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क्या कुंवारी कन्याएं करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं अपने मनचाहे जीवनसाथी के लिए?

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क्या कुंवारी कन्याएं करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं अपने मनचाहे जीवनसाथी के लिए?

सारांश

करवा चौथ का त्योहार भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह विवाहित महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि कुंवारी कन्याओं के लिए भी शुभ है। जानें कैसे यह व्रत उनकी मनोकामनाओं को पूरा कर सकता है।

मुख्य बातें

करवा चौथ का पर्व भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कुंवारी कन्याएं भी इस व्रत का पालन कर सकती हैं।
इस व्रत से जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना की जाती है।
महिलाएं इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोलती हैं।
धार्मिक नियमों का पालन करना आवश्यक है।

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। करवा चौथ का त्योहार भारतीय संस्कृति में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। मुख्य रूप से यह व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन के लिए किया जाता है। लेकिन आजकल, केवल विवाहित महिलाएं ही नहीं, बल्कि कई कुंवारी कन्याएं भी इस व्रत का पालन करती हैं। वे इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और करवा माता की पूजा करके अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना करती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुंवारी लड़कियों के लिए करवा चौथ का व्रत रखने में कोई रोक नहीं है, और उन्हें भी इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस प्रकार, इस पर्व का महत्व केवल पति की लंबी उम्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विवाहित और अविवाहित दोनों के लिए आशीर्वाद का प्रतीक है।

इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं। सुहागिन महिलाएं अपने पति की खुशी और स्वास्थ्य की कामना करती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा करती हैं। उनका मानना है कि इस पूजा से उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलेगा। इस दिन कुंवारी लड़कियां पारंपरिक सोलह श्रृंगार नहीं करतीं, लेकिन वे नए और साफ कपड़े पहनकर इस व्रत की पवित्रता बनाए रखती हैं।

करवा चौथ की रात को चंद्रमा का उदय इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इस बार चंद्रमा रात 8 बजकर 13 मिनट पर निकलेगा, और तभी महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोल सकेंगी।

व्रत की परंपराओं में कुछ अंतर होते हैं। सुहागिन महिलाएं छलनी के माध्यम से चंद्रमा को देखकर अपने पति का चेहरा देखकर व्रत खोलती हैं, जबकि कुंवारी लड़कियां तारों को देखकर अपना व्रत खोलती हैं। हालाँकि, वे भी चंद्रमा को अर्घ्य दे सकती हैं।

इसके अतिरिक्त, कुंवारी लड़कियों के लिए सरगी की कोई खास रस्म नहीं होती, जो कि विवाहित महिलाओं के लिए होती है। साथ ही, व्रत के दौरान कुंवारी लड़कियां दिन में एक बार फलाहार या पानी ले सकती हैं।

धार्मिक नियमों के अनुसार, इस दिन तामसिक और अशुद्ध वस्तुओं से दूर रहना चाहिए ताकि व्रत सफलतापूर्वक पूरा हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कुंवारी कन्याओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह एक सकारात्मक संकेत है कि भारतीय संस्कृति में विवाह की महत्ता को सभी आयु वर्गों की महिलाएं मानती हैं।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कुंवारी कन्याएं करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं?
जी हां, कुंवारी कन्याएं भी इस व्रत का पालन कर सकती हैं और अपनी मनोकामनाओं के लिए पूजा कर सकती हैं।
करवा चौथ का व्रत कब मनाया जाता है?
यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।
क्या इस दिन उपवास अनिवार्य है?
इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं, लेकिन कुंवारी लड़कियां फलाहार या पानी ले सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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