योगी सरकार में चकबंदी विभाग: 8 वर्षों में 1,544 पदोन्नतियाँ, बैकलॉग पूरी तरह समाप्त
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कार्यकाल में चकबंदी विभाग ने विभागीय मानव संसाधन को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। चकबंदी निदेशालय के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 से 2025 के बीच कुल 1,544 पदोन्नतियाँ की गईं और विभाग में वर्षों से लंबित पदोन्नति का बैकलॉग पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। इसके साथ ही पुराने गाँवों की चकबंदी प्रक्रिया को भी सुनियोजित और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया है।
पदोन्नति का ब्यौरा
चकबंदी निदेशालय के मुताबिक, वर्ष 2017 में विभाग में मात्र 67 पदोन्नतियाँ दर्ज थीं। इसके विपरीत, वर्ष 2025 तक यह आँकड़ा बढ़कर 1,544 हो गया। इन पदोन्नतियों में विभिन्न स्तरों के कर्मचारी और अधिकारी शामिल हैं।
विस्तृत विवरण के अनुसार, 1,025 चकबंदी लेखपाल, 344 चकबंदीकर्ता, 97 सहायक चकबंदी अधिकारी, 64 चकबंदी अधिकारी, 11 बंदोबस्त अधिकारी, 2 उप संचालक चकबंदी और 1 संयुक्त संचालक चकबंदी को पदोन्नति का लाभ मिला है।
पुराने गाँवों की चकबंदी में प्रगति
चकबंदी निदेशालय ने पुराने गाँवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कराने के लिए समयबद्ध कार्यप्रणाली अपनाई है। वर्ष 2017 में पाँच वर्ष से कम अवधि वाली श्रेणी में 2,468 गाँव, पाँच से दस वर्ष की श्रेणी में 861 गाँव और दस वर्ष से अधिक अवधि वाली श्रेणी में 1,166 गाँव दर्ज थे।
वर्ष 2025 तक ये संख्याएँ क्रमशः 1,132, 680 और 586 रह गई हैं। गौरतलब है कि दस वर्ष से अधिक पुरानी चकबंदी की श्रेणी में 580 गाँवों की कमी दर्ज की गई — जो इस दिशा में सबसे उल्लेखनीय सुधार है।
विभागीय सुदृढ़ीकरण पर जोर
योगी सरकार का स्पष्ट जोर विभाग के मानव संसाधन को सशक्त करने पर रहा है। निदेशालय के अनुसार, पदोन्नतियों के माध्यम से न केवल लंबित बैकलॉग समाप्त किया गया, बल्कि विभिन्न स्तरों पर कार्यकुशलता बढ़ाने का भी प्रयास किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार चकबंदी प्रक्रिया में तेज़ी लाने और किसानों को उनकी भूमि का सुव्यवस्थित आवंटन सुनिश्चित करने पर बल दे रही है।
आगे की राह
चकबंदी निदेशालय ने संकेत दिया है कि शेष गाँवों की चकबंदी प्रक्रिया को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा। विभागीय ढाँचे को और मजबूत करने तथा पदोन्नति की निरंतरता बनाए रखने की दिशा में भी काम जारी रहेगा, ताकि प्रदेश में भूमि-प्रबंधन व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सके।