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आईआरजीसी का दावा: कुवैत, जॉर्डन और इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए हमले, 50+ हताहत

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आईआरजीसी का दावा: कुवैत, जॉर्डन और इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए हमले, 50+ हताहत

सारांश

आईआरजीसी ने एक साथ तीन देशों — कुवैत, जॉर्डन और इराक — में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया है। यह कार्रवाई सिरिक में शादी पर हुए कथित अमेरिकी हमले के जवाब में बताई जा रही है, जिसमें 50 से अधिक लोग हताहत हुए। मध्य-पूर्व में तनाव की नई परत।

मुख्य बातें

आईआरजीसी ने 2 सितंबर को कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस , जॉर्डन के कैंप टिटियन और इराक के एरबिल में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया।
जॉर्डन के कैंप टिटियन पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया; कई हेलीकॉप्टर और सैन्य सुविधाएँ नष्ट होने का दावा।
एरबिल में सर्विलांस बैलून नियंत्रण प्रणाली और तकनीकी उपकरणों के गोदाम ध्वस्त करने का दावा; ईंधन भंडारण में आग लगने की बात कही गई।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि सिरिक के कुहेस्तक में शादी समारोह पर हुए कथित अमेरिकी हमले में 50 से अधिक लोग मारे गए या घायल हुए।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं; अमेरिकी पेंटागन या संबंधित देशों का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने 2 सितंबर को दावा किया कि उसने कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस, जॉर्डन के कैंप टिटियन मरीन बेस और इराक के एरबिल में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं। आईआरजीसी के अनुसार यह कार्रवाई ईरान के सिरिक क्षेत्र में एक शादी समारोह पर हुए कथित अमेरिकी हमले के प्रतिशोध में की गई, जिसमें 50 से अधिक लोग मारे गए या घायल हुए।

मुख्य घटनाक्रम

आईआरजीसी ने दावा किया कि कुवैत के अली अल-सलेम बेस में अमेरिकी कमांडर के आवासीय क्षेत्र और कमांड पोस्ट को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। ईरानी अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, आईआरजीसी ने इसे एक व्यापक खुफिया अभियान का हिस्सा बताया और कहा कि उसके पास क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध है।

ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, जॉर्डन में अकाबा की खाड़ी के निकट स्थित कैंप टिटियन पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। आईआरजीसी का दावा है कि इस हमले में कई सैन्य सुविधाएँ और हेलीकॉप्टर नष्ट हुए तथा अमेरिकी बलों को भारी नुकसान पहुँचा।

इराक में सर्विलांस प्रणाली को नष्ट करने का दावा

आईआरजीसी ने यह भी दावा किया कि उसने इराक के एरबिल में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मौजूद सर्विलांस बैलून नियंत्रण प्रणाली को नष्ट कर दिया। आईआरएनए के अनुसार, आईआरजीसी की जमीनी सेना ने एरबिल ठिकानों पर एक रखरखाव केंद्र और तकनीकी उपकरणों के गोदामों को भी ध्वस्त किया। संगठन ने दावा किया कि इस कार्रवाई में कई अमेरिकी कर्मी मारे गए और ईंधन भंडारण सुविधाओं में आग लग गई — हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

सिरिक शादी हमले पर ईरान की प्रतिक्रिया

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने बुधवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'ईरान के खिलाफ अमेरिका के अत्याचारों की सूची अब पूरी हो गई है। सिरिक के कुहेस्तक इलाके में एक घर पर उस समय हमला किया गया जब परिवार शादी का जश्न मना रहे थे। 50 से अधिक निर्दोष पुरुष, महिलाएँ और बच्चे मारे गए या घायल हुए हैं।' यह बयान ईरान की ओर से अमेरिका पर सीधे आरोप का सबसे स्पष्ट सार्वजनिक बयान है।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान-समर्थित समूहों के हमलों का सिलसिला पिछले कई महीनों से जारी रहा है, परंतु आईआरजीसी द्वारा इतने व्यापक और नामित ठिकानों पर एक साथ हमलों का दावा असाधारण है। कुवैत, जॉर्डन और इराक — तीनों अमेरिकी सहयोगी हैं और इन देशों में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति दीर्घकालिक है।

क्या होगा आगे

अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) और संबंधित देशों की सरकारों की ओर से अभी तक इन दावों पर कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन सामने नहीं आया है। क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया पर नज़र बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न जॉर्डन, न इराक और न ही अमेरिका ने इनकी पुष्टि की है, जो इन्हें युद्ध प्रचार और वास्तविकता के बीच की धुंधली रेखा पर खड़ा करता है। सिरिक शादी हमले का आरोप — जिसे ईरान के विदेश मंत्रालय ने सार्वजनिक रूप से एक्स पर उठाया — कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है। मध्य-पूर्व में एक साथ तीन देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा, यदि आंशिक रूप से भी सच है, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष के एक नए और खतरनाक चरण का संकेत देता है। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि खाड़ी में लाखों भारतीय नागरिक कार्यरत हैं और तेल आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ने की आशंका है।
RashtraPress
10 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआरजीसी ने किन अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया है?
आईआरजीसी ने तीन देशों में हमलों का दावा किया है — कुवैत में अली अल-सलेम एयर बेस, जॉर्डन में अकाबा की खाड़ी के पास स्थित कैंप टिटियन मरीन बेस, और इराक के एरबिल में एक अमेरिकी सर्विलांस और रखरखाव केंद्र। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
ईरान ने यह जवाबी हमला क्यों किया?
आईआरजीसी के अनुसार यह कार्रवाई ईरान के सिरिक क्षेत्र के कुहेस्तक इलाके में एक शादी समारोह पर हुए कथित अमेरिकी हमले के जवाब में की गई। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने दावा किया कि उस हमले में 50 से अधिक निर्दोष लोग मारे गए या घायल हुए।
क्या इन हमलों की पुष्टि हुई है?
नहीं, अभी तक ये सभी दावे केवल आईआरजीसी और ईरानी सरकारी मीडिया के हैं। अमेरिकी पेंटागन, कुवैत, जॉर्डन या इराक की सरकारों ने इन हमलों की न पुष्टि की है और न खंडन किया है।
सिरिक शादी हमले में कितने लोग हताहत हुए?
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई के अनुसार सिरिक के कुहेस्तक में शादी समारोह पर हुए कथित अमेरिकी हमले में 50 से अधिक पुरुष, महिलाएँ और बच्चे मारे गए या घायल हुए। यह आँकड़ा ईरानी पक्ष का है और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।
इस घटनाक्रम का भारत पर क्या असर हो सकता है?
खाड़ी देशों में लाखों भारतीय प्रवासी कार्यरत हैं और भारत की तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। यदि तनाव बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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