छत्तीसगढ़ बिजली दर वृद्धि: मंत्री जायसवाल बोले, 36 पैसे की बढ़ोतरी में सरकार की कोई व्यक्तिगत मंशा नहीं
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मंगलवार, 16 जून को रायपुर में पत्रकारों से बातचीत में बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी का बचाव किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में बिजली दर में मात्र 36 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि हुई है और इसके पीछे राज्य सरकार की कोई व्यक्तिगत मंशा नहीं है।
मंत्री का स्पष्टीकरण
जायसवाल ने कहा, 'वैश्विक स्थिति को देखते हुए हर जगह आर्थिक अस्थिरता का माहौल है। महंगाई बढ़ी है। विद्युत विभाग लागत और उत्पादन के आधार पर दरों का निर्धारण करता है। समय-समय पर दरें घटती-बढ़ती रहती हैं। यह सरकार का कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं है।' मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि बिजली दरों का मूल्यांकन विद्युत नियामक आयोग द्वारा किया जाता है — ठीक उसी तरह जैसे डीजल और पेट्रोल की दरें नियामक आयोग तय करता है।
सरकारी योजनाओं पर असर नहीं
जायसवाल ने जोर देकर कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार अपनी सभी कल्याणकारी योजनाएँ बिना किसी अड़चन के जारी रख रही है और सरकार के पास इन योजनाओं के संचालन के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध है। उनके अनुसार, बिजली दरों में हुई मामूली बढ़ोतरी वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और उत्पादन लागत को ध्यान में रखकर की गई है।
कांग्रेस पर पलटवार
मंत्री ने विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष बहुत हाथ-पैर मार रहा है, लेकिन उसे कोई ठोस मुद्दा नहीं मिल रहा। उन्होंने आरोप लगाया, 'कांग्रेस माहौल खराब करने और नकारात्मक वातावरण बनाने का प्रयास कर रही है। उनके पास कोई मुद्दा नहीं है।' जायसवाल ने यह भी कहा कि कांग्रेस के अपने संगठन और अलग-अलग नेताओं के बयान एक-दूसरे से अलग होते हैं, जो उनकी आंतरिक भ्रम की स्थिति दर्शाते हैं।
कांग्रेस शासनकाल का संदर्भ
मंत्री जायसवाल ने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में उपभोक्ताओं पर भारी-भरकम बिजली बिल थोपे जाते थे। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार ने जो मामूली वृद्धि की है, वह नियामक प्रक्रिया के अनुरूप और पारदर्शी है।
नए शिक्षा सत्र पर शुभकामनाएँ
बिजली दरों के मुद्दे से अलग, स्वास्थ्य मंत्री ने नए शिक्षा सत्र की शुरुआत पर नवप्रवेशी बच्चों को बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक ऐसी मणि है जो धीरे-धीरे चमकती है और जीवन को उज्ज्वल बनाती है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि विपक्ष इस मुद्दे को किस दिशा में ले जाता है और नियामक आयोग की प्रक्रिया पर जनता की क्या प्रतिक्रिया रहती है।