जम्मू-कश्मीर: जदयू नेता जीएम शाहीन का उमर अब्दुल्ला पर पलटवार, कहा — 'सबूत नहीं, सिर्फ मनगढ़ंत आरोप'
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के जनता दल (यूनाइटेड) नेता जीएम शाहीन ने 12 जुलाई को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर जम्मू-कश्मीर में विधायकों को तोड़कर सरकार गिराने की कोशिश का आरोप लगाया था। शाहीन ने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी सरकार के अधूरे वादों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए बेबुनियाद आरोप गढ़ रहे हैं।
मुख्य आरोप और पलटवार
जदयू नेता जीएम शाहीन ने कहा, 'जहाँ तक विधायकों को खरीदने की बात है, उनके (उमर अब्दुल्ला) पास इस संबंध में कोई सबूत नहीं हैं। उन्होंने बोला कि ₹20 से ₹30 करोड़ का ऑफर दिया गया। लेकिन यकीन मानिए कि अगर भाजपा सच में इस स्थिति में आएगी तो ये विधायक ₹2-3 करोड़ में ही बिकेंगे।' यह बयान राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया का कारण बना।
शाहीन ने मुख्यमंत्री को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'आपने बिना सबूत के मंच पर जाकर बोला है कि भाजपा ने हमारी सरकार और विधायकों को जोड़ने की कोशिश की है।' उन्होंने यह भी सवाल उठाया — 'वह कौन आदमी था जिसके साथ डील हुई, कहाँ पर यह डील हुई, क्या इस बारे में कोई सबूत है?'
भाजपा की मंशा पर जदयू का रुख
शाहीन ने यह भी दावा किया कि यदि भाजपा चाहे तो उसे जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने में एक घंटे से अधिक समय नहीं लगेगा, लेकिन अभी भाजपा का ऐसा कोई इरादा नहीं है। उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक जम्मू-कश्मीर की मौजूदा विधानसभा में शक्ति संतुलन पर एक अप्रत्यक्ष टिप्पणी के रूप में देख रहे हैं।
चुनावी वादों पर सवाल
जदयू नेता ने नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री 200 यूनिट मुफ्त बिजली के वादे पर नहीं बोल रहे हैं। आपने यह नहीं बताया कि स्टेटहुड का क्या हुआ। एक करोड़ नौकरियाँ कहाँ गईं?' शाहीन ने कहा कि मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए उल्टे आरोप लगाना नेशनल कॉन्फ्रेंस की पुरानी रणनीति है और यह दल 70 वर्षों से यही करता आया है।
राजनीतिक संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार और विपक्षी दलों के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना चुनाव का एक प्रमुख मुद्दा था, जिस पर अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप वास्तविक शासन के सवालों को पृष्ठभूमि में धकेल देते हैं।
आगे की स्थिति
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के कार्यालय की ओर से जदयू नेता के इन बयानों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह वाकयुद्ध आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर की राजनीति में और तेज हो सकता है, खासकर तब जब स्टेटहुड और विकास के मुद्दे जनता के बीच अनुत्तरित हैं।