जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रों का ऑनलाइन कक्षाओं से पूर्ण बहिष्कार, 24 नवंबर तक विस्तार के आदेश का विरोध
सारांश
मुख्य बातें
जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर वेस्ट एशियन स्टडीज (CWS) और समाजशास्त्र विभाग के छात्रों ने गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालय प्रशासन के ऑनलाइन कक्षाओं को 24 नवंबर तक बढ़ाने के आदेश का 'पूर्ण बहिष्कार' करने की घोषणा की। छात्रों ने शैक्षणिक प्रगति, शोध कार्य और परिसर की भौतिक उपस्थिति पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव का हवाला देते हुए कैंपस और ऑफलाइन पढ़ाई को तत्काल बहाल करने की माँग की।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आई है जब जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ (JMISTU) की बहाली और प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के विरोध में विश्वविद्यालय के मुख्य निरीक्षक को हटाने की माँग को लेकर चल रहे प्रदर्शन गुरुवार को 18वें दिन में प्रवेश कर गए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर की स्थिति को 'शैक्षणिक वातावरण के लिए अनुकूल नहीं' बताते हुए ऑनलाइन कक्षाएँ जारी रखने और विषम सेमेस्टर की व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक परीक्षाएँ भी ऑनलाइन माध्यम से कराने का आदेश दिया था।
छात्रों की आपत्तियाँ और माँगें
CWS के छात्रों ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि ऑनलाइन कक्षाओं को 'बिना किसी निश्चित समयसीमा या छात्रों से परामर्श किए' अनिश्चितकाल तक बढ़ाने का निर्णय उनकी शैक्षणिक प्रगति, शोध कार्य और संस्थागत जुड़ाव को बाधित करता है। छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि उपस्थिति संबंधी नियमों या प्रशासनिक दबाव के चलते कोई व्यक्ति ऑनलाइन कक्षा में उपस्थित होता है तो इसे आदेश की 'स्वैच्छिक स्वीकृति' नहीं माना जाएगा।
छात्रों ने माँग पत्र जारी करते हुए परिसर की तत्काल बहाली, निश्चित परिचालन कार्यक्रम, रचनात्मक प्रशासनिक सहयोग, संवैधानिक मसौदे की समय सीमा और शैक्षणिक सुरक्षा की माँग की।
शोध और संसाधनों पर असर
CWS ने रेखांकित किया कि उनके विद्वानों और छात्रों के लिए केंद्रीय पुस्तकालय, भौतिक अभिलेखागार, विशेष पत्रिकाओं और प्राथमिक संदर्भ सामग्री तक पहुँच अनिवार्य है — और इन शैक्षणिक संसाधनों को ऑनलाइन माध्यमों से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता। इसके अतिरिक्त, बयान में यह भी उठाया गया कि कई छात्र नई दिल्ली में छात्रावास, किराये के आवास, यात्रा और दैनिक जीवन व्यय का वित्तीय बोझ उठाते हुए भी परिसर में शैक्षणिक वातावरण की उम्मीद कर रहे हैं।
समाजशास्त्र विभाग की प्रतिक्रिया
जेएमआई समाजशास्त्र विभाग के छात्र विषय संघ ने भी प्रथम सेमेस्टर के अंत तक ऑनलाइन कक्षाएँ बढ़ाने के निर्णय को 'पूरी तरह अस्वीकार' कर दिया। बयान में कहा गया, 'यदि छात्र पूरी तरह से ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त करना चाहते थे तो वे दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों का विकल्प चुन सकते थे।' संघ ने यह भी कहा कि विरोध करने वाले छात्र संस्थान के 'शत्रु' नहीं हैं और न ही 'कोई खतरा' हैं।
संघ का तर्क था कि 'संस्थागत अधिकार का प्रयोग इस प्रकार नहीं किया जाना चाहिए जिससे जवाबदेही की माँग करने वाले व्यापक छात्र समुदाय को प्रभावी रूप से दंडित किया जाए।' इसके साथ ही यह भी जोड़ा गया कि यदि प्रदर्शनकारियों की माँगें वैध हैं तो प्रशासन को संवैधानिक मसौदे की समय सीमा तय कर इस विवाद को स्थायी रूप से सुलझाना चाहिए।
आगे का रास्ता
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस बहिष्कार पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक परिसर में सामान्य शैक्षणिक गतिविधियाँ और प्रवेश बहाल नहीं होता, बहिष्कार जारी रहेगा। गौरतलब है कि यह विवाद तब और जटिल हो गया है जब कैंपस-स्तरीय छात्र आंदोलन अपने 18वें दिन में है और दोनों पक्षों के बीच संवाद की कोई ठोस पहल अभी तक सामने नहीं आई है।