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होर्मुज स्ट्रेट बंद: ईरान ने जॉर्डन-बहरीन-कुवैत पर दागीं 12 बैलिस्टिक मिसाइलें, कतर ने की कड़ी निंदा

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होर्मुज स्ट्रेट बंद: ईरान ने जॉर्डन-बहरीन-कुवैत पर दागीं 12 बैलिस्टिक मिसाइलें, कतर ने की कड़ी निंदा

सारांश

ईरान ने गुरुवार तड़के जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर 12 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं और होर्मुज स्ट्रेट सभी जहाजों के लिए बंद कर दिया। कतर ने इसे संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया। वैश्विक तेल बाज़ार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरे असर की आशंका है।

मुख्य बातें

IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने गुरुवार तड़के 12 बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर जॉर्डन , बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
निशाने पर अल-अजराक एयर बेस (जॉर्डन) और अमेरिकी F-35, F-15, F-16 विमानों की तैनाती वाले ठिकाने थे।
ईरान के खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने होर्मुज स्ट्रेट को तेल टैंकरों सहित सभी जहाजों के लिए पूरी तरह बंद किया।
कतर के विदेश मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट कर हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया और तनाव कम करने की अपील की।
ईरानी कमांड ने अमेरिकी दावे को खारिज किया कि जहाज अभी भी होर्मुज से गुजर रहे हैं; किसी भी आवाजाही को निशाना बनाने की चेतावनी दी।

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने गुरुवार तड़के जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर 12 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसके बाद कतर के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताते हुए कड़ी निंदा की। इसके साथ ही ईरान के खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने होर्मुज स्ट्रेट को तेल टैंकरों और वाणिज्यिक जहाजों सहित सभी शिपिंग के लिए पूरी तरह बंद करने की घोषणा कर दी।

मिसाइल हमले: क्या निशाना बनाया गया

IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने दावा किया कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में अमेरिकी F-35, F-15 और F-16 लड़ाकू विमानों की तैनाती वाले ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें जॉर्डन स्थित अल-अजराक एयर बेस और वहाँ मौजूद अमेरिकी सेना के नियंत्रण केंद्र शामिल बताए गए हैं। IRGC के जनसंपर्क विभाग ने गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी।

गौरतलब है कि ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है और दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद क्षेत्र में असुरक्षा का वातावरण बन गया है।

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की बड़ी कार्रवाई

ईरान के खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमलों से उत्पन्न असुरक्षा का हवाला देते हुए होर्मुज स्ट्रेट को सभी प्रकार के जहाजों के लिए बंद करने की घोषणा की। कमांड ने स्पष्ट किया कि तेल टैंकरों और वाणिज्यिक जहाजों समेत किसी भी जहाज की आवाजाही को निशाना बनाया जाएगा।

कमांड ने अमेरिका के उस दावे को भी सिरे से खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि जहाज अभी भी इस जलमार्ग से गुजर रहे हैं। यह ऐसे समय में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से विश्व का लगभग 20% तेल व्यापार गुजरता है और इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर गहरा असर पड़ सकता है।

कतर की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय एकजुटता

कतर के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "हशमाइट किंगडम ऑफ जॉर्डन, किंगडम ऑफ बहरीन और स्टेट ऑफ कुवैत के खिलाफ ईरान के नए हमलों की कतर कड़ी निंदा करता है। यह इन देशों की सॉवरेनिटी का खुला उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है।"

मंत्रालय ने यह भी जोर देकर कहा कि इस इलाके को इन हमलों से बचाया जाए और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता बहाल करने के लिए तनाव कम करने की दिशा में काम किया जाए। कतर ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन के साथ अपनी पूर्ण एकजुटता व्यक्त की और उनकी संप्रभुता व सुरक्षा के लिए उठाए गए सभी कदमों का समर्थन दोहराया।

ईरान की चेतावनी और आगे का संकट

ईरानी कमांड ने चेतावनी दी है कि ईरानी सशस्त्र बल क्षेत्र में किसी भी हमले और अमेरिकी सैन्य गतिविधि का करारा और निर्णायक जवाब देंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच संघर्ष एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है।

होर्मुज स्ट्रेट की बंदी और खाड़ी देशों पर मिसाइल हमलों के बाद वैश्विक तेल कीमतों पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है। क्षेत्रीय विश्लेषकों का कहना है कि यह संकट अगले कुछ घंटों में और गहरा हो सकता है, जब तक कि कूटनीतिक हस्तक्षेप की कोई ठोस पहल सामने नहीं आती।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि विश्व के कुल तेल व्यापार का लगभग पाँचवाँ हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता है। IRGC का यह कदम दर्शाता है कि ईरान अब पारंपरिक सैन्य टकराव से आगे बढ़कर आर्थिक दबाव को हथियार बना रहा है। कतर की निंदा प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है — दोहा खुद अमेरिकी सैन्य अड्डे का मेज़बान है, इसलिए यह बयान केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा के प्रति सीधी चिंता का इज़हार भी है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि होर्मुज की बंदी का सबसे तत्काल असर भारत पर पड़ेगा, जो खाड़ी से अपनी तेल ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट क्यों बंद किया?
ईरान के खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमलों से उत्पन्न असुरक्षा का हवाला देते हुए होर्मुज स्ट्रेट को सभी जहाजों के लिए बंद करने की घोषणा की। कमांड ने चेतावनी दी कि तेल टैंकरों और वाणिज्यिक जहाजों सहित किसी भी आवाजाही को निशाना बनाया जाएगा।
IRGC ने किन देशों पर मिसाइल हमले किए?
IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने गुरुवार तड़के जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर 12 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस और अमेरिकी F-35, F-15 व F-16 विमानों की तैनाती वाले ठिकाने इसमें शामिल बताए गए।
कतर ने ईरान के हमलों पर क्या कहा?
कतर के विदेश मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट कर जॉर्डन, बहरीन और कुवैत पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की और इसे संबंधित देशों की संप्रभुता तथा अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया। कतर ने तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की अपील भी की।
होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से क्या असर होगा?
होर्मुज स्ट्रेट से विश्व के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए इसके बंद होने से वैश्विक तेल कीमतों पर तत्काल दबाव पड़ने की आशंका है। भारत सहित वे देश जो खाड़ी से तेल आयात पर निर्भर हैं, उन पर इसका सीधा आर्थिक असर हो सकता है।
अमेरिका-ईरान के बीच मौजूदा तनाव की वजह क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। IRGC ने स्पष्ट किया कि ये हमले हालिया अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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