पार्टी नेतृत्व को संगठनात्मक पुनर्निर्माण पर गंभीरता से विचार करना होगा। आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से पहले यह नतीजे कांग्रेस के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखे जा रहे हैं।