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ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के 22 ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए, जॉर्डन में अमेरिकी F-35 बेस भी निशाने पर

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ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के 22 ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए, जॉर्डन में अमेरिकी F-35 बेस भी निशाने पर

सारांश

अप्रैल के युद्धविराम के बाद सबसे बड़ा टकराव — ईरान के IRGC ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में 22 अमेरिकी और संबद्ध ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमलों का दावा किया। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी कार्रवाई और अपाचे हेलीकॉप्टर गिराए जाने के बाद यह जवाबी कदम वैश्विक ऊर्जा मार्गों पर नए खतरे की घंटी है।

मुख्य बातें

IRGC ने 10 जून को जॉर्डन, कुवैत और बहरीन समेत खाड़ी क्षेत्र के 22 ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने का दावा किया।
जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस पर F-35 लड़ाकू विमानों के ठिकाने और अमेरिकी कमांड सेंटर को लंबी दूरी की मिसाइलों से निशाना बनाने का दावा।
जॉर्डन की सेना ने 5 मिसाइलें हवा में मार गिराईं; बहरीन की वायु रक्षा ने भी हमले विफल किए — कोई हताहत नहीं।
CENTCOM ने पहले होर्मुज के निकट ईरान के करीब 20 ठिकानों पर चार घंटे की सैन्य कार्रवाई की थी।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा यह कार्रवाई अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर गिराए जाने का जवाब था।
विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर चेतावनी दी कि ईरान की सेनाएँ किसी भी हमले का जवाब देंगी।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 10 जून को दावा किया कि उसने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन समेत खाड़ी क्षेत्र के 22 अमेरिकी और संबद्ध सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान के अनुसार, यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी वायु रक्षा प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों का प्रत्युत्तर है। अप्रैल में हुए युद्धविराम के बाद यह दोनों देशों के बीच सबसे गंभीर सैन्य टकराव माना जा रहा है।

हमलों का दायरा और लक्ष्य

IRGC ने दावा किया कि जॉर्डन में अल-अजराक एयर बेस — जहाँ अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान तैनात हैं — और एक अमेरिकी कमांड सेंटर सहित चार प्रमुख सैन्य ठिकानों पर लंबी दूरी की मिसाइलें दागी गईं। इसके अलावा, कुवैत के अली अल-सलेम अमेरिकी सैन्य अड्डे और बहरीन स्थित अमेरिकी पाँचवें बेड़े के मुख्यालय को भी ड्रोन हमलों से निशाना बनाए जाने का दावा किया गया।

ईरान के सरकारी प्रसारक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित केश्म द्वीप और सीरिक बंदरगाह पर भी हमले हुए। बंदर अब्बास और जास्क के आसपास विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं।

सहयोगी देशों की वायु रक्षा प्रतिक्रिया

जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसने ईरान की ओर से दागी गई पाँच मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया और इस घटना में कोई हताहत या भौतिक क्षति नहीं हुई। बहरीन के शाही दरबार के मीडिया सलाहकार ने पुष्टि की कि देश की वायु रक्षा प्रणाली ने ईरानी हमलों को विफल कर दिया। बहरीन के गृह मंत्रालय ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया था।

कुवैत की सेना ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियाँ संदिग्ध हवाई लक्ष्यों पर नज़र रख रही हैं।

अमेरिकी कार्रवाई और ट्रंप का बयान

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इससे पहले बताया था कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट ईरान के वायु रक्षा तंत्र, नियंत्रण केंद्रों और निगरानी रडार ठिकानों पर कार्रवाई की, जिसमें करीब 20 ईरानी ठिकाने निशाने पर थे। यह सैन्य कार्रवाई लगभग चार घंटे तक चली।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि यह हमला एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के जवाब में किया गया। एबीसी न्यूज़ से बातचीत में ट्रंप ने कहा, 'हमारा जवाब बेहद मज़बूत और प्रभावशाली होना चाहिए था, और यही हमने किया है।'

ईरान की चेतावनी और विदेश मंत्री का बयान

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'अमेरिका ने हमारे संकल्प की परीक्षा लेने का फैसला किया है। हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएँ किसी भी हमले या धमकी का जवाब दिए बिना नहीं छोड़ेंगी।' IRGC ने भी चेतावनी दी कि यदि सैन्य कार्रवाई जारी रही तो जवाब और अधिक कड़ा होगा।

संघर्ष की पृष्ठभूमि और आगे की राह

गौरतलब है कि इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमलों से हुई थी। इसके बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही को गंभीर रूप से प्रभावित किया — जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल एवं गैस मार्गों में से एक है। अप्रैल में युद्धविराम के बाद भी यह ताज़ा टकराव बताता है कि संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने की संभावनाएँ अभी भी अनिश्चित बनी हुई हैं। विश्लेषकों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य पर किसी भी दीर्घकालिक व्यवधान का असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर सीधे पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह 10 जून की रात ने उजागर कर दिया — दोनों पक्षों के बीच जवाबी हमलों का यह सिलसिला बताता है कि संघर्ष-विराम एक विराम था, समाधान नहीं। सबसे बड़ा जोखिम होर्मुज जलडमरूमध्य है: दुनिया के तेल व्यापार का लगभग पाँचवाँ हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, और किसी भी दीर्घकालिक व्यवधान का असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर तत्काल और गंभीर होगा। जॉर्डन और बहरीन की वायु रक्षा प्रणालियों ने फिलहाल हमले रोके, लेकिन क्षेत्रीय देशों पर बढ़ता दबाव उनकी तटस्थता को लंबे समय तक बनाए रखना कठिन बना सकता है। मुख्यधारा की कवरेज में जो बात अक्सर छूट जाती है, वह यह है कि 28 फरवरी से शुरू हुई इस श्रृंखला में हर जवाबी हमला अगले के लिए नई सीमा तय कर रहा है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में 22 ठिकानों पर हमला क्यों किया?
ईरान का कहना है कि यह हमला होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी वायु रक्षा प्रतिष्ठानों पर की गई कार्रवाई का जवाब है। अमेरिका के अनुसार, उसकी कार्रवाई एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर मार गिराए जाने के बाद की गई थी।
क्या जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को नुकसान हुआ?
जॉर्डन की सेना ने पाँच ईरानी मिसाइलें हवा में नष्ट कर दीं और किसी हताहत या नुकसान की पुष्टि नहीं की। बहरीन के अधिकारियों ने भी कहा कि वायु रक्षा प्रणाली ने हमले विफल कर दिए। कुवैत की सेना ने हवाई लक्ष्यों पर निगरानी की पुष्टि की।
यह संघर्ष कब और कैसे शुरू हुआ?
इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमलों से हुई थी। इसके बाद ईरान ने खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया और होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित की। अप्रैल में युद्धविराम हुआ था, लेकिन 10 जून का टकराव उसे तोड़ता दिखता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस मार्गों में से एक है। इस रास्ते से वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए यहाँ किसी भी व्यवधान का असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर सीधे पड़ता है।
ईरान के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान के संकल्प की परीक्षा लेने का फैसला किया है और ईरान की सशस्त्र सेनाएँ किसी भी हमले या धमकी का जवाब देंगी। IRGC ने भी चेतावनी दी कि सैन्य कार्रवाई जारी रहने पर जवाब और कड़ा होगा।
राष्ट्र प्रेस
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