29 अक्टूबर 2026
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केरल विधायकों के वेतन में 40% बढ़ोतरी; BJP के राजीव चंद्रशेखर ने बढ़ा वेतन लेने से किया इनकार

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केरल विधायकों के वेतन में 40% बढ़ोतरी; BJP के राजीव चंद्रशेखर ने बढ़ा वेतन लेने से किया इनकार

सारांश

केरल विधानसभा ने विधायकों का वेतन ₹70,000 से ₹98,000 और मंत्रियों का ₹1.33 लाख करने का विधेयक सर्वसम्मति से पारित किया — लेकिन BJP विधायक राजीव चंद्रशेखर ने बढ़ा वेतन लेने से इनकार कर दिया और सवाल उठाया कि जब आशा कार्यकर्ता और नौकरी अभ्यर्थी इंतजार में हैं तो यह बढ़ोतरी क्यों।

मुख्य बातें

केरल विधानसभा ने 29 अक्टूबर 2026 को मंत्रियों और विधायकों के वेतन में 40% वृद्धि का विधेयक सर्वसम्मति से पारित किया।
विधायकों का मासिक वेतन-भत्ता ₹70,000 से बढ़कर ₹98,000 ; मंत्रियों का ₹1 लाख से ₹1.33 लाख हुआ।
यह 2018 के बाद पहली वेतन वृद्धि है; 2022 में राज्य की वित्तीय स्थिति का हवाला देकर संशोधन टाला गया था।
BJP विधायक राजीव चंद्रशेखर ने बढ़ा हुआ वेतन-भत्ता अस्वीकार कर दिया; कहा — पूरी राशि नेमोम के गरीब लोगों के कल्याण पर खर्च होगी।
पूर्व विधायकों की न्यूनतम पेंशन ₹8,000 से बढ़ाकर ₹10,000 की गई।
विधेयक पारित होते ही विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित।

केरल विधानसभा ने 29 अक्टूबर 2026 को मंत्रियों और विधायकों के वेतन एवं भत्तों में 40 प्रतिशत की वृद्धि करने वाला विधेयक सर्वसम्मति से पारित कर दिया। नए प्रावधानों के तहत विधायकों का कुल मासिक वेतन और भत्ता ₹70,000 से बढ़ाकर ₹98,000 कर दिया गया है। इस निर्णय के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेमोम निर्वाचन क्षेत्र से विधायक राजीव चंद्रशेखर ने बयान जारी कर राज्य की खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए बढ़ा हुआ वेतन और भत्ता स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया।

वेतन वृद्धि में क्या-क्या शामिल है

संशोधित प्रावधानों के अनुसार, विधायकों का कुल मासिक पारिश्रमिक ₹70,000 से बढ़कर ₹98,000 हो जाएगा, जबकि मंत्रियों का मासिक वेतन ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹1.33 लाख कर दिया गया है। इसके अलावा, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता ₹25,000 से बढ़ाकर ₹35,000, यात्रा भत्ता ₹20,000 से बढ़ाकर ₹30,000 प्रतिमाह और वार्षिक हवाई यात्रा भत्ता ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है।

पूर्व विधायकों की न्यूनतम मासिक पेंशन भी ₹8,000 से बढ़ाकर ₹10,000 की गई है। साथ ही, 70 और 80 वर्ष की आयु पूरी करने पर पूर्व विधायकों को अतिरिक्त मासिक पेंशन लाभ भी मिलेगा।

2018 के बाद पहली बार संशोधन

यह वेतन और भत्तों में 2018 के बाद पहली बार की गई बढ़ोतरी है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 2022 में केरल की खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए वेतन संशोधन का प्रस्ताव टाल दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य अभी भी राजकोषीय दबाव में है और कई सरकारी कर्मचारी संवर्गों की वेतन संबंधी मांगें लंबित हैं।

विधानसभा अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने कहा कि कई विधायकों ने बढ़ते खर्चों के कारण होने वाली कठिनाइयों की जानकारी दी थी। उन्होंने बिना किसी मतभेद के विधेयक पारित होने पर सदस्यों को बधाई दी और प्रत्येक विधायक को एक अतिरिक्त निजी सहायक उपलब्ध कराने की माँग भी उठाई। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने इस प्रस्ताव पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।

राजीव चंद्रशेखर का विरोध और सवाल

विधेयक पारित होने के तुरंत बाद BJP विधायक राजीव चंद्रशेखर ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि राज्य की खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए वह बढ़ा हुआ वेतन और भत्ता स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विधायक के रूप में मिलने वाला उनका पूरा वेतन और भत्ता नेमोम क्षेत्र के गरीब लोगों के कल्याण पर खर्च किया जाएगा।

चंद्रशेखर ने सवाल उठाया कि जब आशा कार्यकर्ता और लोक सेवा आयोग के नौकरी अभ्यर्थी अभी भी अपनी मांगों के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं, तब सरकार मंत्रियों और विधायकों के वेतन में बढ़ोतरी कैसे कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के हितों के खिलाफ नीतियाँ अपनाने के मामले में पिछली पिनाराई विजयन सरकार और वर्तमान वीडी सतीशन सरकार के बीच कोई अंतर नहीं है।

आम जनता और विपक्ष पर असर

यह निर्णय केरल में एक राजनीतिक बहस को जन्म दे सकता है, विशेषकर जब राज्य सरकारी कर्मचारियों की बकाया माँगें और सार्वजनिक सेवा क्षेत्र की कठिनाइयाँ बनी हुई हैं। आलोचकों का कहना है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ने एकजुट होकर विधेयक पारित किया, जो दर्शाता है कि विधायकों के व्यक्तिगत आर्थिक हित दलगत मतभेदों से ऊपर रहे।

विधेयक पारित होने के तुरंत बाद केरल विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। अब देखना यह होगा कि चंद्रशेखर का यह प्रतीकात्मक विरोध अन्य विधायकों पर कोई दबाव बनाता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह दिखाता है कि जन-प्रतिनिधित्व के नाम पर चुनी गई विधानसभाएँ अपने स्वयं के वेतन मामले में कितनी एकजुट होती हैं। राजीव चंद्रशेखर का इनकार प्रतीकात्मक है, परन्तु यह उस बड़े सवाल को उजागर करता है जो मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूक जाती है — क्या राज्य सरकार ने वेतन वृद्धि से पहले आशा कार्यकर्ताओं और लोक सेवा अभ्यर्थियों की लंबित माँगों का कोई रोडमैप भी पेश किया? केरल पहले से ही राजकोषीय दबाव में है और 2022 में इसी कारण वेतन संशोधन टाला गया था — अब उस दबाव के स्पष्ट समाधान के बिना यह बढ़ोतरी जनभावना के खिलाफ जा सकती है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में विधायकों के वेतन में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
केरल विधानसभा ने 29 अक्टूबर 2026 को पारित विधेयक के तहत विधायकों का कुल मासिक वेतन-भत्ता ₹70,000 से बढ़ाकर ₹98,000 कर दिया है, जो लगभग 40% की वृद्धि है। मंत्रियों का वेतन ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹1.33 लाख किया गया है।
राजीव चंद्रशेखर ने बढ़ा हुआ वेतन लेने से क्यों मना किया?
BJP विधायक राजीव चंद्रशेखर ने केरल की खराब आर्थिक स्थिति और आशा कार्यकर्ताओं तथा लोक सेवा आयोग अभ्यर्थियों की लंबित माँगों का हवाला देते हुए बढ़ा वेतन अस्वीकार किया। उन्होंने कहा कि उनका पूरा वेतन और भत्ता नेमोम निर्वाचन क्षेत्र के गरीब लोगों पर खर्च होगा।
केरल में आखिरी बार विधायकों का वेतन कब बढ़ा था?
यह 2018 के बाद पहली बार वेतन वृद्धि की गई है। 2022 में राज्य सरकार ने केरल की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए वेतन संशोधन का प्रस्ताव टाल दिया था।
केरल में पूर्व विधायकों की पेंशन में क्या बदलाव हुआ?
पूर्व विधायकों की न्यूनतम मासिक पेंशन ₹8,000 से बढ़ाकर ₹10,000 कर दी गई है। इसके अलावा 70 और 80 वर्ष की आयु पूरी करने पर उन्हें अतिरिक्त मासिक पेंशन लाभ भी मिलेगा।
केरल विधायक वेतन वृद्धि विधेयक पर सभी दलों की क्या स्थिति रही?
विधेयक को विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के समर्थन से बिना किसी मतभेद के सर्वसम्मति से पारित किया गया। एकमात्र विरोध BJP विधायक राजीव चंद्रशेखर का था, जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से बढ़ा वेतन न लेने की घोषणा की।
राष्ट्र प्रेस
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