झारखंड में बिजली दरों में वृद्धि पर प्रतुल देवशाह का तीखा सवाल, कहा- यह जनता पर बोझ डालने जैसा है
सारांश
Key Takeaways
- बिजली दरों में 6.12 प्रतिशत की वृद्धि
- शहरी उपभोक्ताओं के लिए नई दर 7.4 रुपए प्रति यूनिट
- ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए नई दर 7.2 रुपए प्रति यूनिट
- 200 यूनिट तक के उपभोक्ता इस वृद्धि से मुक्त
- प्रतुल शाहदेव का 'जनविरोधी' करार
रांची, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड में बिजली दरों में बढ़ोतरी पर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने राज्य सरकार को घेरते हुए इसे 'अवश्यम्भावी' निर्णय करार दिया।
उन्होंने कहा कि महंगाई पहले से ही आसमान छू रही है और इस परिस्थिति में बिजली की कीमत बढ़ाना सामान्य जनता पर एक बड़ा बोझ डालने जैसा है।
प्रतुल शाहदेव ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि विशेषकर ग्रामीण और घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे उनके जीवनयापन की लागत बढ़ेगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने कार्यकाल के आरंभ में कहा था कि कोई भी निर्णय जनता के हित में होना चाहिए, लेकिन यह निर्णय स्पष्ट रूप से जनविरोधी है।
वास्तव में, झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (जेएसईआरसी) ने बिजली दरों में 6.12 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी है, जो 1 अप्रैल से लागू होगी। नई दरों के अनुसार, शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दर 6.85 रुपए से बढ़कर 7.4 रुपए प्रति यूनिट हो जाएगी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 6.7 रुपए से बढ़कर 7.2 रुपए प्रति यूनिट हो जाएगी। हालांकि, सरकार ने राहत की बात करते हुए कहा कि 200 यूनिट तक बिजली का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं और कृषि उपभोक्ताओं पर यह बढ़ोतरी लागू नहीं होगी।
इस बीच, उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अब ममता बनर्जी को रामनवमी और जुलूसों की याद आ रही है क्योंकि उन्हें यह महसूस हो गया है कि बहुसंख्यक हिंदू समुदाय उनकी तुष्टिकरण की राजनीति से असंतुष्ट है।
प्रतुल शाहदेव ने यह भी दावा किया कि इस बार ममता बनर्जी का कार्यकाल समाप्त होने वाला है और राज्य में बदलाव तय है।