जम्मू-कश्मीर विधानसभा ऑटम सेशन: BJP का उमर सरकार के खिलाफ हंगामा, बिजली दरों-NHM कर्मियों का मुद्दा गूंजा
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर विधानसभा का ऑटम सेशन 2026 सोमवार, 21 सितंबर को जबरदस्त हंगामे के साथ शुरू हुआ, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ सदन के भीतर ही प्रदर्शन किया और अधूरे वादों को लेकर जोरदार नारेबाजी की। पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक ने सदन की कार्यवाही बाधित कर दी।
मुख्य घटनाक्रम
विपक्षी BJP विधायकों ने हाथों में प्लेकार्ड लेकर बिजली की बढ़ी हुई दरों को वापस लेने, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारियों को न्याय दिलाने और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरा। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य के दर्जे की माँग और केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर पहले से ही राजनीतिक तनाव बना हुआ है। गौरतलब है कि यह विधानसभा जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद निर्वाचित पहली सरकार का हिस्सा है।
नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा का हमला
BJP नेता और नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने सदन स्थगन के बाद मीडिया से बात करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने बड़े वादे करके लोगों की उम्मीदें जगाई थीं, लेकिन दो साल बाद भी सरकार की ओर से केवल यही सुनने को मिलता है कि 'हमारे पास अधिकार नहीं है, हम कुछ कर नहीं सकते।'
शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार मूलभूत सुविधाएँ मुहैया कराने में विफल रही है — बिजली पूरी देने के बजाय बिजली दरें बढ़ा दी गई हैं, पानी की आपूर्ति अधूरी है और भ्रष्टाचार का बोलबाला है। उन्होंने कहा, 'डेलीवेजर सड़कों पर हैं, NHM कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं, आशा वर्कर और आंगनबाड़ी वर्कर गुहार लगा रहे हैं।'
आउटसोर्सिंग पर गंभीर आरोप
शर्मा ने आउटसोर्सिंग के मुद्दे पर विशेष रूप से तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरियाँ देने के बजाय उमर अब्दुल्ला ने आउटसोर्सिंग के नाम पर कालाबाजारी शुरू की है, जिसमें कथित तौर पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के रिश्तेदार पैसे लेकर नौकरियाँ बाँट रहे हैं। उन्होंने माँग की कि आउटसोर्सिंग में पारदर्शिता लाई जाए और एक स्पष्ट भर्ती प्रक्रिया व मानदंड तय किए जाएँ।
शर्मा ने यह भी दावा किया कि 25 हजार नौकरियाँ 'आउट ऑफ वैकेंसी' देकर सदन को गुमराह किया गया है और आने वाले दिनों में इन पदों के लिए विज्ञापन कभी जारी नहीं होंगे क्योंकि ये पद पहले ही भर दिए गए हैं। ये आरोप गंभीर हैं, हालाँकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक खंडन सामने नहीं आया है।
सरकार समर्थक दलों की प्रतिक्रिया
कांग्रेस विधायक तारिक हमीद कर्रा ने BJP के प्रदर्शन को 'ड्रामा' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP ने जानबूझकर सदन का माहौल बिगाड़ा ताकि असली मुद्दे — जैसे युवाओं के आरक्षण का सवाल और इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड — सदन में न उठ सकें।
पीडीपी (Peoples Democratic Party) विधायक आगा सैयद मुंतजिर मेहदी ने भी BJP पर निशाना साधा और कहा कि विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य दूसरे ज़रूरी मुद्दों से ध्यान भटकाना था।
आगे क्या
ऑटम सेशन के पहले दिन का यह हंगामा संकेत देता है कि आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही और अधिक गर्म रह सकती है। NHM कर्मचारियों की माँगें, बेरोजगारी और बिजली दरें जैसे मुद्दे विपक्ष की प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर हैं। इस सत्र में सरकार की जवाबदेही को लेकर बहस तेज होने की पूरी संभावना है।