झारखंड: भाजपा ने बिजली दरों में वृद्धि के खिलाफ उठाई आवाज, सरकार पर वित्तीय विफलताओं का आरोप

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झारखंड: भाजपा ने बिजली दरों में वृद्धि के खिलाफ उठाई आवाज, सरकार पर वित्तीय विफलताओं का आरोप

सारांश

झारखंड में बिजली दरों में वृद्धि को लेकर भाजपा ने सरकार पर तीखा हमला किया। पार्टी ने इसे जनविरोधी करार देते हुए कहा कि सरकार अपनी वित्तीय विफलताओं का बोझ जनता पर डाल रही है। जानिए इस मुद्दे पर भाजपा के प्रवक्ता का क्या कहना है।

मुख्य बातें

बिजली दरों में वृद्धि: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में दरें बढ़ाई गई हैं।
जनविरोधी निर्णय: भाजपा ने इसे सरकार की वित्तीय विफलता का परिणाम बताया।
भ्रष्टाचार के आरोप: डीएमएफटी फंड के अनियमित उपयोग की बात की गई।
आर्थिक संकट की चेतावनी: भाजपा ने चेतावनी दी है कि यदि यही स्थिति रही तो झारखंड आर्थिक संकट में जा सकता है।
सरकार से मांग: भाजपा ने बिजली की दरों में वृद्धि को वापस लेने की मांग की है।

रांची, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड में बिजली की दरों में वृद्धि के निर्णय पर भाजपा ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला किया है। पार्टी ने इसे जनविरोधी करार देते हुए आरोप लगाया है कि सरकार अपनी वित्तीय विफलताओं का बोझ आम जनता पर डाल रही है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने बुधवार को एक बयान में कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की दर ६.७० रुपये से बढ़ाकर ७.२० रुपये प्रति यूनिट और शहरी क्षेत्रों में ६.८५ रुपये से बढ़ाकर ७.४० रुपये प्रति यूनिट कर दी गई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला आम उपभोक्ताओं के लिए अत्यधिक burdensome साबित होगा।

अजय साह ने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकताएं पूरी तरह से गलत दिशा में जा रही हैं। उनके अनुसार, सरकार के पास मुंबई में झारखंड भवन, मुख्यमंत्री आवास और विधायकों के निवास पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करने के लिए संसाधन हैं, लेकिन आम लोगों को राहत देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन ने पहले एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर भ्रम फैलाया और अब बिजली की दरें बढ़ाकर लोगों को एक और झटका दिया है।

अजय साह ने कहा कि जब जनता राहत की उम्मीद कर रही थी, तब सरकार ने उल्टा बोझ बढ़ाने का निर्णय लिया। उन्होंने राज्य में वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए।

उन्होंने कहा कि डीएमएफटी फंड का उपयोग जनहित के बजाय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार में किया गया है। साथ ही, ऊर्जा विभाग से जुड़ी कथित अवैध निकासी के मामलों का उल्लेख करते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो झारखंड भी आर्थिक संकट की ओर बढ़ सकता है। उनके अनुसार, राज्य सरकार ने आय बढ़ाने के लिए कोई ठोस और पारदर्शी कदम नहीं उठाए हैं और अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। पार्टी ने सरकार से बिजली की दरों में की गई वृद्धि को तुरंत वापस लेने और वित्तीय प्रबंधन में सुधार करने की मांग की है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाजपा ने बिजली दरों में बढ़ोतरी पर क्या कहा?
भाजपा ने इसे जनविरोधी करार दिया और आरोप लगाया कि सरकार अपनी वित्तीय विफलताओं का बोझ जनता पर डाल रही है।
बिजली की दरें कितनी बढ़ाई गई हैं?
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की दर ६.७० रुपये से बढ़ाकर ७.२० रुपये प्रति यूनिट और शहरी क्षेत्रों में ६.८५ रुपये से बढ़ाकर ७.४० रुपये प्रति यूनिट कर दी गई है।
भाजपा का आरोप क्या है?
भाजपा का आरोप है कि सरकार ने आर्थिक बोझ बढ़ाने वाले निर्णय लिए हैं और आम जनता को राहत देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप क्या हैं?
भाजपा ने आरोप लगाया है कि डीएमएफटी फंड का उपयोग जनहित के बजाय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार में किया गया है।
क्या झारखंड आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है?
भाजपा ने चेतावनी दी है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो झारखंड भी आर्थिक संकट की ओर बढ़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस