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श्रीनगर में NC-BJP आमने-सामने: राज्य का दर्जा और बिजली दरों पर दोनों दलों के प्रदर्शन, पुलिस से टकराव

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श्रीनगर में NC-BJP आमने-सामने: राज्य का दर्जा और बिजली दरों पर दोनों दलों के प्रदर्शन, पुलिस से टकराव

सारांश

श्रीनगर में NC और BJP दोनों एक साथ सड़कों पर — एक राज्य के दर्जे और संवैधानिक वादों के लिए, दूसरी बिजली दरों और नौकरियों पर सरकार की विफलता के लिए। दोनों दलों के बीच यह टकराव जम्मू-कश्मीर की राजनीति के गहरे अनसुलझे सवालों को फिर से सामने ला देता है।

मुख्य बातें

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 2 सितंबर को श्रीनगर में BJP मुख्यालय का घेराव किया और राज्य का दर्जा बहाल करने तथा संवैधानिक गारंटियाँ लागू करने की माँग की।
BJP ने लाल चौक से सिविल सचिवालय तक मार्च निकाला; पुलिस ने रोका और कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज का आरोप लगा।
NC के कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
BJP ने NC सरकार पर 25,000 नौकरियाँ ठेकेदारों को देने और बिजली दरें बढ़ाकर गरीबों पर बोझ डालने का आरोप लगाया।
NC नेताओं ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय को दिए वादे के तहत राज्य के दर्जे का तीसरा चरण अभी पूरा नहीं हुआ।
BJP ने कठुआ में भी बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ अलग से धरना दिया।

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में बुधवार, 2 सितंबर को सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक-दूसरे के विरुद्ध सड़कों पर उतरीं। दोनों दलों ने परस्पर वादाखिलाफी के आरोप लगाए और अलग-अलग मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किए, जिनके दौरान पुलिस से टकराव की स्थिति भी बनी और कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।

नेशनल कॉन्फ्रेंस का BJP मुख्यालय घेराव

नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ताओं ने BJP मुख्यालय का घेराव किया और केंद्र सरकार से राज्य का दर्जा बहाल करने, संवैधानिक गारंटियाँ लागू करने, आरक्षण से जुड़ी फाइल को मंजूरी देने तथा जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की माँग की। प्रदर्शन के दौरान NC कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तनाव उत्पन्न हुआ और पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा, 'हम भाजपा हेडक्वार्टर के बाहर शांतिपूर्ण जुलूस निकालना चाहते हैं। हम लोगों को याद दिलाना चाहते हैं कि हम यहाँ मोदी और सुप्रीम कोर्ट के किए गए वादों को पूरा करवाने आए हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के लिए रैशनलाइजेशन की फाइल अभी तक वापस नहीं दी गई है, जो उनके प्रदर्शन का एक प्रमुख कारण है।

विधायक मुजफ्फर हुसैन बेग का बयान

NC विधायक मुजफ्फर हुसैन बेग ने कहा, 'प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के लोगों से वादे किए हैं — सदन में, संसद में। उन वादों को पूरा करना आपकी नैतिक, राजनीतिक और कानूनी जिम्मेदारी है।' बेग ने यह भी रेखांकित किया कि सॉलिसिटर जनरल ने सर्वोच्च न्यायालय को तीन चरणों में प्रक्रिया पूरी करने का भरोसा दिलाया था — सामान्य स्थिति की बहाली, चुनाव और राज्य का दर्जा। उनके अनुसार पहले दो चरण पूरे हो चुके हैं, लेकिन तीसरा — राज्य का दर्जा — अभी तक लंबित है।

NC नेता अजय कुमार मल्होत्रा ने कहा कि यह प्रदर्शन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के जंतर मंतर प्रदर्शन की कड़ी में है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP जाति और धर्म के नाम पर वोट लेती है, लेकिन जनता के मसले हल करने में विफल रही है।

BJP का NC सरकार के खिलाफ विरोध मार्च

दूसरी ओर, BJP ने लाल चौक से सिविल सचिवालय तक विरोध मार्च निकाला, जिसे पुलिस ने बीच रास्ते में रोक दिया। विधानसभा में नेता विपक्ष सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने BJP कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार किया और उन पर लाठियाँ चलाईं। उन्होंने कहा कि पुलिस सत्तारूढ़ सरकार के पक्ष में काम कर रही है।

शर्मा ने NC सरकार पर बिजली दरें बढ़ाकर गरीबों पर बोझ डालने, पंचायती राज चुनाव न कराने की धमकी देने और 25,000 नौकरियाँ ठेकेदारों को देने का आरोप लगाया। उनके अनुसार ये नौकरियाँ ठेकेदार अपने रिश्तेदारों को दे रहे हैं, जबकि जम्मू-कश्मीर का गरीब युवा रोज़गार का इंतजार कर रहा है।

कठुआ में बिजली दरों पर BJP का धरना

BJP ने कठुआ में भी बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी के विरुद्ध अलग से विरोध प्रदर्शन किया। नगरोटा गूजरू के पूर्व DDC सदस्य नारायण दत्त त्रिपाठी ने कहा कि NC के चुनावी घोषणापत्र में 200 यूनिट मुफ्त बिजली और 1 लाख नौकरियाँ देने का वादा था, लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार ने इनमें से एक भी वादा पूरा नहीं किया।

BJP नेता अल्ताफ ठाकुर ने पलटवार करते हुए कहा कि NC अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए प्रदर्शन कर रही है और उसका असली चेहरा जनता के सामने आ चुका है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की राह

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर को अगस्त 2019 में विशेष दर्जे से वंचित कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। तब से राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग जम्मू-कश्मीर की राजनीति का केंद्रीय मुद्दा बनी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली NC सरकार को सत्ता में आए अभी कुछ ही महीने हुए हैं और दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर जनता से किए वादे तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं। यह टकराव आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक विपक्ष का — यह जम्मू-कश्मीर की राजनीति की विचित्र विडंबना को उजागर करता है, जहाँ सत्ता में रहते हुए भी NC केंद्र से लड़ रही है और BJP विपक्ष में रहते हुए भी उस केंद्र सरकार की जवाबदेही से बचती नज़र आती है जिसे वह खुद चलाती है। राज्य के दर्जे का सवाल 2019 से लंबित है और हर चुनाव में वादा बनता है — लेकिन सुप्रीम कोर्ट में दिए आश्वासन के बावजूद तीसरा चरण अधूरा है। मुख्यधारा की कवरेज प्रदर्शन की नाटकीयता पर केंद्रित रहती है, जबकि असली सवाल यह है कि बिना पूर्ण राज्य के दर्जे के उमर अब्दुल्ला सरकार के पास वास्तव में कितनी शक्तियाँ हैं — और जब तक यह अनुत्तरित है, दोनों दल जनता को जवाब देने की बजाय एक-दूसरे पर उँगली उठाते रहेंगे।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीनगर में NC और BJP के प्रदर्शन किस बारे में थे?
2 सितंबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस ने BJP मुख्यालय का घेराव कर राज्य के दर्जे की बहाली, संवैधानिक गारंटियों और आरक्षण फाइल को मंजूरी देने की माँग की। BJP ने NC सरकार के खिलाफ बिजली दरों में बढ़ोतरी, नौकरियों में अनियमितता और पंचायत चुनाव न कराने के मुद्दे पर विरोध मार्च निकाला।
जम्मू-कश्मीर में राज्य के दर्जे की माँग क्यों उठ रही है?
अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर उसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को तीन चरणों में प्रक्रिया पूरी करने का भरोसा दिलाया था — सामान्य स्थिति, चुनाव और राज्य का दर्जा। पहले दो चरण पूरे हो चुके हैं, लेकिन राज्य का दर्जा अभी तक बहाल नहीं हुआ है।
NC नेताओं को पुलिस ने हिरासत में क्यों लिया?
प्रदर्शन के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लिया। NC नेता अजय कुमार मल्होत्रा ने इसकी पुष्टि की।
BJP ने NC सरकार पर कौन-से मुख्य आरोप लगाए?
BJP के नेता विपक्ष सुनील शर्मा ने NC सरकार पर बिजली दरें बढ़ाकर गरीबों पर बोझ डालने, 25,000 नौकरियाँ ठेकेदारों को देने और पंचायती राज चुनाव न कराने की धमकी देने का आरोप लगाया। BJP नेता नारायण दत्त त्रिपाठी ने कहा कि NC के घोषणापत्र में 200 यूनिट मुफ्त बिजली और 1 लाख नौकरियों का वादा था, जो पूरा नहीं हुआ।
क्या यह पहली बार है जब NC और BJP एक साथ एक-दूसरे के खिलाफ सड़कों पर उतरे?
यह घटना जम्मू-कश्मीर की राजनीति में असामान्य नहीं है, लेकिन एक ही दिन दोनों दलों का एक-दूसरे के विरुद्ध एक साथ प्रदर्शन करना राजनीतिक तनाव की तीव्रता को दर्शाता है। NC नेताओं ने इसे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के जंतर मंतर प्रदर्शन की कड़ी बताया।
राष्ट्र प्रेस
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