22 जुलाई 2026
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अमेरिकी सेना का ईरान पर लगातार 11वीं रात हमला, ईरान ने बहरीन-कुवैत के अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल दागे

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अमेरिकी सेना का ईरान पर लगातार 11वीं रात हमला, ईरान ने बहरीन-कुवैत के अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल दागे

सारांश

अमेरिका ने ईरान पर लगातार 11वीं रात हमले किए — होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाज़ों की सुरक्षा के नाम पर। जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन दागने का दावा किया। दोनों पक्षों के बीच यह टकराव अब सीधे क्षेत्रीय युद्ध की शक्ल लेता दिख रहा है।

मुख्य बातें

अमेरिकी सेना ने 22 जुलाई को ईरान पर लगातार 11वीं रात सैन्य हमले किए, जिसकी पुष्टि सेंटकॉम ने की।
हमलों में ईरान के सैन्य ऑपरेशन सेंटर , ड्रोन स्टोरेज , विमान हैंगर और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर निशाने पर रहे।
सेंटकॉम के अनुसार, पिछले तीन महीनों में ईरान ने 30 से अधिक व्यावसायिक जहाज़ों पर हमले किए; मई से अब तक 900 जहाज़ों को सुरक्षित निकाला गया।
आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने बहरीन , कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन से जवाबी हमला किया।
निशाने पर कैंप अरिफजान , अहमद अल-जाबेर एयर बेस और शेख ईसा एयर बेस शामिल बताए गए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी व्यापारिक जहाज़ों के लिए खुला है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव तेज़ी से बढ़ रहा है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने 22 जुलाई को पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने मंगलवार शाम 8:15 बजे (अमेरिकी समय) ईरान पर लगातार 11वीं रात सैन्य हमले किए। सेंटकॉम ने यह जानकारी अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल के माध्यम से साझा की। जवाब में ईरान ने दावा किया कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से पलटवार किया है।

हमलों में क्या निशाना बनाया गया

सेंटकॉम के अनुसार, इन हमलों में ईरान के सैन्य ऑपरेशन सेंटर, समुद्री सैन्य क्षमताओं से जुड़े ठिकाने, सैन्य विमानों के हैंगर, ड्रोन स्टोरेज सुविधाएँ और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमज़ोर करना है, जिससे वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले व्यापारिक जहाज़ों के लिए खतरा पैदा कर सके।

होर्मुज जलडमरूमध्य: तीन महीनों का संकट

सेंटकॉम ने दावा किया कि पिछले तीन महीनों में ईरान ने इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुज़र रहे 30 से अधिक व्यावसायिक जहाज़ों पर हमले किए, जिससे सैकड़ों नाविकों की जान खतरे में पड़ी और समुद्र में स्वतंत्र आवाजाही प्रभावित हुई। हालाँकि अमेरिका का कहना है कि इन घटनाओं के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी व्यापारिक जहाज़ों के लिए खुला है। सेंटकॉम के मुताबिक, मई की शुरुआत से अब तक उसकी सेना ने इस मार्ग से करीब 900 व्यावसायिक जहाज़ों के सुरक्षित आवागमन में सहायता की है, जिनमें लगभग 45 करोड़ बैरल कच्चा तेल ले जाया गया।

ईरान का जवाबी हमला

ईरान ने दावा किया कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अपने आधिकारिक न्यूज़ आउटलेट 'सेपाह न्यूज़' के ज़रिए जारी बयान में कहा कि उसकी एयरोस्पेस फ़ोर्स ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली, रडार केंद्र, संचार नेटवर्क और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। जॉर्डन में भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए जाने का दावा किया गया।

प्रमुख अमेरिकी अड्डे निशाने पर

ईरानी सेना ने कहा कि उसने कुवैत और बहरीन में कैंप अरिफजान, अहमद अल-जाबेर एयर बेस और शेख ईसा एयर बेस जैसे प्रमुख सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। आईआरजीसी के अनुसार, यह कार्रवाई हाल के अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई और इसका उद्देश्य क्षेत्र में आगे और बड़े स्तर पर मिसाइल तथा ड्रोन अभियान का रास्ता तैयार करना है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य — जिससे दुनिया का लगभग एक-पाँचवाँ तेल गुज़रता है — पहले से ही वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों के लिए एक संवेदनशील बिंदु बना हुआ है। दोनों पक्षों की ओर से जारी जवाबी कार्रवाइयों के बीच क्षेत्रीय तनाव और गहराने की आशंका है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें इस संघर्ष के अगले मोड़ पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि बिना किसी कूटनीतिक निकास-मार्ग के यह चक्र कहाँ रुकेगा। बहरीन, कुवैत और जॉर्डन जैसे अमेरिकी साझेदार अब सीधे निशाने पर हैं, जो इस संघर्ष को द्विपक्षीय से बहुपक्षीय बनाने की दिशा में धकेल रहा है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि इन हमलों का वैश्विक तेल आपूर्ति और भारत जैसे बड़े कच्चे तेल आयातकों पर दीर्घकालिक असर क्या होगा।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका ने ईरान पर 11वीं रात हमले क्यों किए?
अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले व्यापारिक जहाज़ों को ईरान के खतरे से बचाना है। सेंटकॉम के अनुसार, पिछले तीन महीनों में ईरान ने 30 से अधिक व्यावसायिक जहाज़ों पर हमले किए, जिससे सैकड़ों नाविकों की जान खतरे में पड़ी।
ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में क्या किया?
ईरान की आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। निशाने पर कैंप अरिफजान, अहमद अल-जाबेर एयर बेस और शेख ईसा एयर बेस जैसे प्रमुख अड्डे बताए गए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति अभी कैसी है?
अमेरिका के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी व्यापारिक जहाज़ों के लिए खुला है। सेंटकॉम ने बताया कि मई की शुरुआत से अब तक उसकी सेना ने करीब 900 व्यावसायिक जहाज़ों के सुरक्षित आवागमन में मदद की है, जिनमें लगभग 45 करोड़ बैरल कच्चा तेल ले जाया गया।
अमेरिकी हमलों में ईरान के कौन-से ठिकाने निशाने पर थे?
सेंटकॉम के अनुसार, हमलों में ईरान के सैन्य ऑपरेशन सेंटर, समुद्री सैन्य क्षमताओं से जुड़े ठिकाने, सैन्य विमानों के हैंगर, ड्रोन स्टोरेज सुविधाएँ और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया।
क्या यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है?
दोनों पक्षों की जवाबी कार्रवाइयाँ लगातार बढ़ रही हैं और ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी अड्डों पर हमले का दावा किया है। आईआरजीसी ने संकेत दिया है कि यह भविष्य में और बड़े मिसाइल-ड्रोन अभियान की तैयारी है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और गहराने की आशंका बढ़ गई है।
राष्ट्र प्रेस
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