अमेरिकी सेना का ईरान पर लगातार 11वीं रात हमला, ईरान ने बहरीन-कुवैत के अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल दागे
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने 22 जुलाई को पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने मंगलवार शाम 8:15 बजे (अमेरिकी समय) ईरान पर लगातार 11वीं रात सैन्य हमले किए। सेंटकॉम ने यह जानकारी अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल के माध्यम से साझा की। जवाब में ईरान ने दावा किया कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से पलटवार किया है।
हमलों में क्या निशाना बनाया गया
सेंटकॉम के अनुसार, इन हमलों में ईरान के सैन्य ऑपरेशन सेंटर, समुद्री सैन्य क्षमताओं से जुड़े ठिकाने, सैन्य विमानों के हैंगर, ड्रोन स्टोरेज सुविधाएँ और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमज़ोर करना है, जिससे वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले व्यापारिक जहाज़ों के लिए खतरा पैदा कर सके।
होर्मुज जलडमरूमध्य: तीन महीनों का संकट
सेंटकॉम ने दावा किया कि पिछले तीन महीनों में ईरान ने इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुज़र रहे 30 से अधिक व्यावसायिक जहाज़ों पर हमले किए, जिससे सैकड़ों नाविकों की जान खतरे में पड़ी और समुद्र में स्वतंत्र आवाजाही प्रभावित हुई। हालाँकि अमेरिका का कहना है कि इन घटनाओं के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी व्यापारिक जहाज़ों के लिए खुला है। सेंटकॉम के मुताबिक, मई की शुरुआत से अब तक उसकी सेना ने इस मार्ग से करीब 900 व्यावसायिक जहाज़ों के सुरक्षित आवागमन में सहायता की है, जिनमें लगभग 45 करोड़ बैरल कच्चा तेल ले जाया गया।
ईरान का जवाबी हमला
ईरान ने दावा किया कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अपने आधिकारिक न्यूज़ आउटलेट 'सेपाह न्यूज़' के ज़रिए जारी बयान में कहा कि उसकी एयरोस्पेस फ़ोर्स ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली, रडार केंद्र, संचार नेटवर्क और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। जॉर्डन में भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए जाने का दावा किया गया।
प्रमुख अमेरिकी अड्डे निशाने पर
ईरानी सेना ने कहा कि उसने कुवैत और बहरीन में कैंप अरिफजान, अहमद अल-जाबेर एयर बेस और शेख ईसा एयर बेस जैसे प्रमुख सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। आईआरजीसी के अनुसार, यह कार्रवाई हाल के अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई और इसका उद्देश्य क्षेत्र में आगे और बड़े स्तर पर मिसाइल तथा ड्रोन अभियान का रास्ता तैयार करना है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य — जिससे दुनिया का लगभग एक-पाँचवाँ तेल गुज़रता है — पहले से ही वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों के लिए एक संवेदनशील बिंदु बना हुआ है। दोनों पक्षों की ओर से जारी जवाबी कार्रवाइयों के बीच क्षेत्रीय तनाव और गहराने की आशंका है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें इस संघर्ष के अगले मोड़ पर टिकी हैं।