मध्य प्रदेश मदरसा निरीक्षण: कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद बोले — कमी हो तो नोटिस दें, बच्चों को न डराएं
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने 29 अक्टूबर 2026 को भोपाल में मध्य प्रदेश के मदरसों में हो रहे औचक निरीक्षण पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि बाल आयोग की अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों को निरीक्षण का संवैधानिक अधिकार अवश्य है, किंतु यदि कमियाँ मिलती हैं तो कार्रवाई मदरसा प्रबंधन को नोटिस देकर होनी चाहिए — न कि बच्चों में भय फैलाकर। मसूद ने आरोप लगाया कि निरीक्षण के नाम पर 'टारगेटिंग' की भाषा और मीडिया में 'आपत्तिजनक किताबें' जैसे शब्दों के ज़रिए दुष्प्रचार किया जा रहा है।
विधायक मसूद के मुख्य आरोप
मसूद ने अपने बयान में कहा, 'ये मदरसों को टारगेट करने का जो सिलसिला चला है, यह रुकना चाहिए। बाल विकास की अधिकारी जाती हैं, औचक निरीक्षण करती हैं, उनकी अध्यक्ष भी अचानक निरीक्षण करती हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि उन्हें संवैधानिक अधिकार है, उन्हें जाना चाहिए, लेकिन निरीक्षण करके यदि वहाँ कमियाँ पाई जाती हैं, तो उसके लिए वहाँ के प्रबंधन को नोटिस देना चाहिए। कम-से-कम टारगेट वाली भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए।'
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 29 का हवाला देते हुए कहा कि मदरसों और गुरुकुलों को शिक्षा देने की परंपरा सदियों पुरानी है और बच्चे अपने अभिभावकों के शपथ पत्र के आधार पर वहाँ नामांकित होते हैं।
ग्वालियर की घटना और बच्चों की रिहाई
विधायक मसूद ने ग्वालियर में हुई एक घटना का उल्लेख किया, जहाँ मदरसे के बच्चों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि ग्वालियर के शहर काजी, जिला वक्फ कमेटी, भीम आर्मी और आज़ाद पार्टी को धन्यवाद देते हुए बताया कि सभी ने मिलकर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखी जिसके फलस्वरूप चार दिन बाद बच्चे रिहा हुए। उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रशासन ने इस मामले में समझदारी दिखाई।
सुधार की माँग, बंद हो टारगेटिंग
मसूद ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध निरीक्षण से नहीं, बल्कि उसके तरीके और मंशा से है। उन्होंने कहा कि यदि बाथरूम कम हैं तो उन्हें बढ़ाने का निर्देश दें, अंग्रेज़ी शिक्षा का स्तर कमज़ोर है तो उसे सुधारने को कहें, खाने की व्यवस्था में खामी है तो नोटिस जारी करें। 'लेकिन एक मानसिकता के तहत यदि आप टारगेट करेंगी, तो यह उचित नहीं होगा' — उन्होंने जोड़ा।
BJP पर राजनीतिक हमला
मसूद ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग भी दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और उमंग सिंघार ने भी मदरसों के पक्ष में बयान दिया है। उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'डर और भय की राजनीति' इस घटनाक्रम से उजागर हुई है। उन्होंने आलोचना करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में BJP को कोई 'उचित व्यक्ति' नहीं मिला, इसलिए इस तरह के निर्णय लिए जा रहे हैं।
आगे की स्थिति
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य प्रदेश में मदरसा नीति को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि देश के कई राज्यों में मदरसा निरीक्षण और उनकी मान्यता का मुद्दा न्यायालयों तक पहुँच चुका है। आलोचकों का कहना है कि बिना पारदर्शी प्रक्रिया के किए गए निरीक्षण सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुँचा सकते हैं। मामले में आगे की कार्रवाई और सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है।