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भाजपा के विरोध पर उमर अब्दुल्ला का यू-टर्न: CM-मंत्रियों के वेतन और विधायक भत्ता बढ़ाने वाले तीनों बिल वापस

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भाजपा के विरोध पर उमर अब्दुल्ला का यू-टर्न: CM-मंत्रियों के वेतन और विधायक भत्ता बढ़ाने वाले तीनों बिल वापस

सारांश

भाजपा के विरोध के आगे झुकते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने CM-मंत्री वेतन और विधायक भत्ता बढ़ाने वाले तीनों बिल एक ही दिन में वापस ले लिए — और साथ ही भाजपा पर राजनीति का आरोप भी जड़ दिया।

मुख्य बातें

उमर अब्दुल्ला ने 29 सितंबर को भाजपा के विरोध के बाद तीन विधेयक वापस लिए।
प्रस्तावित बढ़ोतरी: CM वेतन ₹70,000 से ₹95,000 , मंत्री वेतन ₹65,000 से ₹85,000 और विधायक भत्ता ₹1.30 लाख से ₹1.65 लाख प्रति माह।
उमर ने दावा किया कि भाजपा के एक विधायक ने पहले भत्ते बढ़ाने का अनुरोध किया था।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अगले दिन नए विधेयक लाए जाएंगे।
भाजपा इसी सत्र में राज्य दर्जा बहाली प्रस्ताव का भी विरोध कर रही है, यह कहते हुए कि इसे अनुच्छेद 370 से जोड़ा गया है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 29 सितंबर को विधानसभा के शरदकालीन सत्र में मुख्यमंत्री व मंत्रियों के वेतन और विधायकों के भत्तों में बढ़ोतरी से जुड़े तीन विधेयक वापस ले लिए। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कड़े विरोध के बाद उठाया गया यह कदम जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पहले से तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल को और उजागर करता है।

कौन से विधेयक पेश हुए थे

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार, 28 सितंबर को ये तीनों विधेयक सदन में पेश किए थे। कानून, न्याय और संसदीय कार्य विभाग का प्रभार भी संभालने वाले उमर ने प्रस्ताव रखा था कि मुख्यमंत्री का मासिक वेतन ₹70,000 से बढ़ाकर ₹95,000 और मंत्री का वेतन ₹65,000 से बढ़ाकर ₹85,000 प्रति माह किया जाए।

इसके अतिरिक्त, विधायकों के भत्तों को ₹1.30 लाख से बढ़ाकर ₹1.65 लाख प्रति माह करने का प्रस्ताव भी इन विधेयकों में शामिल था।

भाजपा का विरोध और उमर का पलटवार

भाजपा ने इन विधेयकों का खुलकर विरोध किया, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने मंगलवार को सदन में तीनों बिल वापस लेने की घोषणा की। विधेयक वापस लेते हुए उमर ने कहा, 'मैं हमेशा से मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों के वेतन और विधायकों के भत्तों में वृद्धि के खिलाफ रहा हूं।'

उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा के एक विधायक ने उन्हें पत्र लिखकर विधायक भत्ते बढ़ाने का अनुरोध किया था। उमर ने कहा, 'अब वे इन विधेयकों का विरोध करके राजनीति कर रहे हैं। जब वे सत्ता में थे, तब उन्होंने दिहाड़ी मजदूरों के लिए कुछ नहीं किया।'

उमर का स्पष्ट रुख और आगे की योजना

मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि उनका सिद्धांत रहा है — यदि एक भी विधायक इन बढ़ोतरियों का विरोध करे, तो वे इन्हें लागू नहीं करेंगे। उन्होंने घोषणा की कि अगले दिन नए विधेयक लाए जाएंगे।

गौरतलब है कि यह शरदकालीन सत्र उसी दिन समाप्त होना था, जिससे किसी भी नए विधेयक को पारित करने की समय-सीमा अत्यंत सीमित रह गई।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भाजपा विधानसभा के इसी सत्र में राष्ट्रीय परिषद के प्रस्ताव का भी कड़ा विरोध कर रही है। भाजपा का आरोप है कि राज्य का दर्जा बहाल करने वाले प्रस्ताव को इस तरह तैयार किया गया है कि वह अनुच्छेद 370 की बहाली और जम्मू-कश्मीर को स्वायत्तता देने से जुड़ जाता है।

भाजपा ने स्पष्ट किया कि यदि प्रस्ताव केवल राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित होता, तो वह उसका समर्थन करती। इस प्रकार वेतन-भत्ते विवाद और राज्य दर्जे के प्रस्ताव पर टकराव — दोनों मिलकर सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा के बीच गहरी खाई को रेखांकित करते हैं।

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने संकेत दिया है कि नए विधेयक लाए जाएंगे, हालांकि उनका स्वरूप और समय-सीमा अभी स्पष्ट नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रकरण जम्मू-कश्मीर में विधायी प्रक्रिया और विपक्षी दबाव के बीच के नाजुक संतुलन को उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली तस्वीर अधिक जटिल है — खुद भाजपा के एक विधायक ने भत्ते बढ़ाने की माँग की थी, और अब वही पार्टी इसका विरोध कर रही है। यह विरोधाभास दर्शाता है कि जम्मू-कश्मीर में विधायी बहस अक्सर नीति से ज़्यादा राजनीतिक स्थिति-निर्माण पर केंद्रित रहती है। साथ ही, राज्य दर्जे के प्रस्ताव पर टकराव यह भी संकेत देता है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा के बीच सहयोग की कोई भी संभावना फिलहाल दूर है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि यह प्रकरण जम्मू-कश्मीर की नवगठित विधानसभा की परिपक्वता और सत्ता-विपक्ष के बीच कार्यकारी जवाबदेही की परीक्षा भी है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमर अब्दुल्ला ने कौन से तीन विधेयक वापस लिए?
उमर अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री के वेतन, मंत्रियों के वेतन और विधायकों के भत्तों में वृद्धि से संबंधित तीन विधेयक वापस लिए। ये विधेयक सोमवार 28 सितंबर को पेश किए गए थे और मंगलवार को भाजपा के विरोध के बाद वापस ले लिए गए।
प्रस्तावित वेतन और भत्तों में कितनी बढ़ोतरी की जानी थी?
प्रस्ताव के अनुसार मुख्यमंत्री का मासिक वेतन ₹70,000 से बढ़ाकर ₹95,000, मंत्री का वेतन ₹65,000 से बढ़ाकर ₹85,000 और विधायकों का भत्ता ₹1.30 लाख से बढ़ाकर ₹1.65 लाख प्रति माह किया जाना था।
भाजपा ने इन विधेयकों का विरोध क्यों किया?
भाजपा ने इन विधेयकों का विरोध किया, हालांकि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दावा किया कि भाजपा के एक विधायक ने पहले उन्हें पत्र लिखकर भत्ते बढ़ाने का अनुरोध किया था। उमर ने इसे राजनीति करार दिया।
क्या नए विधेयक लाए जाएंगे?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सदन में घोषणा की कि अगले दिन नए विधेयक लाए जाएंगे। हालांकि, शरदकालीन सत्र उसी दिन समाप्त होना था, इसलिए नए विधेयकों का स्वरूप और समय-सीमा अभी स्पष्ट नहीं है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरदकालीन सत्र में और क्या विवाद रहा?
इसी सत्र में भाजपा ने राज्य का दर्जा बहाल करने वाले प्रस्ताव का भी विरोध किया। भाजपा का कहना है कि प्रस्ताव को इस तरह तैयार किया गया है कि यह अनुच्छेद 370 की बहाली और जम्मू-कश्मीर को स्वायत्तता देने से जुड़ जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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