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बिजली दरों में 6.83% बढ़ोतरी के खिलाफ श्रीनगर में पीडीपी और जेकेएपी का विरोध, NC सांसद ने इस्तीफे का संकेत दिया

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बिजली दरों में 6.83% बढ़ोतरी के खिलाफ श्रीनगर में पीडीपी और जेकेएपी का विरोध, NC सांसद ने इस्तीफे का संकेत दिया

सारांश

श्रीनगर में पीडीपी और जेकेएपी ने बिजली दरों में 6.83% बढ़ोतरी के खिलाफ अलग-अलग प्रदर्शन किए। दोनों दलों ने एनसी सरकार पर चुनावी वादे तोड़ने का आरोप लगाया। इस बीच खुद एनसी के सांसद रूहुल्लाह ने लोकसभा से इस्तीफे का संकेत देकर सरकार की मुश्किलें बढ़ा दीं।

मुख्य बातें

पीडीपी और जेकेएपी ने 24 अगस्त को श्रीनगर में बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ अलग-अलग विरोध प्रदर्शन किए।
संयुक्त बिजली विनियामक आयोग ने जेपीडीसीएल और केपीडीसीएल की खुदरा दरों में औसतन 6.83% बढ़ोतरी को मंजूरी दी।
संशोधित बिजली दरें 1 सितंबर 2026 से लागू होनी हैं।
एनसी के असंतुष्ट लोकसभा सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने लोकसभा से इस्तीफे पर विचार करने की बात कही।
दोनों विपक्षी दलों ने सरकार से दर वृद्धि के फैसले पर पुनर्विचार करने की माँग की।

श्रीनगर में 24 अगस्त को पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और पूर्व मंत्री सैयद अल्ताफ बुखारी के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी (जेकेएपी) ने बिजली दरों में हालिया बढ़ोतरी के विरोध में अलग-अलग प्रदर्शन किए। यह विरोध संयुक्त बिजली विनियामक आयोग द्वारा जेपीडीसीएल और केपीडीसीएल के लिए खुदरा बिजली दरों में औसतन 6.83 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दिए जाने के बाद हुआ, जो 1 सितंबर से लागू होनी है।

मुख्य घटनाक्रम

पीडीपी का प्रदर्शन पार्टी मुख्यालय में आयोजित किया गया, जहाँ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बैनर और तख्तियाँ लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) सरकार के विरुद्ध नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया और पूछा कि चुनाव प्रचार के दौरान मुफ्त बिजली का वादा करने के बावजूद दरें क्यों बढ़ाई गईं।

वहीं, रेजीडेंसी रोड स्थित प्रेस एन्क्लेव में जेकेएपी नेता मोहम्मद अशरफ मीर के नेतृत्व में एक अलग प्रदर्शन हुआ। पार्टी कार्यकर्ताओं ने बैनर और तख्तियाँ लेकर बिजली दर संशोधन के विरोध में नारेबाजी की और मुख्यमंत्री के खिलाफ भी आवाज़ उठाई।

विपक्ष की माँग

दोनों दलों ने ओमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार से बिजली दर वृद्धि के फैसले पर पुनर्विचार करने और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न डालने की माँग की। आलोचकों का कहना है कि यह बढ़ोतरी उस चुनावी वादे के सीधे विरुद्ध है, जिसमें मुफ्त बिजली का आश्वासन दिया गया था।

एनसी सांसद की बगावत

इस विवाद को और गहरा करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के असंतुष्ट लोकसभा सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने भी अपनी ही पार्टी की सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने मुफ्त बिजली देने के चुनावी वादे से पीछे हटते हुए पूरे जम्मू-कश्मीर में दरें बढ़ा दी हैं। रूहुल्लाह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह लोकसभा से इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि उनकी पार्टी अपने घोषणापत्र के वादों को पूरा करने में विफल रही है।

बढ़ोतरी का संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में बिजली आपूर्ति और बिलिंग को लेकर आम जनता पहले से ही असंतुष्ट है। गौरतलब है कि संयुक्त बिजली विनियामक आयोग की यह मंजूरी एक नियामकीय प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ गहरे हैं — खासकर तब, जब सत्तारूढ़ दल के अपने सांसद सार्वजनिक रूप से असहमति जता रहे हैं।

क्या होगा आगे

संशोधित दरें 1 सितंबर 2026 से लागू होने वाली हैं। दोनों विपक्षी दलों के आंदोलन तेज़ होने की संभावना है, जबकि रूहुल्लाह के इस्तीफे की संभावित घोषणा एनसी सरकार के लिए एक नई राजनीतिक चुनौती बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजनीतिक रूप से यह एनसी सरकार के लिए स्वयंनिर्मित संकट है — क्योंकि मुफ्त बिजली का वादा चुनाव प्रचार का केंद्रबिंदु था। सबसे उल्लेखनीय पहलू विपक्ष का नहीं, बल्कि खुद एनसी सांसद रूहुल्लाह का विद्रोह है, जो दर्शाता है कि पार्टी के भीतर भी घोषणापत्र और शासन के बीच की खाई को लेकर गहरी बेचैनी है। जम्मू-कश्मीर में जहाँ बिजली आपूर्ति पहले से ही विवादास्पद मुद्दा रहा है, वहाँ यह बढ़ोतरी जनता के भरोसे को और कमज़ोर कर सकती है — और विपक्ष को एक ऐसा मुद्दा दे सकती है जो विधानसभा सत्र तक खिंच सकता है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीनगर में बिजली दरों के खिलाफ प्रदर्शन क्यों हुए?
संयुक्त बिजली विनियामक आयोग ने जेपीडीसीएल और केपीडीसीएल की खुदरा बिजली दरों में औसतन 6.83% बढ़ोतरी को मंजूरी दी, जो 1 सितंबर 2026 से लागू होनी है। पीडीपी और जेकेएपी ने इसे चुनावी वादों का उल्लंघन बताते हुए 24 अगस्त को श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन किए।
NC सांसद रूहुल्लाह ने इस्तीफे का संकेत क्यों दिया?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के लोकसभा सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने कहा कि उनकी पार्टी ने चुनावी घोषणापत्र में मुफ्त बिजली का वादा किया था, जिसे पूरा करने में सरकार विफल रही है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में लोकसभा से इस्तीफे पर विचार करने की बात कही।
नई बिजली दरें कब से लागू होंगी?
संयुक्त बिजली विनियामक आयोग द्वारा अनुमोदित संशोधित खुदरा बिजली दरें 1 सितंबर 2026 से जम्मू-कश्मीर में लागू होने वाली हैं।
पीडीपी और जेकेएपी ने सरकार से क्या माँग की है?
दोनों दलों ने ओमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली एनसी सरकार से बिजली दर वृद्धि के फैसले पर पुनर्विचार करने और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न डालने की माँग की है।
जम्मू-कश्मीर में बिजली वितरण कौन करता है?
जम्मू-कश्मीर में बिजली वितरण जम्मू पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जेपीडीसीएल) और कश्मीर पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केपीडीसीएल) द्वारा किया जाता है, जिनकी दरें संयुक्त बिजली विनियामक आयोग द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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