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आईआरजीसी का दावा: कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले, कई बेस तबाह

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आईआरजीसी का दावा: कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले, कई बेस तबाह

सारांश

ईरान के आईआरजीसी ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमलों का दावा किया है — कामिकेज ड्रोन से एम्युनिशन डिपो, नौसेना मुख्यालय और लड़ाकू विमानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी ईरान के विरुद्ध लगातार 13वीं रात हमलों की पुष्टि की है।

मुख्य बातें

आईआरजीसी ने कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस पर एडवांस्ड कामिकेज ड्रोन से एम्युनिशन डिपो को पूरी तरह नष्ट करने का दावा किया।
कुवैत के अल-अदिरी कैंप में अमेरिका के तीन हथियार और उपकरण भंडार नष्ट करने का दावा।
बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पाँचवें बेड़े के मुख्यालय की निगरानी मीनार को निशाना बनाया गया।
जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस पर कई अमेरिकी लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुँचने का दावा।
इराक के एरबिल में एक पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट करने का दावा।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के विरुद्ध लगातार 13वीं रात सफल हमलों की पुष्टि की।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने शुक्रवार, 25 जुलाई 2025 को दावा किया कि उसकी सेनाओं ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संसाधनों पर जवाबी हमले किए हैं। आईआरजीसी के अनुसार, ये कार्रवाइयाँ अमेरिका द्वारा ईरान के विरुद्ध किए गए हमलों का प्रत्युत्तर हैं।

कुवैत में हमले के दावे

आईआरजीसी के आधिकारिक समाचार माध्यम के हवाले से बताया गया कि उसकी सेनाओं ने कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस पर मौजूद एक विशाल अमेरिकी एम्युनिशन डिपो को 'एडवांस्ड और अल्ट्रा-हैवी' कामिकेज ड्रोन से निशाना बनाया और उसे कथित तौर पर पूरी तरह नष्ट कर दिया। आईआरजीसी ने यह भी दावा किया कि इस बेस पर अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति वाले स्थानों को लक्षित किया गया, जिसमें कुछ लोगों के हताहत होने की बात कही गई।

इसके अतिरिक्त, आईआरजीसी ने कहा कि कुवैत के अल-अदिरी कैंप में अमेरिका के तीन हथियार और उपकरण भंडारों को भी नष्ट किया गया।

बहरीन और जॉर्डन में कार्रवाई के दावे

आईआरजीसी ने दावा किया कि बहरीन में एक अमेरिकी कंपनी के डेटा सेंटर पर की गई पूर्व सैन्य कार्रवाई को पूरा करते हुए उसकी शेष इमारत को भी ध्वस्त कर दिया गया। साथ ही, बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पाँचवें बेड़े के मुख्यालय की निगरानी मीनार को निशाना बनाया गया, जिससे कथित तौर पर भारी नुकसान हुआ।

जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस पर आईआरजीसी की एयरोस्पेस सेनाओं ने भारी हमले का दावा किया, जिसमें कई अमेरिकी लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुँचने की बात कही गई। बेस पर अमेरिकी सैनिकों के बैरकों को निशाना बनाया गया और कुछ कर्मियों के मारे जाने या घायल होने का दावा किया गया — हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

इराक के एरबिल में भी हमले का दावा

आईआरजीसी ने बताया कि उसकी सेनाओं ने इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र की राजधानी एरबिल में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी अचानक हमला किया। इस कार्रवाई में कथित तौर पर एक पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और एक निगरानी गुब्बारा नष्ट किया गया, तथा अमेरिकी सैनिकों के आवासीय क्षेत्रों को भी लक्षित किया गया।

इसके अलावा, आईआरजीसी ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने गुरुवार रात ईरान के दक्षिण-पूर्वी कहनुज इलाके के ऊपर एक अमेरिकी क्रूज मिसाइल को रोक दिया।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड का पक्ष

दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उसके बलों ने ईरान के विरुद्ध लगातार 13वीं रात भी सफलतापूर्वक हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, उसके बलों ने ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, ड्रोन भंडारण स्थलों, संचार नेटवर्क, तटीय निगरानी केंद्रों और समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाया। कमांड ने कहा कि इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले नागरिक और व्यापारिक जहाजों के लिए ईरान से उत्पन्न खतरे को कम करना था।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान तनाव अपने चरम पर है और दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर हमलों के दावे कर रहे हैं। आईआरजीसी के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। गौरतलब है कि इस संघर्ष का सीधा असर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले वैश्विक तेल व्यापार पर पड़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और गहरी हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी स्वतंत्र पुष्टि का अभाव इन्हें सूचना-युद्ध के दायरे में रखता है — दोनों पक्ष अपनी-अपनी सफलताओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने में रुचि रखते हैं। होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ता तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए सबसे बड़ा जोखिम है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। यदि आईआरजीसी के दावों में आंशिक सच्चाई भी है, तो यह संघर्ष खाड़ी क्षेत्र में एक नए और खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुका है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआरजीसी ने किन-किन देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया है?
आईआरजीसी ने कुवैत, बहरीन, जॉर्डन और इराक के एरबिल में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों का दावा किया है। इनमें अली अल-सलेम एयर बेस, अल-अदिरी कैंप, पाँचवें नौसेना बेड़े का मुख्यालय और अल-अजराक एयर बेस शामिल हैं।
आईआरजीसी ने ये हमले क्यों किए?
आईआरजीसी के अनुसार, ये हमले अमेरिका द्वारा ईरान के विरुद्ध की गई सैन्य कार्रवाइयों का जवाब हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी ईरान के खिलाफ लगातार 13 रातों तक हमलों की पुष्टि की है।
क्या आईआरजीसी के दावों की पुष्टि हुई है?
नहीं, आईआरजीसी के दावों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ये दावे आईआरजीसी के अपने आधिकारिक समाचार माध्यम पर आधारित हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस पर क्या कहा?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि उसके बलों ने ईरान के विरुद्ध लगातार 13वीं रात सफल हमले किए। कमांड ने कहा कि इन हमलों का लक्ष्य होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए ईरान से उत्पन्न खतरे को कम करना था।
इस संघर्ष का वैश्विक असर क्या हो सकता है?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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