करवा चौथ 2026: देशभर में महिलाओं ने रखा व्रत, दिल्ली-राजस्थान-पंजाब में उत्सव की धूम
सारांश
मुख्य बातें
29 अक्टूबर 2026 को करवा चौथ का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। नई दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश और झारखंड सहित अनेक राज्यों में महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु और स्वास्थ्य की कामना के लिए निर्जला व्रत रखकर पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस वर्ष त्योहार में उत्साह पहले से कहीं अधिक दिखा, बाज़ारों में खरीदारी का ज़बरदस्त रुझान रहा।
दिल्ली और प्रमुख शहरों में उत्सव का माहौल
नई दिल्ली के चांदनी चौक बाज़ार में करवा चौथ की पूर्व संध्या से ही असाधारण चहल-पहल दर्ज की गई। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी पूजा सामग्री की खरीदारी करती नज़र आईं। पंजाब के मोहाली में भी बाज़ार गुलज़ार रहे; महिलाओं ने त्योहार के लिए पूरी तैयारी के साथ खरीदारी की। यह त्योहार केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि इसमें पतियों का सक्रिय सहयोग भी देखने को मिला।
चाँद उगने का समय और विशेषज्ञ की सलाह
ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ मान्या के अनुसार करवा चौथ का चाँद रात 8 बजकर 17 मिनट पर निकलने की उम्मीद है। उन्होंने बादल छाए रहने की स्थिति में महिलाओं को सुझाव दिया कि वे निर्धारित समय के अनुसार विधि-विधान से ही व्रत खोलें। उन्होंने यह भी बताया कि जो महिलाएं अपने जीवनसाथी से दूर हैं, वे फोटो या वीडियो कॉल के माध्यम से व्रत खोल सकती हैं।
राजस्थान और मध्य प्रदेश में विशेष आयोजन
राजस्थान के अजमेर में ऋषि घाटी स्थित 150 वर्ष पुराने चौथ माता मंदिर में बड़ी संख्या में महिलाएं पहुँचीं और पतियों की दीर्घायु, वैवाहिक सुख तथा पारिवारिक खुशहाली के लिए आशीर्वाद माँगा। बीकानेर से लेकर राजगढ़ (मध्य प्रदेश) तक बाज़ारों में महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
मध्य प्रदेश के गुना में पारंपरिक और डिज़ाइनर करवों की भारी माँग रही। बाज़ार में ₹20 से ₹100 तक के डिज़ाइनर करवे और ₹150 से ₹500 तक के सजावटी पूजा सेट सबसे अधिक बिके। सजाई गई छलनियाँ, पूजा की थालियाँ और श्रृंगार सामग्री भी महिलाओं की पहली पसंद रहीं।
झारखंड और पंजाब में परंपरा का निर्वाह
झारखंड के जमशेदपुर में आर्य समाज ने भी करवा चौथ को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। महिलाओं ने दिनभर व्रत रखा और पारंपरिक रस्में निभाईं। पंजाब के कपूरथला में महिलाएं श्री सत्य नारायण मंदिर में एकत्रित हुईं, जहाँ उन्होंने व्रत की पारंपरिक कथा सुनी और रस्में पूरी कीं।
भरतपुर में विशेष परिस्थितियों में भी व्रत
राजस्थान के भरतपुर में एक घर-आश्रम में रह रही 150 से अधिक महिलाओं ने पारिवारिक अलगाव और पुनर्मिलन की अनिश्चितता के बावजूद अपने पतियों की सलामती के लिए करवा चौथ का व्रत रखा। यह दृश्य पर्व की भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करता है। गौरतलब है कि करवा चौथ केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं रहा — अब यह देशभर के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में समान उत्साह से मनाया जाने लगा है। आने वाले वर्षों में इस पर्व की व्यापकता और बढ़ने की संभावना है।