ईरान का दावा: जॉर्डन-कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले, IRGC ने ली जिम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 20 जुलाई को दावा किया कि उसकी सेनाओं ने जॉर्डन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य परिसरों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए हैं। IRGC के अनुसार, ये हमले अमेरिका की कथित 'आक्रामक कार्रवाइयों' के जवाब में किए गए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने उसी दिन पुष्टि की कि उसने ईरान के खिलाफ लगातार नौवीं रात सफल अभियान चलाए।
जॉर्डन में हमले का दावा
IRGC ने अपने आधिकारिक प्रचार माध्यम सेपाह न्यूज पर जारी बयान में कहा कि उसकी सेनाओं ने जॉर्डन के बंदरगाह शहर अकाबा स्थित एक हवाई अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। संगठन के अनुसार, इस हमले में बोइंग सी-17 ग्लोबमास्टर III और बोइंग पी-8 पोसीडॉन विमानों को निशाना बनाया गया और उन्हें भारी नुकसान पहुँचाया गया। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकी।
कुवैत में ड्रोन हमले का दावा
IRGC ने यह भी दावा किया कि उसके ड्रोन हमले में कुवैत स्थित एक अमेरिकी प्रारंभिक चेतावनी रडार प्रणाली को 'पूरी तरह नष्ट' कर दिया गया। इसके अतिरिक्त, अली अल सलेम एयर बेस पर विमान उपकरणों और स्पेयर पार्ट्स वाले एक गोदाम तथा एमक्यू-9 रीपर ड्रोन के हैंगर को निशाना बनाया गया, जिसमें कथित तौर पर कई मानवरहित हवाई वाहनों (UAV) में आग लग गई। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने इन दावों को प्रसारित किया।
अमेरिकी CENTCOM का पक्ष
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 20 जुलाई को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा कि उसकी सेनाओं ने ईरान के खिलाफ लगातार नौवीं रात हमले सफलतापूर्वक पूरे किए। CENTCOM के अनुसार, उसके अभियानों में ईरानी सैन्य कमान केंद्रों, वायु रक्षा और तटीय निगरानी ठिकानों, समुद्री क्षमताओं, मिसाइल व ड्रोन लॉन्च साइटों तथा संचार नेटवर्क को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना ने कहा कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक नाविकों पर ईरान की हमले की क्षमता को सीमित करना है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की चेतावनी
IRGC ने एक अलग बयान में चेतावनी दोहराई कि जब तक अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी कथित 'दुर्भावनापूर्ण गतिविधियाँ' जारी रखेगा, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल, गैस और रासायनिक उर्वरकों की आवाजाही सुरक्षित नहीं रहेगी। यह चेतावनी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए गंभीर निहितार्थ रखती है, क्योंकि दुनिया का लगभग एक-पाँचवाँ तेल इसी जलमार्ग से गुजरता है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और दोनों पक्षों के दावे परस्पर विरोधी हैं। गौरतलब है कि IRGC के दावों की स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर सकता है।