जम्मू-कश्मीर में बिजली दरें बढ़ाईं तो भड़की BJP, जसरोटिया ने उमर सरकार से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता अभिजीत जसरोटिया ने 25 अगस्त को जम्मू में तीन मुद्दों पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार को कड़े सवालों के घेरे में ले लिया — 1 सितंबर से लागू होने वाली नई बिजली दरें, 1998 के वंधामा हत्याकांड की पुनर्जांच, और पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय के दोबारा बनाए जाने की रिपोर्टें। जसरोटिया ने हाथ में बल्ब थामकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया और माँग की कि बिजली टैरिफ बढ़ोतरी को तत्काल वापस लिया जाए।
बिजली टैरिफ विवाद: सेवा नहीं, बोझ क्यों?
जसरोटिया ने कहा कि थॉमस अल्वा एडिसन ने 1879 में बल्ब का आविष्कार किया था, फिर भी जम्मू-कश्मीर के कई गाँवों में लोगों ने करीब डेढ़ सौ साल बाद पहली बार बिजली देखी। उनके अनुसार, 5 अगस्त 2019 के बाद ही इन क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे के काम शुरू हो सके जो पहले नहीं हो पाए थे। ऐसे में जिन उपभोक्ताओं को अभी तक पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं मिली, उन पर नई दरों का बोझ डालना उचित नहीं है।
उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के चुनावी घोषणा-पत्र का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। BJP प्रवक्ता ने सरकार से माँग की कि वह बताए कि पूर्व के वादे और वर्तमान टैरिफ बढ़ोतरी के बीच की विरोधाभासी स्थिति को वह कैसे उचित ठहराएगी।
वंधामा हत्याकांड और कश्मीरी हिंदुओं का मुद्दा
जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) द्वारा 1998 के वंधामा हत्याकांड की जाँच दोबारा शुरू किए जाने पर जसरोटिया ने कहा कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जाँच और दोषियों तक पहुँचना ज़रूरी है। उन्होंने नदीमर्ग में कश्मीरी हिंदुओं की हत्या की घटना का भी उल्लेख किया और सवाल उठाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने उस दौर में कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यक सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए।
जसरोटिया ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) और कांग्रेस की पूर्व सरकारों के कार्यकाल में अलगाववादी गतिविधियों से जुड़े कुछ लोगों को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सम्मान दिए जाने से गलत संदेश गया। उन्होंने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं के पलायन और उनके साथ हुई हिंसा के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए और सुरक्षा तंत्र की भूमिका की भी समीक्षा की जानी चाहिए।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के राजनीतिक इतिहास पर हमला
जसरोटिया ने 13 जुलाई 1931 से लेकर 1987 के विधानसभा चुनावों तक के घटनाक्रम का हवाला देते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट (MUF) से जुड़े 1987 के चुनाव विवाद को जम्मू-कश्मीर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जाता है। उनके अनुसार, नेशनल कॉन्फ्रेंस की कथित राजनीतिक भूलों की सूची इतनी लंबी है कि उसे गिनाने में पूरा दिन लग जाए।
बहावलपुर में जैश मुख्यालय और पाकिस्तान की नीति पर प्रहार
पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय के कथित तौर पर दोबारा बनाए जाने की रिपोर्टों पर जसरोटिया ने कहा कि भारत को 'हज़ारों घाव देकर कमज़ोर करने' की नीति पर चलने वाले पाकिस्तान से किसी सकारात्मक बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि आतंकी ढाँचे को संरक्षण देने के पाकिस्तान के प्रयासों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए।
जसरोटिया ने यह भी कहा कि पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (POJK) में आम लोगों के खिलाफ दमन और हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं, और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के जम्मू-कश्मीर दौरे के बाद पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ी है। उन्होंने भरोसा जताया कि सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क हैं और BJP कश्मीरी हिंदुओं के साथ पूरी तरह खड़ी है।
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा गठन के बाद पहली निर्वाचित सरकार और केंद्र के बीच नीतिगत तनाव के संकेत बढ़ते जा रहे हैं। आने वाले हफ्तों में बिजली टैरिफ मुद्दे पर राजनीतिक दबाव और बढ़ने की संभावना है।